
हसन-हुसैन की कुर्बानी का मुस्लिमो ने मोहर्रम में किया याद
दैनिक खोज खबर/सोनपुर। प्रशासन के चाक-चौबंद सुरक्षा व्यवस्था के बीच सोनपुर में नगर से लेकर ग्रामीण क्षेत्र के मुस्लिम समुदाय के लोग शुक्रवार शाम के तजिता जुलुस निकालकर मोहर्रम का पर्व शांतिपूर्ण एवं सौहार्दपूर्ण माहौल में मनाया गया। सोनपुर स्वाइच , मियाँ बांगा सोनपुर,सबलपुर चहारम, नयागांव क्षेत्रों के विभिन्न महत्वपूर्ण स्थानों से ताजिया जुलूस निकाला गया, जिसमें बड़ी संख्या में अकीदतमंद लोग पहुँचे जहाँ सैकड़ो महिलाओं पुरुष व बच्चियों, यहां तक के हिन्दुओ ने भी रंग बिरंगी रौशनी से सजे तजिया का दर्शन कर पुजन कर घरो में सुख शांति की दुआ मांगी और आसपास के कर्बला पर पहुँच कर दर्शन किया।
तजिया जुलूस के दौरान युवाओं ने पारंपरिक अखाड़ों के माध्यम से अपने लाठी डंडे, तलवार, डियूलाईट से करतब का प्रदर्शन किया तथा “या अली, या हुसैन” के नारों से पूरा क्षेत्र गूंज उठा।
मोहर्रम को लेकर प्रशासन पूरी तरह सतर्क रहा। संवेदनशील स्थानों पर दंडाधिकारी, पुलिस पदाधिकारी एवं पर्याप्त संख्या में पुलिस बल की तैनाती की गई थी। कई स्थानों पर बैरिकेडिंग, गश्ती दल तथा निगरानी ड्रोन कैमरा, वीडियो ग्राफी की विशेष व्यवस्था की गई ताकि किसी भी अप्रिय घटना को रोका जा सके।
जुलूस मार्गों पर स्थानीय लोगों ने जगह-जगह पानी एवं शरबत की व्यवस्था कर भाईचारे का संदेश दिया। देर शाम तक विभिन्न कर्बला एवं निर्धारित स्थलों पर ताजियों का पहलाम किया गया। प्रशासनिक अधिकारियों ने लगातार क्षेत्र का निरीक्षण कर शांति व्यवस्था बनाए रखी।
हसन-हुसैन की कुर्बानी का लोगो ने किया याद
बतादे कि मोहर्रम का त्योहार इस्लाम, इंसानियत और सच्चाई के लिए पैगम्बर मोहम्मद के नवासे हसन-हुसैन की कुर्बानी की याद में मनाया जाता है। बादशाह से हुए जंग में हसन-हुसैन ने अपनी कुर्बानी दी थी। अफंजल अली व मो नुरेन ने बताया कि हसन-हुसैन को कुर्बानी देने के दौरान काफी तड़पाया गया। यहां तक कि उसे पीने तक के लिए पानी तक नहीं दिया गया। बावजूद दोनों सच्चाई के रास्ते से नहीं डिगे और अंततः उन्हें मौत दे दी गई। तभी से उनके अनुयायी मातम के रूप में मुहर्रम का त्योहार मनाते हैं। जिस तरह हसन-हुसैन को तड़पा-तड़पा कर मारा गया था उसी तरह इस अवसर पर उनके अनुयायी छाती पीट कर व अपने पर कोड़े बरसा कर खुद को कष्ट पहुंचाते हैं। इस जुलूस में खुब मर्सिया गीत बजे। इन शोक गीतों ने माहौल को भी गमगीन कर दिया। जुलूस देखने के लिए सैकड़ों की संख्या में लोग सड़कों पर डटे रहें। मातम जुलूस में लोग शरीर पर धारदार जंजीर से मातम मनाते रहे।
मोहर्रम के अवसर पर सोनपुर में आपसी भाईचारा, सद्भाव और धार्मिक एकता की मिसाल देखने को मिली।




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