पश्चिम चम्पारण ब्यूरो प्रमुख दुर्गा दत्त पाठक की रिपोर्ट :-
बेतिया। प0 चंपारण जिला में चंपारण सत्याग्रह शताब्दी वर्ष 2017-18 के अवसर नगर के टाउन हॉल में गांधी पेनोरमा फ़िल्म फेस्टिवल का आयोजन किया जा रहा है। इस  दौरान बेतिया के नगर भवन (टाउन हाल) में आज दूसरे दिन दो सत्रों में पांच फिल्में दिखाई गयीं। पहले सत्र में सेवाग्राम,हम अपनी गंदगी साफ़ नहीं करेंगे तो कौन करेगा( लघु फ़िल्म), “मैंने गांधी को नहीं मारा”, “गांधी माई फादर” ( फीचर फ़िल्म) का प्रदर्शन किया गया वहीँ दूसरे सत्र में “रोड टू संगम” का प्रदर्शन किया गया। इस अवसर पर भाड़ी मात्रा में दर्शक उपस्थित थें। कला, संस्‍कृति एवं युवा विभाग के अतंर्गत बिहार राज्‍य फिल्‍म विकास एवं वित्त निगम लिमिटेड द्वारा आयोजित गांधी पैनोरमा फिल्‍म महोत्‍सव का आयोजन बेतिया के टाउन हॉल में 7 मई से 09 मई तक किया जा रहा है। इस अवसर पर मौजूद फ़िल्म फेस्टिवल के एडमिन पियूष मधुकर ने कहा कि गांधी जी आज भी हमारे बीच प्रासंगिक है। आज जरूरत है गांधी जी के विचारों को नए पीढ़ी के बीच पहुंचाने का। इसी क्रम में चंपारण सत्‍याग्रह शताब्‍दी वर्ष 2017-18 पर कला, संस्‍कृति एवं युवा विभाग की ओर से गांधी पैनोरमा फिल्‍म महोत्‍सव का आयोजन किया गया है। साथ ही इस दौरान गांधी पेनोरमा फ़िल्म महोत्सव के चैयरमेन देवेन्द्र खंडेलवाल, कला संस्कृति एवम् युवा विभाग के सहायक निदेशक आनन्दी कुमार, संग्रहालय अध्यक्ष विमल तिवारी और पीआरओ सर्वेश कश्यप आदि लोग उपस्थित थे। इस मौके पर भाड़ी मात्रा में स्कूली छात्र मौजूद थें। आज दो लघु फिल्म “सेवाश्रम” “मैं अपनी गंदगी साफ़ नहीं करेंगे तो कौन करेगा” का प्रदर्शन किया गया। फिल्मो के शीर्षक के अनुसार ही इसकी कथावस्तु भी थी। इसके साथ तीन फीचर फिल्मो का प्रदर्शन भी किया गया। प्रदर्शित पहली फीचर फ़िल्म “मैंने गांधी को नहीं मारा” में एक ऐसे इंसान की मनोस्थिति को दिखाने की कोशिश की गई, जहां एक व्‍यक्ति को यह वहम हो जाता है कि उसने ही गांधी जी को मारा। साल 2005 में अनुपम खेर निर्मित व अभिनीत इस फिल्‍म को राष्‍ट्रीय और अंतर्राष्‍ट्रीय स्‍तर पर पुरस्‍कृत निर्देशक जहानु बरूआ ने बनाया था। फिल्‍म में पिता की बीमारी और बेटी के प्‍यार, समझदारी और पिता के इलाज को लेकर बेटी की प्रतिबद्धता की कहानी दिखाई गई है, जो अनेकों समस्‍याओं से जूझती है। दूसरी फीचर फ़िल्म “गांधी माई फादर”, “महात्मा गांधी और उनके सबसे बड़े पुत्र हरिलाल गांधी का एक अजीब रिश्ता है। अपने पिता के मानकों पर खरा उतरने में असमर्थ हरिलाल व्याकुल और जीवन में बिखर जाता है। 2007 में बनी और राष्ट्रिय पुरस्कार प्राप्त इस फ़िल्म का निर्माण अनिल कपूर ने किया और निर्देशक है। फिरोज अब्बास खान ।दूसरे सत्र में प्रदर्शित तीसरी फीचर फ़िल्म ‘रोड टू संगम’ थी। इस फिल्‍म में एक मुस्लिम मिस्‍त्री को उस कार की मरम्‍मत करनी है, जिसमें कभी महात्‍मा गांधी की अस्थियां रखी थी। अमित राय के निर्देशन में साल 2010 में बनी यह फिल्‍म एक मुस्लिम मैकेनिक की जिंदगी पर बनी है, जिसे फोर्ड कंपनी की इंजन कार को मरम्‍मत करने की जिम्‍मेदारी दी गई। मगर उसे नहीं पता था कि इसी गाड़ी में महात्‍मा गांधी की अस्थियां त्रिवेणी संगम में ले जाकर प्रवाह किया गया था। इसी समय हड़ताल होता है और वह असमंजस में पर जाता है। इस दौरान के दौर में मायनों को भी दिखाया गया। इस फिल्‍म में मशहूर अभिनेता परेश रावल और ओमपुरी का बेजोड़ अभिनय देखने को मिलता है।