सीवान : राजेन्द्र जयंती के अवसर पर आयोजित हुआ कवि सम्मेलन व मुशायरा
#बरुणेश आनन्द बरुण की रिपोर्ट 

मैरवा ( सिवान ) :
देश के प्रथम राष्ट्रपति डाॅ राजेन्द्र प्रसाद की जयन्ती के अवसर पर “अमृत” साहित्य कला एवं संस्कृति केन्द्र के तत्वाधान में अखिल भारतीय कवि सम्मेलन एवं मुशायरा का आयोजन रविवार रात्रि को हुआ । नगर स्थित ब्लाक परिसर में आयोजित होने वाले इस कार्यक्रम का अनौपचारिक  शुभारम्भ संस्कृति इंटरनेशनल स्कूल के छात्र – छात्राओ के भाव नृत्य गणेश वंदन से हुआ वही कार्यक्रम की औपचारिक शुरुआत श्याम साई इंस्टीटयूट  ( बी एड कॉलेज ) के निर्देशक डाॅ  रवि शंकर मिश्र, एमएलसी  वीरेन्द्र नारायण यादव , चिकित्सापदाधिकारी डाॅ आर एन ओझा, अंचलाधिकारी पंकज कुमार, विधायक रमेश सिंह कुशवाहा, मुनीन्द्र पाण्डेय, उमेश पाण्डेय, भारत भूषण यति आदि ने दीप प्रज्वलित व देशरत्न की प्रतिमा पर माल्यार्पण  कर किया  ।डाॅ मिश्र की अध्यक्षता में राजेंद्र बाबू के व्यक्तित्व पर उक्त सभी ने प्रकाश डालते हुए उनके कदम चिन्हो पर चलने की जरुरत बतलाई , अपने स्वागत भाषण के क्रम में डाॅ यादव ने चम्पारण महोत्सव के बारे में बतलाते हुए प्रत्येक व्यक्ति से जीवन में एक बार  राजेन्द्र बाबू की पुस्तक ” आत्म कथा ” पढने का अनुरोध किया ।

अन्ततः अध्यक्षीय उद्बोधन के साथ ही उस समय तक उपस्थित देश के कोने-कोने से आए  कवियो व शायरो को मंच सुपुर्द कर दिया गया  जैसे -जैसे रात्रि बीतती गयी कवि सहित श्रोताओ का करवा बढता ही गया हजारो  की संख्या में श्रोता उपस्थित हो विविध रसो के कवियो से  रसानन्द सहित समसामयीक जानकारिया प्राप्त करते रहे । कविता  पाठ कार्यक्रम के प्रारंभ में ही देश की जानी मानी कवित्री लखनऊ की  कविता तिवारी ने सरस्वती वंदना- “सारी धरा तुम्हारे ही गीत गा रही है ऐसा लगा तू मधुरिमा वीणा बजा रही है, आ जाओ मंच पर भी आसन यहीं लगा लो, देवी सरस्वती माँ बेटी बुला रही है”  ने मानो माॅ  शारदे को वीणा के तार झंकृत करने को विवश कर दिया वही चम्पारण की धरती से आए  शायर तनवीर आलम के शब्द  “हवा के साथ चलना सीख, मानिंद दरिया तू भी अपना रूख बदलना सीख, बुग्जो अदावत और कइरत दिल के आप आए नहीँ, बागों में खिलते फूल से तू मुस्कुराना सीख ” ने श्रोताओं को बांधे रखा।हाथरस के  हास्य कवि पद्म अलबेला की उम्र के लिहाजा  बुढापे पर कविता तथा 
“खुला दरवाजा  चाहे जब आ जा  आजा ” ने खूब बहा बही लूटी दर्शक दिर्घा हॅसते हसते लोट पोट होते रहे  कविता की  आखिरी पंक्तियों-  “इन क्वांरे मतवारी का तो औसत और बढ़ेगा, फ्यूचर में कन्याओं का घोर अकाल पडेगा, इस लिए जन्म से पहले तूम बेटी को मत मारो, देवदास तो होंगें पर नहीं मिलेंगी पारो ”
ने तीखा ब्यंग प्रहार कर  सोचने पर मजबूर कर दिया।अलिगढ से पहुचे  ओज के  कवि नीरज तीवारी की क़ौमी एकता पर कविता
” निकलेंगे नहीं हर घर से अफजल यहां तो हमीद और कलाम  पैदा होते हैं”
 ने सबको तालियां बजाने पर मजबूर कर दिया। जफर की शायरी 
“बिछड़ के उनसे नगमा ए इश्क बो लेते हैं उनकी याद आती है तो रो लेते हैं” ने सबको चौंका दिया 
श्रृंगार की कवयित्री   शिवा त्रिपाठी के 
“प्यार की रस्म दिल से निभाते चलो” ने भी खूब तालियां बटोरीं।एटा के शायर अज्म शाकरी के “धूप ज्यादा साए कम, अब ज़ख्मो में ताब नहीं अब क्यों लाए हो मरहम” ने लोगों को भावविह्वल कर दिया। हास्य कवि राधेश्याम भारती की कविता ” कोई क्रिकेट का खेल बेच रहा है तो कोई जेल और रेल बेच रहा है पैसे का खेल देखो सदी का महानायक नवरत्न तेल बेच रहा है” ने खूब हंसाया। श्रोताओं द्वारा  कविता तिवारी की कविता “शहीदों की बदौलत मेरा हिन्दुस्तान जिंदा है” ने ठंड से  सुसुप्त पङे लोगो को जागृत कर दिया।इसके अतिरिक्त कानपुर के गीतकार प्रमोद तिवारी , बलरामपुर के मनमोहन मिश्र सहित अन्यो ने कवि पाठ कर श्रोताओ को साहित्यिक  मोहपास में बाॅधे रखा ।कवियो के तरफ से मंच संचालन हिन्दुस्तान के जाने माने हास्य व्यंग्य के कलाकार सतना के अशोक सिंगरानी ने किया जिनकी अकेली उपस्थिति ही दर्शको की नजर में  कई हास्य व्यंग्य के कवियो के बराबर होती है कार्यक्रम का समापन  अभ्यागत अतिथियो के स्वागत के साथ ही कार्यक्रम संयोजक उमेश पाण्डेय ने किया ।