“गोधन बाबा चलले अहेरिया, हिड़लीच बहिना देली आशीष” गीत को गातें हुए शनिवार की सुबह महिलाएं कुटेगी ” गोधन बाबा को”

सीवान: हमारा ग्रामीण समाज पहले की अपेक्षा काफी बदल व आधुनिक हो गया है लेकिन आज भी  समाज की कुछ पुरानी परम्पराएं है जो आज तक नही बदला ,उस में एक प्रमुख परम्परा है दीपावली के दुसरे दिन गांव व शहरों में गाय के गोबर से बनाए जाने वाला गोधन बाबा और दुसरे सुबह महिलाओ के द्वारा गाए जाने वाले गीत गोधन बाबा चलले अहेरिया, हिड़लीच बहिना देली आशीष व मुसल से गोबर निर्मित गोधन बाबा की कुटाई।

गौरतलब हो कि दिपावली के ठीक अगले दिन को मनाये जाने वाला गोवर्धन पूजा  हमारे ग्रामीण संस्कृति में अपना एक अलग ही महत्व रखता हैं।इस पर्व को अन्नकूट पर्व के नाम से भी जाना जाता हैं। इसी दिन सभी औरतेँ औऱ लड़किया गाय के गोबर से गोवर्धन बना तथा फूलों से सजा कर उन्हें पूजा अर्चना की जाती हैं। समाज मे ये भी धारणा हैं कि बिना गोवर्धन की पूजा किये घर मे कोई भी मांगलिक कार्यों अर्थात शादी-ब्याह के दिन भी नहीं तय किये जाते हैं। शुक्रवार को सभी गाँवो व शहरों के विभिन्न मुहल्लों में महिलाओं के द्वारा गाय के गोबर से गोधन बाबा का निर्माण किया जा चुका है।

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शनिवार की अहले सुबह सभी महिलाये रेंगनी के कांट से पहले अपने सभी परिजनो को श्राप देगी व उसके बाद पुन: उनकी लम्बी उम्र के लिए दुवा करेगी उसके बाद मुसल से गोबर निर्मित गोधन बाबा को कुटेगी । इस मौके पर महिलाओ के द्वारा गाया जाने वाला लोकप्रिय व कर्णप्रिय गीत गोधन बाबा चलले अहेरिया, हिड़लीच बहिना देली आशीष हो । यह गीत काफी लोकप्रिय है और शनिवार की  सभी गाँवो व शहरों में यह गाया जाएगा ।