धर्म मनुष्य को जीवन जीना सिखाता है – सुमित्रा शास्त्री
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दिग्विजय सिंह बबलू की रिपोर्ट

डोरीगंज (सारण)
अनंत आंतरिक संस्थान संस्थान के संस्थापक श्री श्री 108 श्री कृष्ण गिरी नागा बाबा के सान्निध्य मे आयोजित तीन दिवसीय संगीतमय मानस प्रवचन कथा में सहार से आई मानस कोकिला सुमित्रा शास्त्री ने मनुष्य को मानव जीवन मिलने और धर्म की मेहता पर प्रकाश डालते हुए कही कि यह मानव जीवन प्रभु के विशेष दयावान होने पर ही मिलता है। हर चीज बार-बार मिल सकता है लेकिन ईश्वर द्वारा प्राप्त मानव जीवन में जरा सी चूक होने पर दुबारा नही मिल पाता है। प्रभु ने चौरासी लाख योनी का सृजन किया है जिसमें सबसे सर्वश्रेष्ठ योनी मानव योनी है। मानव का संबल होता है धर्म । जो कि मानव को जीना और जीवन को परिमार्जीत करना सिखाता है। दुनिया में धारण करने वाला सबसे योग्य धर्म है। आजकल लोग धर्म को ढकोसला व अन्य उपाधियो से उजागर करते हैं । बिना धर्म का दुनिया में कोई कार्य नहीं होता।पिता -पुत्र का धर्म, मां-बेटे का धर्म, ईश्वर का संबंध, धर्म को समझना पड़ेगा,तब जाकर संसार का व्यवहार व शिष्टाचार जीवन में आयेगा। जब यह समझ हो जायेगी
तो आपका हर कार्य राजधर्म हो जायेगा । जीवन में सम्यक ज्ञान, सम्यक दर्शन धर्म ही देता है। इस अवसर पर मुसेपुर के मुखिया मुन्ना कुमार, मौजमपुर के मुखिया धनंजय कुमार सिंह, पैक्स अध्यक्ष अनिल कुमार सिंह, अधिवक्ता ओमप्रकाश राय,धर्मनाथ सिंह, हरिमोहन सिंह, मोतीलाल राय ,समेत दर्जनो गणमान्य उपस्थित थे।





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