सारण :पुरे विश्व को एक अच्छा स्वास्थ्य देने के लिये योग की अति आवश्यकता है-गोविन्द जी महाराज

#सुरभि तिवारी
तरैया:10.04.2018
वाईडीबीएस कॉलेज परिसर में आयोजित श्री कृष्ण प्रणामी धर्म ।श्री प्राण नाथ सेवा आश्रम ट्रष्ट के तत्वधान में चल रहे संगीतमय भागवत कथा एवम योग शिविर के दसवें दिन संत गोविंद जी महाराज ने सुबह के सत्र में योग शिविर के दौरान नियमित करने वाले आसन प्राणायाम की विशेष शिक्षा दी ।इस अवसर पर महाराज जी ने कहा कि वर्तमान समय मे लोगो का खान पान रहन सहन जीवन शैली बदल चुका है। इसलिये मनुष्य नाना प्रकार के रोगों और मानसिक तनाव से ग्रसित हो रहा है। इसलिए मनुष्य को सदा ही स्वस्थ्य रहने के लिये यम ,नियम ,आसन, प्राणायाम,आदि का नियमित अभ्यास करने से पूरे शरीर से विजातीय तत्व बाहर निकल जाते है ।नियमित करने वाले आसन ,वज्रासन,मण्डूकासन,
शशकासन,मकरासन,पवनमुक्तासन,द्विचकरिकासन्न,पाद वृक्त आसन ,मर्कटासन,आदि प्राणायाम ,में भस्त्रिका ,कपालभांति, वाह्य प्राणायम,अग्निसार अनुलोमविलोम, आदि नियमित किया जाय साथ ही शुद्ध शाकाहारी ,नशा मुक्त जीवन जिया जाय,तथा ब्रह्म वेला में सुबह के तीन बजे से पांच बजे के बीच इन आसन और प्राणायाम का अभ्यास करना चाहिए। क्योंकि वायुमंडल में सबसे ज्यादा आक्सीजन ब्रह्म वेला में ही होता है। अतः प्राणायाम के द्वारा शुद्ध ऑक्सीजन के प्राप्त होने से शरीर की एक कोशिकाएं स्वस्थ्य होती अतः हमारे शरीर का एक एक अंग निरोग हो जाता है ।
गोविंद जी महाराज ने कहा कि पूरी दुनिया को एक अच्छा स्वास्थ्य देने के लिये योग की अति आवश्यकता है।अतः पूरी दुनिया को भारत के ऋषि परम्परा को धारण करना ही पड़ेगा तभी एक नए विश्व का निर्माण सम्भव है।
*अक्षरातीत श्री कृष्ण ही सभी आत्माओ के पति है:गोविन्द जी महाराज*
संगीतमय भागवत कथा के दसवें दिन गोविंद जी महाराज ने कहा कि अक्षरातीत श्री कृष्ण ही सभी आत्माओ के पति है ।अक्षरातीत श्री कृष्ण ही सनातन पूर्ण ब्रह्म है ।अक्षर ब्रह्म से भी परे उत्तम पुरुष अक्षरातीत ही सबके वरण करने योग्य परमात्मा है ।पुरुषोत्तम को प्राप्त करने के लिये अनन्य प्रेम लक्षणा भक्ति अति आवश्यक है इस प्रेम के प्राप्त होते ही जिस तरह प्रकृति से परे योगमाया के ब्रह्मांड में रासलीला के समय भगवान श्री कृष्ण के अंतर्ध्यान होने से गोपियों ने विरह रूपी दुःख का अनुभव किया उसी तरह आज भी ब्रह्मात्माओं को परमात्मा के अनन्य प्रेममयी वियोग में डूबना पड़ेगा ।जब कोई परमात्मा के वियोग में रोता है ,गाता है, नाचता है, अश्रुधार से अपने को सराबोर कर लेता हैं ।तब जिस तरह गोपियों के विरह को प्राणप्रियतम श्री कृष्ण ने प्रकट होकर शांति प्रदान किये उसी तरह भक्त को भगवान शाश्वत परमधाम की प्राप्ति करा देते हैं