बाबा गोरखनाथ और संत कबीर का भी जहां हुआ था आगमन

मांझी। सारण जिले के मांझी प्रखंड के अंतर्गत शीतलपुर गांव स्थित श्रीराम जानकी मंदिर परिसर में अवस्थित प्राचीन हनुमान मंदिर भक्तों के आस्था का केंद्र है। जहां भक्त-शिरोमणि के दर्शन करने को बिहार हीं नही बल्कि उतर प्रदेश, मध्यप्रदेश, दिल्ली सहित कई अन्य सुदूर प्रदेशों से भी श्रद्धालु भक्त पहुंचते हैं और पूजा-अर्चना करने के साथ मन्नत मांगते हैं। पुजारी मदन पांडेय जी का कहना है कि यह मंदिर 500 वर्ष पुराना है। जिसके अंदर दीवार से सटे मिट्टी के हनुमान जी की मूर्ति की स्थापना महान संत व भक्त हनुमान दास जी के द्वारा की गई थी। जो आज भी पूरी तरह से सुरक्षित हैं। कई ग्रामीणों ने बताया कि यहां पर हर समुदाय के लोग पूजा-अर्चना करने के लिए आते हैं। हनुमान जी सबकी मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं। पुजारी ने बताया कि पूर्वज कहते हैं कि 15वीं सदी में तत्कालीन पुजारी व संत हनुमान दास जी से मिलने को लेकर एक बार बाबा गोरखनाथ एवं संत कबीर जी का मंदिर में आगमन हुआ। हनुमान दास जी मिट्टी के दीवार पर बैठे थे। उन्होंने स्वागत के बाद कबीर दास एवं बाबा गोरखनाथ को परिसर के अंदर लेकर गए। उसके बाद धर्म एवं शास्त्र पर गहन चर्चा हुई थी। बदन सिंह, नन्द किशोर उपाध्याय, रमेश कुमार साह, रमेश मांझी, लीला साह, सतानंद, पुण्यदेव शार्मा आदि की भी इस मंदिर एवं अंदर स्थापित मिट्टी की मूर्ति के सम्बंध में एक हीं राय है। पहले मंदिर साधारण अवस्था मे थी। मगर मन्नतें पूरी होने व श्रद्धा के कारण बाद में सक्षम भक्तों व ग्रामीणों के सहयोग से आज यह मंदिर परिसर सबके लिए आकर्षण का केन्द्र बन गया है।




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