
नवादा : बेहतर स्वास्थ्य की शुरुवात स्तनपान के साथ
प्रसवोत्तर रक्त स्त्राव से करता है बचाव
स्तन कैंसर एवं अंडाशय कैंसर में लाता है कमी
डायरिया, निमोनिया एवं कुपोषण से करता है बचाव
20 प्रतिशत तक शिशु मृत्यु दर में लाता है कमी
रिपोर्ट – सन्नी भगत
नवादा / 5 मार्च: शिशु के लिए माता का दूध एक सर्वोत्तम आहार होने के साथ उनका मौलिक अधिकार भी है. माँ का दूध शिशु को शारीरिक एवं मानसिक रूप से विकसित होने में मदद करता है. स्तनपान करने वाले बच्चों में प्राकृतिक रूप से रोगों से लड़ने की क्षमता का विकास होता है जिससे डायरिया, निमोनिया एवं कुपोषण जैसे गंभीर रोगों से बच्चे का प्रभावी रूप से बचाव भी होता है.
शिशु मृत्यु दर में कमी है संभव : जन्म के 1 घंटे के भीतर माँ का पीला गाढ़ा दूध शिशु की प्रतिरोधक क्षमता में इजाफ़ा करता है एवं जन्म से 6 महीने तक सिर्फ़ स्तनपान कराने से बच्चा रोगों से सुरक्षित रहने के साथ कुपोषण से भी बचा रहता है.विश्व स्वास्थ्य संगठन की एक रिपोर्ट के अनुसार विश्व भर में लगभग 25 लाख बच्चों की मृत्यु जन्म के पहले महीने में ही हो जाती है. निमोनिया एवं दस्त शिशु मृत्यु दर के कारणों में प्रमुखता से शामिल होता है . इस रिपोर्ट के अनुसार जन्म से 1 घंटे तक माँ का गाढ़ा दूध, 6 महीने तक सिर्फ़ स्तनपान एवं 6 महीने के बाद 2 साल तक स्तनपान के साथ अनुपूरक आहार देने से बच्चा निमोनिया, दस्त एवं कुपोषण से सुरक्षित रहता है. साथ ही इन कारणों से होने वाले शिशु मृत्यु दर में 20 प्रतिशत तक कमी भी लायी जा सकती है.
स्तनपान के विषय में जागरुकता की जरुरत : राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वे-4 के अनुसार नवादा में जन्म के एक घंटे के अंदर मात्र 42.6 प्रतिशत महिला ही स्तनपान कराती हैं एवं 32.8 प्रतिशत महिलाओं के द्वारा ही से 6 माह तक केवल स्तनपान कराया जाता है. सरकारी प्रयासों के बाद भी स्तनपान में वांक्षित बढ़ोतरी का आभाव प्रदेश स्तर पर भी कायम है.
बिहार में जन्म के एक घंटे के अंदर मात्र 34.9 प्रतिशत महिला ही स्तनपान कराती हैं एवं 53.4 प्रतिशत महिलाओं के द्वारा ही से 6 माह तक केवल स्तनपान कराया जाता है. हालाँकि बिहार में पिछले राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वे-3 (2005-06) की तुलना में पहले घन्टे स्तनपान में लगभग 5 गुना एवं 6 माह तक सिर्फ़ स्तनपान में 2 गुना इजाफ़ा हुआ है, जिसे एक सकारात्मक संकेत समझा जा सकता है.
स्तनपान देता है माता को स्वास्थ्य लाभ : यूनिसेफ एवं विश्व स्वास्थ्य संघठन का मानना है कि स्तनपान कराने वाली महिलएं स्तनपान नहीं कराने वाली महिलाओं की अपेक्षा अधिक स्वस्थ रहती हैं. इनके अनुसार नियमित स्तनपान प्राकृतिक रूप से परिवार नियोजन में मदद करता है एवं बच्चों के जन्म में अंतर रखने में मदद करता है. इसके अलावा अंडाशय कैंसर(ओवेरियन कैंसर) एवं स्तन कैंसर जैसे जानलेवा बीमारी से भी बचाव करता है.
क्या कहते हैं विशेषज्ञ: विशेषज्ञों की राय में सामान्य प्रसव में 1 घंटे के भीतर एवं सिजेरियन प्रसव में 4 घन्टे के अंदर प्रसव कराने से शिशु की रोग प्रतिरोधक क्षमता का विकास होता है. शुरुवाती स्तनपान एवं 6 माह तक सिर्फ़ स्तनपान कराने से बाद में होने वाली बीमारी जैसे उच्च रक्तचाप, मधुमेह, अस्थमा एवं एलर्जी में संभावित कमी भी आती है. उन्होंने बताया कि स्तनपान कराने वाली महिलाओं में प्रसव के बाद होने वाली अत्यधिक रक्त स्त्राव में भी कमी आती है. इसके अलावा महिलाओं में अवांक्षित वसा संग्रहण को भी कम करने में स्तनपान बहुत सहायक होता है.




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