• जिला स्वास्थ्य समिति के द्वारा एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन
• परिवार नियोजन की सेवाओं को सुदृढ़ करने के लिए दिया गया ट्रेनिंग
• जपाईगो के ट्रेनर चिकित्सकों व कर्मियों को किया प्रशिक्षित

छपरा । परिवार नियोजन की गुणवत्तापूर्ण सेवाओं को उपलब्ध कराने एवं सुदृढ़ीकरण को लेकर जिला स्वास्थ्य समिति के द्वारा एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया गया। शहर के एक निजी होटल में आयोजित इस कार्यशाला में जिले के सभी चिकित्सा पदाधिकारियों, इम्पैनल सर्जन, प्रखंड स्वास्थ्य प्रबंधकों, प्रखंड सामुदायिक उत्प्रेरकों को परिवार नियोजन की सभी सेवाओं के बारे में जानकारी दी गयी। जपाईगो के राज्य प्रतिनिधि लीगिल वर्गिज के द्वारा पीपीटी के माध्यम से चिकित्सा कर्मियों को प्रशिक्षण दिया गया। जिला स्वास्थ्य समिति के डीसीएम ब्रजेंद्र कुमार सिंह ने बताया कि प्रशिक्षण में परिवार नियोजन के स्थाई एवं अस्थाई सेवा के बारे में बताया गया। इस दौरान नसबंदी, बंध्याकरण, कॉपर-टी, अंतरा, छाया, माला-एन, आईयूसीडी, पीपीआईयूसीडी, ईमरजेंसी पिल्स इत्यादि के बारे में विस्तार से जानकारी दी गयी। प्रशिक्षण के दौरान परिवार नियोजन के साधनों को लेकर भ्रांतियों पर भी चर्चा की गयी। डॉ. लीगिल वर्गिज ने कहा कि अंतरा लगवाने के बाद दो माह तक रक्तस्राव स्त्राव होना, महामारी का को अनियमित होना सामान्य बात है। प्रसव के छह सप्ताह बाद अंतरा की का सुई लगायी या जा सकती ता है। एचआईवी पॉजिटिव महिला को अंतरा लगाया जा सकता है। इस मौके पर डीसीएम ब्रजेन्द्र कुमार सिंह, जपाइगो के जिला समन्वयक विजय विक्रम, डीएमईओ भानू शर्मा, सीफार के डीसी गनपत आर्यन, प्रिंस कुमार, गौरव कुमार, मनोहर कुमार समेत अन्य चिकित्सा कर्मी मौजूद थे।

आईयूसीडी लगाने के दौरान बरती जाने वाली सावधानियों पर चर्चा:

डॉ. लीगिल वर्गिज ने कहा कि परिवार नियोजन के लिए आईयूसीडी आइयूसीडी सबसे उपयुक्त माध्यम है। चिकित्सक व कर्मी महिलाओं को दो बच्चों के बीच दो या दो से अधिक वर्ष के अंतर के लिए आईयूसीडी का प्रयोग करने की जानकारी दें। प्रशिक्षण में कर्मियों को इससे होने वाले लाभ व लगाने के दौराने बरती जाने वाली सावधानियों के बारे में भी बताया गया। आईयूसीडी लगाने के बाद महिलाओं के शरीर पर इसका कोई दुष्प्रभाव नहीं पड़ता है। महिलाएं ऑपरेशन के नाम पर बंध्याकरण से डरती हैं, उनके लिए आईयूसीडी बेहतर विकल्प है।

अनचाहे गर्भ से बचा जा सकता है आईयूसीडी से :

डॉ. लीगिल वर्गिज ने बताया कि प्रसव के 48 घंटे के अंदर पीपीआईयूसीडी, गर्भ समापन के बाद पीएआईयूसीडी व कभी भी आईयूसीडी को किसी सरकारी अस्पताल में लगवाया जा सकता है। इसके इस्तेमाल से जहां अनचाहे गर्भ से बचा जा सकता है तो इसके इस्तेमाल से सेहत को कोई नुकसान नहीं है।

बच्चों में अंतर रखने के लिए कॉपर-टी बेहतर विकल्प:

पोस्ट पार्टम इंट्रा यूटाराइन कांट्रासेप्टिव डिवाइस (पीपीआईयूसीडी)। यह उस गर्भ निरोधक विधि का नाम है जिसके जरिए बच्चों में सुरक्षित अंतर रखने में मदद मिलती है। प्रसव के तुरंत बाद अपनाई जाने वाली यह विधि सरकारी अस्पतालों में नि:शुल्क उपलब्ध है। प्रसव के बाद अस्पताल से छ़ुट्टी मिलने से पहले ही यह डिवाइस (कॉपर टी) लगवाई जा सकती है। इसके अलावा माहवारी या गर्भपात के बाद भी डाक्टर की सलाह से इसे लगवाया जा सकता है। एक बार लगवाने के बाद इसका असर पांच से दस वर्षों तक रहता है। यह बच्चों में अंतर रखने की लंबी अवधि की एक विधि है। इसमें गर्भाशय में एक छोटा उपकरण लगाया जाता है।