
संवेदनशील जगहों तक टीका पहुंचाने चलता रहा जीतेन्द्र का जुगाड़ु नाव
- विश्वरंजन और संतोष भी करते रहे सहयोग
- मोटरसाइकिल से फैलायी जा रही जागरूकता
वैशाली। 25 नवंबर
कहते हैं जहां चाह होती है वहां राह होती है। देसरी के आजमपुर और खरगपुर जैसे ईलाकों में जब बाढ़ चली गयी तो वहां छोटे झील का निर्माण करती गयी। जिनमें बड़ी ही मुश्किल से लोग आते और जाते हैं। ऐसी जगहों पर केयर के बीएम जीतेन्द्र ने जुगाड़ु नाव पर अपने साथियों के साथ टीके का बॉक्स रखा और उन घरों में भी दस्तक दी जहां उनके ही बाहरी परिवार अभी आने से कतराते हैं। दरअसल जीतेन्द्र घर-घर दस्तक कार्यक्रम के तहत प्रत्येक घरों तक टीकाकरण को सुनिश्चत कर रहे थे। जिसमें उनके साथ डब्ल्यूएचओ के विश्वरंजन और डेटा ऑपरेटर संतोष ने भी अदम्य साहस का परिचय दिया। वहीं अब भी वह टीकाकरण को सफल बनाने में जुटे हैं। वहीं जितेंद्र ने कहा कि हमलोगों को प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ प्रदीप कुमार का मार्गदर्शन हमेशा मिलता रहा।
हर मुश्किल को जीतेन्द्र ने बनाया आसान
जीतेन्द्र कहते हैं कि पोलियो की तर्ज पर चल रहे घर -घर अभियान में खास कर सूदूर खेतों में बसे एक -एक घर तथा गंगा किनारे भी बने गांवों में पहुंचना थोड़ा मुश्किल था। भौगोलिक कारण के साथ शिक्षा का आभाव भी टीकाकरण के राह में रोड़ा था, पर यह टीकाकरण का ही प्रभाव था कि लोगों को ज्यादा समझाने की जरूरत नहीं पड़ी। जीतेन्द्र कहते हैं कि इस अभियान में अभी तक हमलोग 8135 घरों तक पहुंच पाए हैं। जिसमें से 626 प्रथम डोज तथा 2671 सेकेंड डोज के साथ कुल 3297 लोगों ने टीकाकरण कराया है। वहीं देसरी प्रखंड में कुल प्रथम डोज के 53604 तथा 24282 लोगों ने सेकेंड डोज लिया है।
भ्रांतियों के लिए फैलायी जनजागरूकता
जीतेन्द्र कहते हैं कि समाज के कुछ लोगों में यह भ्रम था कि बीपी तथा गंभीर रोगों के लोगों को यह टीका नहीं लेना चाहिए। इस भ्रम को जनप्रतिनिधि, आशा तथा सेविकाओं की मदद से मिटाया गया। जहां से भी भ्रम की बात आती, वहां उनके घर जाकर मैं और स्वास्थ्यकर्मी टीकाकरण करवाते थे। वहीं लोगों में टीकाकरण के लिए प्रेरिणा आए इसके लिए केयर की तरफ से मोटरसाइकिल पर एक व्यक्ति माइकिंग भी करता चलता है। ताकि लोगों को जानकारी मिल सके।




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