*सीवान : क्या वेब न्यूज पोर्टल की सच्चाई से परेशान हैं प्रिंट मीडिया के कथित संवाददाता…?*
—————————————-
✍दैनिक खोज खबर के लिए राकेश सिंह लववंशी की रिपोर्ट
—————————————-

सिवान :- सूचनाओं के इस संसार में हमेशा अपडेट रहना अब जीवन का अनिवार्य अंग बन गया है।लोग जीवन की कोई समस्या हो या कोई खबर ही हो।आज के इस जमाने में हर कोई रिपोर्टर है और हर कोई पाठक भी।इसलिए इस मुगालते में मत रहिए।मीडिया घराना कब किसको बाहर करता है और किसको अंदर कुछ पता नहीं चलता है।वैसे भी मीडिया घराने कितनों को मानदेय और पहचान देते हैं इसे लोग भी भली-भांति जानते हैं।
क्योंकि आज लोग किसी भी सामग्री को इंटरनेट पर सर्च करना नहीं भूलते।आज देश में जितने घरों में स्मार्टफोन हैं उससे बहुत कम शौचालय हैं।तभी तो सरकारें अब शौचालय बनवाने और उसके उपयोग करने के विज्ञापनों में मोबाईल की भी बात करने लगी है।लेकिन आज भी प्रिंट मीडिया के कुछ बंधु पुरातन युग में जी रहे हैं।उनका कहना है कि वे जो लिख दिए वही अंतिम सत्य है।
दरअसल बात हो रही है कल सोमवार को एसएच 73 पर दुर्घटना में 48 वर्षीय एक व्यक्ति के मौत की।मृतक पचरुखी प्रखंड क्षेत्र के सहलौर गांव के सत्यनारायण सिंह का पुत्र गौरी प्रसाद था।जिसकी सर्वप्रथम खबर हमारे अपने न्यूज पोर्टल “दैनिक खोज-खबर” पर चली थी।लेकिन जिले में प्रसारित होने वाले प्रमुख अखबारों ने उस मृतक को जीबी नगर थाना क्षेत्र के सुरवाला गांव का निवासी बता दिया।संवाददाता गण ना तो मृतक के घर पहुंचे और ना हिन्घटना स्थल का दौरा किया।और तो और जब इस गलती की ओर समाजसेवी उमेश सिंह पटेल और इस संवाददाता ने इंगित किया।तो एक अखबार के तथाकथित संवाददाता जो अपने आपको बहुत बड़े मीडिया घराना से जुड़ा बताते हैं, ने इसे मानने के बजाय धमकी भरे भाषा का भी प्रयोग करने लगे।इनका कहना है कि थाना में मृतक का गांव सुरवाला दर्ज है।इसलिए हमलोग सुरवाला लिख दिए।
हालांकि इस संबंध में “दैनिक खोज खबर” के संवाददाता ने तरवारा थानाध्यक्ष ललन कु.सिंह से बात की।थानाध्यक्ष की ओर से बताया गया कि थाना के किसी भी कागजात में मृतक को सुरवाला निवासी नहीं बताया गया है।मृतक सहलौर का निवासी था और उसके परिजनों को शव सौप दिया गया।
अब कथित पत्रकार मित्र को कौन समझाए कि अगर मृतक सुरवाला गांव का होता तो उसका अंतिम संस्कार सहलौर में नहीं होता।
खैर…पत्रकार महाशय आप ही बताईए कि आप अपनी बात को अंतिम सत्य व न्यायसंगत बतलाने पर तुले हैं।
आपको सोचना चाहिए आखिर मृतक के शव को सौंपे जाने वाले परिजन कहां के हैं ?
अब उस महानुभाव को कौन समझाए कि धमकी और नफरत से तो ऐसे ही दुनिया जल रही है।कभी तो प्रेम किया करो भाई।हालांकि शेष संवाददाताओं ने इसे बुरा नहीं माना।
वैसे इस संबंध में बुद्विजीवियों का कहना है कि गांव-देहात में अभी प्रिंट मीडिया की इज्जत बनी हुई है।लेकिन यही रवैया रहा तो वह दिन दूर नहीं होगा जब पत्रकारिता की रही सही इज्जत मटियामेट हो जाएगी।