क़तर अपने इतिहास के दूसरे सबसे बड़े संकट की कगार पर, क्या फिर होगी बग़ावत?
अब्दुल मुत्तलिब रज़ा ( Edited by आज़ाद नेब )
सऊदी अरब, संयुक्त अरब इमारात, बहरैन और मिस्र के साथ क़तर का विवाद जो लगातार बढ़ रहा है वह इस बात की निशानी है कि अरब जगत भयानक तरीक़े से दो भागों में बंट गया है और यह भी ज़ाहिर हो गया है कि जो एलायंस बनाने की कोशिशें की जा रही हैं वह खोखला है।
वैसे इस विवाद से हमें आश्चर्य नहीं हुआ लेकिन विवाद की गर्मी और उसे बयान करने का अंदाज़ इस बार बिल्कुल अलग है। इसी प्रकार इस बार जो क़दम उठाए जा रहे हैं और आगे उठाए जा सकते हैं वह भी बिल्कुल अलग अंदाज़ के हैं। इस लिए कि फ़ार्स खाड़ी सहयोग परिषद के देशों के बीच अनेक विवाद रहे हैं बल्कि उनके बीच सीमावर्ती टकराव और राजनैतिक युद्ध भी रहा है विशेष रूप से क़तर और सऊदी अरब के बीच तो यह लड़ाई पुरानी है लेकिन इस समय इन देशों के बीच जो कुछ हो रहा है वह इतने गहरे घाव पैदा कर देगा कि जिसका भरना बहुत कठिन होगा।
यह विवाद उस समय फूट पड़ा जब सऊदी अरब के अलअरबिया टीवी चैनल और इमारात के अरबी स्काई न्यूज़ ने क़तर के शासक तमीम बिन हमद आले सानी के एक भाषण की आडियो क्लिप प्रसारित कर दी जो उन्होंने क़तर में कैडिट कालेज के एक समारोह में दिया। इस भाषण में शैख़ तमीम ने ईरान से विवाद बढ़ाने की नीति की कड़ी आलोचना की और कहा कि ईरान से दुशमनी का बर्ताव करना समझदारी की बात नहीं है। उन्होंने हिज़्बुल्लाह और हमास को आतंकी संगठनों की सूचि में रखे जाने की भी आलोचना की और कहा कि यह दोनों तो इस्राईल के विरुद्ध लड़ने वाले प्रतिरोधक संगठन हैं। शैख़ तमीम ने सऊदी अरब, इमारात और बहरैन पर आरोप लगाया कि वह क़तर के विरुद्ध उत्तेजना भड़का रहे हैं और क़तर पर आतंकियों के समर्थन के आरोप लगा रहे हैं। शैख़ तमीम ने सऊदी अरब का नाम लिए बिना कहा कि जो देश आतंकवाद से लड़ने के बड़े दावे कर रहे हैं वही धार्मिक कट्टरता के प्रतीक हैं और आतंकियों को सुविधाएं उपलब्ध करा रहे हैं। उन्होंने यहां तक कह दिया कि सऊदी अरब सैकड़ों अरब डालर की रक़म विकास योजनाओं पर ख़र्च करने के बजाए हथियार ख़रीदने पर ख़र्च कर रहा है। शैख़ तमीम ने यह भी कहा कि ट्रम्प के दिन अब गिने चुने ही रह गए हैं।
अलअरबिया और स्काई न्यूज़ ने इस बयान को प्रसारित किया और इस पर सऊदी अरब और मिस्र के कई टीकाकारों के पैनल क माध्यम से बहस करवाई और क़तर की सरकार पर जमकर हमला होला। क़तर पर आरोप लगाया कि वह आतंकवादी गतिविधियों में लिप्त है और आतंकी संगठनों विशेष रूप से इख़वानुल मुसलेमीन को शरण देता है।
अलअरबिया टीवी चैनल ने एक पुरानी आडियो क्लिप भी प्रसारित की जो क़तर के पूर्व शासक शैख़ हमद बिन ख़लीफ़ा और लीबिया के पूर्व शासक मुअम्मर क़ज़्ज़ाफ़ी की बातचीत पर आधारित थी। इसमें शैख़ हमद ने सऊदी अरब की कड़ी निंदा की थी और आले सऊद शासन के पतन की आशा जताई थी। अलअरबिया ने यमन के पूर्व राष्ट्रपति अली अब्दुल्लाह सालेह का एक बयान भी प्रसारित किया जिसमें वह बता रहे हैं कि क़तर के पूर्व शासके ने उनसे सऊदी अरब के भीतर विध्वंसकारी हमले करवाने के लिए सहयोग मांगा था।
क़तर के मीडिय नेटवार्क ने जिसमें सबसे प्रमुख अलजज़ीरा टीवी चैनल है इस मुद्दे पर शुरू में कोई ध्यान नहीं दिया और रूटीन के कार्यक्रम प्रसारित करते रहे जिससे काफ़ी देर तक क़तर पर की जाने वाली टिप्पणियां सही प्रतीत हो रही थीं। इस संदर्भ में पहला बयान कई घंटों के बाद क़तर के एक अधिकारी की ओर से यह आया कि क़तर की न्यूज़ एजेंसी को अज्ञात लोगों ने हैक कर लिया है और शैख़ तमीम के बयान से संबंधित आडियो टेप जाली है।
इसी बीच अलअरअबिया टीवी चैनल पर एक ब्रेकिंग न्यूज़ चलाई गई जिसके अनुसार क़तर के विदेश मंत्री शैख़ मुहम्मद बिन अब्दुर्रहमान ने मिस्र, बहरैन, इमारात और सऊदी अरब के राजदूतों से कहा है कि वह 24 घंटे के भीतर क़तर से बाहर निकल जाएं।




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