मतिभ्रम के शिकार हैं शिक्षा मंत्री :-बि•रा•प्रा•शि• संघ

—————————————–जाके मति भ्रम भयऊ खगेशा ताके पच्छिम उगेऊ दिनेशा
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दैनिक खोज-खबर के लिए,राकेश सिंह लववंशी, सिवान
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सिवान :- बिहार राज्य प्राथमिक शिक्षक संघ पचरुखी के अंचल सचिव ने शिक्षा मंत्री के वक्तव्य पर मीडिया के माध्यम से सवाल पूछते हुए उन्हें मति भ्रम का शिकार बताया तथा बिहार की शिक्षा व्यवस्था को रसातल में ले जाने का आरोप लगाया।श्री सिंह ने तुलसीदासजी की पंक्ति की चर्चा करते हुए पूछा कि अगर नियोजित शिक्षक बिहार के बोझ हैं । यह बताने वाले माननीय शिक्षा मंत्रीजी की समझ पर हमें तरस आता है । तुलसीदासजी ने ऐसे ही लोगों के लिए कहा है कि जिसे मतिभ्रम हो जाता है उसको पश्चिम दिशा मे सूर्योदय दिखाई पड़ने लगता है । लगातार डेढ़ साल से हर पंद्रह दिन पर पंद्रह दिन में नियोजित शिक्षकों की सेवा शर्त जारी करने की घोषणा करने वाले माननीय मंत्रीजी को बताना चाहिए कि जो सेवा शर्त तीन माह मे बननी थी वह दो साल मे नही बन सकी तो क्या हम जान सकते हैं कि शिक्षा विभाग के मंत्री बोझ हैं या शिक्षक? मंत्रीजी को शायद मतिभ्रम हो गया है । यदि ऐसा है तो ऐसा हीं मतिभ्रम तत्कालीन मंत्री पी के शाहीजी को भी हो गया था । अनुरोध है कि जरा उनकी स्थिति भी याद कीजिए । नियोजित शिक्षक बड़े से बड़े मतिभ्रम को बेहतरीन इलाज करते हैं । कहीं ऐसा न हो कि मतिभ्रम के साथ – साथ कुछ अन्य बीमारियों का इलाज हो जाए ।
हमें तो ऐसे लोगों पर तरस आता है जिन्हें हर विफलता के लिए शिक्षक हीं जिम्मेवार नजर आता है । मैं सरकार, प्रशासन, प्रेस और न्यायपालिका सभी से पूछना चाहता हूँ कि यदि सचमुच में शिक्षा के हितैषी हैं।तो हमारे इन सवालों का जवाब दे । बोझ कौन है यह साबित न कर दिया तो अपना हक माँगना छोड़ देंगे । सच्चाई स्वीकार करने की हिम्मत है तो बताईये:-
1. क्या पूरे राज्य भर के किसी भी विद्यालय में कक्षा 6-8 के बच्चों के लिए विषयवार शिक्षक हैं? यदि शिक्षक की व्यवस्था नही है तो नियोजित शिक्षक बोझ कैसे?
2. राज्य का कोई हाई स्कूल बता दीजिए जिसमे समुचित प्रयोगशाला हो । सरकार प्रयोगशाला की व्यवस्था नही की तो नियोजित शिक्षक बोझ कैसे ?
3. राज्य के किस स्कूल मे संस्कृत के शिक्षक हैं ? किन्हीं को मालूम हो तो बताईये। संस्कृत विषय का भी शिक्षक होता है यह बात सरकार भूल गई तो नियोजित शिक्षक बोझ कैसे?
4. राज्य के किसी भी विद्यालय में संगीत की शिक्षा हेतु वाद्य यंत्र और संगीत शिक्षक हो तो बताइए । संगीत के बिना उपकरण पढ़ाई और परीक्षा होगी तो गणेश जैसे टॉपर नही तो तानसेन टॉपर होंगे? फिर नियोजित शिक्षक बोझ कैसे?
5. विगत दो वर्षों से प्राईमरी स्कूल के अधिकांश कक्षाओं के बच्चों को निःशुल्क किताब नही दी गई । खुले मार्केट में इन किताबों का क्रय – विक्रय अपराध घोषित है । चालू सत्र मे भी बिना किताब गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की नौटंकी जारी है । फिर नियोजित शिक्षक बोझ कैसे?
6. जिस राज्य मे शिक्षक अपने वेतन के लिए आठ माह से टकटकी लगाये बैठा हो । जहां के शिक्षक होली , दिवाली और ईद जैसे पर्व में अपने बाल बच्चों से मुंह चुराता फिरता हो । शादी विवाह मे न्यौता – चुमावन नही कर पाता हो । जो सगे संबंधियों से नजर मिलाने के काबिल नही रह सके उनके पढाये बच्चों का यदि 35 % रिजल्ट आ रहा हो तो सरकार को खुशी से नाचना चाहिए ।
जिस राज्य का शिक्षा मंत्री यदि अपने शिक्षकों को आठ – आठ माह तक वेतन नही दिला सके , बच्चों को किताब उपलब्ध न करा सके , सभी स्कूलों में हर विषय का पर्याप्त शिक्षक न बहाल कर सके , स्कूलों में प्रयोगशाला, पुस्तकालय व अन्य उपकरण न उपलब्ध करा सके , तीन माह मे बनने वाली सेवा शर्त दो साल मे भी न बनवा सके और वही अपने ही शिक्षकों को राज्य पर बोझ बताने लगे तो उन्हें निश्चित ही मतिभ्रम की बीमारी है । जिसका इलाज करना जरूरी है।




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