शिक्षकों की सतर्कता से बाल-बाल बचे छात्र-छात्राएं, ग्रामीणों ने नए भवन निर्माण व तत्काल कार्रवाई की उठाई मांग

दैनिक खोज खबर/सोनपुर। सोनपुर प्रखंड के सबलपुर स्थित प्राथमिक विद्यालय, बतरौली-2 (यू-डाइस कोड: 10171905201) में मंगलवार दोपहर एक बड़ा हादसा टल गया। विद्यालय भवन का जर्जर हिस्सा अचानक भरभराकर गिर गया। उस समय विद्यालय में त्रैमासिक परीक्षा चल रही थी और सभी छात्र-छात्राएं परीक्षा दे रहे थे। शिक्षकों की तत्परता से बच्चों को तत्काल सुरक्षित स्थान पर पहुंचा दिया गया, जिससे कोई जनहानि नहीं हुई।
विद्यालय के प्रधानाध्यापक अमित कुमार एवं अन्य शिक्षकों ने बताया कि भवन की जर्जर स्थिति को लेकर शिक्षा विभाग और स्थानीय प्रशासन को कई बार लिखित एवं मौखिक रूप से अवगत कराया जा चुका है।2022 से लगातार इस गंभीर समस्याओं के निदान की गुहार लगा चुके है इसके बावजूद अब तक न तो भवन की मरम्मत कराई गई और न ही कोई वैकल्पिक व्यवस्था की गई।
ग्रामीणों और अभिभावकों का आरोप है कि शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने के सरकारी दावों के बावजूद जमीनी स्तर पर स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। उनका कहना है कि वर्षों से जर्जर भवन की मरम्मत नहीं होने से बच्चों की जान जोखिम में डालकर पढ़ाई कराई जा रही है। उनका आरोप है कि विभाग की उदासीनता के कारण कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है।
बताया जाता है कि यह पहली घटना नहीं है। इससे पहले भी विद्यालय की छत और भवन के अन्य जर्जर हिस्से कई बार गिर चुके हैं, जिनमें शिक्षिकाएं और छात्र घायल भी हुए हैं। इसके बावजूद भवन को सुरक्षित घोषित करने, मरम्मत कराने अथवा नए भवन के निर्माण की दिशा में कोई प्रभावी पहल नहीं की गई।
घटना स्थल पर पहुँच कर अभिभावकों का कहना है कि गरीब परिवारों के बच्चों की सुरक्षा के साथ लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जा सकती। क्या शिक्षा विभाग के अधिकारी से लेकर उनके कर्मी जर्जर विद्यालय या सरकारी स्कूल में पढ़ना चाहेंगे. सरकार के सारे विकास खोखला साबित हो रहा है. कहानी शिक्षक है तो विद्यार्थी नहीं कहीं विद्यार्थी है तो शिक्षक नहीं.सरकार की करोड़ रूपया का फंड शिक्षा विभाग का कहां गमन हो रहा है इसकी जानकारी भगवान क़ो भी नहीं होगा . यह सरकार काम कम ढिढोरा ज़्यदा पिटती है। अभिभावकों और जनप्रतिनिधियों अशोक राय,राजू कुमार,मनोज कुमार,अविनाश शर्मा सहित अन्य ग्रामीणों ने जिला प्रशासन एवं शिक्षा विभाग से विद्यालय भवन का तत्काल तकनीकी निरीक्षण कराने, जर्जर हिस्से को ध्वस्त करने तथा नए भवन के निर्माण या वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की है।
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते आवश्यक कदम नहीं उठाए गए तो भविष्य में किसी बड़ी दुर्घटना की पूरी जिम्मेदारी संबंधित विभाग और प्रशासन की होगी।