संवेदनहीन सरकार बेअसर गुहारमांझी।सारण। सम्पूर्ण क्रांति के महानायक लोकनायक जेपी के सपनों का डोर तथा यूपी बिहार के लोगों के बीच दिलों का रिश्ता जोड़ने वाला जर्जर जयप्रभा सेतु सरकारों की संवेदन हीनता व विभागीय नाकामी का पर्याय बनकर रह गया है। आजाद भारत को आपातकाल से उबारने वाले जेपी की पत्नी जयप्रभा के नाम पर बने इस सेतु का जर्रा जर्रा कराह रहा है। सड़क उखड़ कर चीरहरण का नमूना पेश कर रहा है। तथा सेतु के टूटे पड़े विम्ब जेपी के सपनो को पंगु बना रखा है। भारी वाहनों के परिचालन के दौरान यह सेतु उसी तरह डोलता है जैसे टूटी टांग। सेतु के दोनों तरफ की दुरूह सड़क राजनीतिज्ञों की बेचारगी उजागर कर रही है। मांझी।बिहार।में संचालित ।अनुभव जिंदगी का। सोशल मीडिया समूह के जबरदस्त आग्रह से प्रभावित होकर पिछले दिनों महाराजगंज।बिहार। के सांसद जनार्दन सिंह सिग्रीवाल ने इस ज्वलंत समस्या को लोकसभा में भी उठाया था। बावजूद इसके अबतक इस सेतु की मरम्मति की दिशा में कोई ठोस पहल नही की जा सकी है। इस बीच बलिया।यूपी। के सांसद बीरेन्द्र सिंह मस्त ने सेतु का स्वयं निरीक्षण किया। ततपश्चात यूपी के सीएम आदित्यनाथ योगी तथा बलिया के डीएम को पत्र लिखकर जय प्रभा सेतु होकर चलने वाले भारी वाहनों के परिचालन पर तत्काल रोक लगाने की मांग की। इससे पहले छपरा के सांसद राजीव प्रताप सिंह रुडी ने भी गाजीपुर से हाजीपुर राष्ट्रीय राजमार्ग के हालात को केन्द्र सरकार के लिए बदनुमा दाग बताया था। इस बीच कल रविवार को द्वाबा।बलिया। के भाजपा विधायक सुरेंद्र सिंह ने सेतु के जीर्णोद्धार के मामले में केंद्र और राज्य सरकार को आड़े हाथों लेते हुए विरोध स्वरूप इस वर्ष होली नही मनाने की घोषणा की। उन्होंने आशंका जताई कि सेतु पर कभी भी भीषण दुर्घटना हो सकती हैं। उन्होंने क्षोभ प्रकट करते हुए कहा कि अपनी ही सरकार में उनकी गुहार नही सुनी जा रही है।
आस पास के लोगों का कहना है कि महीनों से टूटे पड़े सेतु के विम्ब के ऊपर से पांच सौ से अधिक ओवरलोडेड ट्रक 50 से 90 टन बालू लाद कर आ जा रहे हैं। बुरी तरह से क्षतिग्रस्त सड़क व टूटी पड़ी रेलिंग विभागीय लापरवाही का नमूना प्रस्तुत कर रहा है। फुटपाथ होकर गुजरने वाले राहगीरों के 50 फुट नीचे गिरने का खतरा बना हुआ है।उधर छपरा शहर में दिन में लगने वाली नो इंट्री की वजह से लोड भारी वाहन पूरे दिन मांझी घाट अथवा सेतु पर खड़े रहते हैं। सोशल मीडिया के माध्यम से आंदोलन हंगामा के बावजूद विभाग उक्त समस्या के प्रति उदासीन बना हुआ है। लोगों का कहना है कि रुक रुक कर चलाया जा रहा आंदोलन कभी भी आक्रामक रुख अख्तियार कर सकता है।