
छपरा : उत्तर बिहार के प्रसिद्ध सूर्य मन्दिर सारण के कोठिया-नरांव मे छठी पूजा में दिनोंदिन आस्था के केंद्र के रूप में प्रसिद्धि बढ़ रही हैं। यहां गडखा ,सदर व दिघवारा प्रखंडो से आस पास के एक दर्जन पंचायतो के अलावे अन्य प्रखंडो के श्रधालु भी छठ पूजा के दिन एकत्र होते है।उनकी सेवा मे सूर्य मंदिर सेवा समिति व मंदिर प्रवंधन समिति के दर्जनो सदस्य सेवा अर्पित करने के लिए मुस्तैद रहते है।इसके अलावे स्थानीय प्रशासन भी किसी तरह की चुनौतियो से निपटने के लिए सूर्य कुण्ड से लेकर घाटो पर तैनात रहते है।इस सूर्य मंदिर कि प्रसिद्धि सिर्फ़ स्थानीय श्रधालुओ व भक्तो के लिए ही नहीं है, बल्कि यह दूरदराज के पर्यटकों को भी आकर्षित कर्ता है। चैत्र व कार्तिक छठ पर्व के दिन यहा आस्था का जन शैलाब उमरता है।इस दिन यहा का रौनक सबको मन भाता है। यहा मन्दिर के चारो तरफ वृक्ष अच्छादित है जो मंदिर की खुबसूरती मे चार चान्द लगाता है।मन्दिर परिसर के बीचो बीच बना बृहद जल कुण्ड के चारो तरफ से पक्का घाट है । जहा एक साथ 500 से अधिक छठ व्रती सूर्य अर्घ अर्पित करते है।भक्तो की माने तो वे कहते है जो भी निष्ठा के साथ सूर्य मन्दिर पर छठ व्रत करता है । उसकी सभी मनोकामनाए पूर्ण होती है।ऐसा भी कहा जाता है कि जिसको चर्म रोग हो वह नियमित रूप से प्रत्येक रविवार को सूर्य कुण्ड मे स्नान कर भगवान सूर्य का पूजा करे तो राहत मिलती है। सूर्य कुण्ड के ठिक उत्तर मे बृहद धर्मशाला बना है जहा दूर दराज से आये छठ व्रति ठहरते है।सूर्य कुण्ड के चारो तरफ बृहद परिसर है जहा छठ व्रति बैठ पूजन करते है और जल कुण्ड मे अर्पित करे है।सूर्य मंदिर से सटे उत्तर मे अति प्राचीन राम जानकी मंदिर व शिवालय है।जिसकी प्राचिनता कोई नही बताता।यद्यपि सूर्य मंदिर का निर्माण बीसवी सदी के उत्रार्ध मे हुआ लेकिन सूर्य कुण्ड(पोखरा) भी प्राचीन है सूर्यमन्दिर निर्माण के समय इसका पूनर उद्धार हुआ और चारो तरफ चाहरदीवारी व पक्का घाट का निर्माण कराया गया छपरा पटना मुख्य सडक मार्ग पर अवतारनगर थाना से एक किमी पश्चिम मुसेपुर मे लाखो रूपये के लागत से भव्य सूर्य मन्दिर प्रवेश द्वार बना है।सूर्य मन्दिर के दक्षिण मे बना यज्ञ मंडप है जहा नौ कुण्ड व पाच पक्की वेदी बने है जहा हर 2-4 साल के बाद बडा यज्ञ होता है जहा देश भर के कई स्थानो से संत महात्माओ का जमावरा होता है ।इस मन्दिर का जुडाव रांची,अयोध्या,फतेहा,जलंधर आदि केन्द् से हैं । जल कुण्ड मे एस डी आर एफ की गोताखोर टीम नौका पर सवार हो घाट के चारो तरफ गस्ती करते है।रात्री मे भी स्थानीय प्रशासन दूर दराज से आये छठ व्रतियो की सुरक्षा मे तैनात रहती है।स्थानीय लोगों द्वारा बताया जाता कि सूर्य कुण्ड मे स्नान कर सूर्य मंदिर मे जो भी भक्त सच्चे मन से मन्नत रखते है उसके मनोकामना जरूर पूर्ण होते है ।मनोकामना पूर्ण होने पर उनके परिजन सूर्य मंदिर पर पूरे परिवार के सांथ आ जाते है और तीन दिनो तक सूर्य मंदिर पर ही प्रसाद बनाकर खरना करते है और अगले दिन यही पर भगवान सूर्य को अर्घ्य अर्पित करने के लिए प्रसाद बनाकर अस्तांचल सूर्य को अर्घ्य अर्पित करने के बाद भगवान सूर्य का पूजा अर्चन करते है और रात भर जगे रह भगवान भाष्कर को श्रधा सुमन अर्पित करते हुए मनोकामना पूर्ति के लिए भगवान को धन्यवाद देते है।




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