*जो मनन करता है वही मनुष्य है:धनंजयानंद*
👉पाँच दिवसीय रामचरितमानस सह गीता ज्ञान यज्ञ नारायणपुर में आयोजित
कुमार गौरव”दैनिक खोज खबर”नारायणपुर,भागलपुर👉आज मानव कोलाहल पूर्ण अवस्था में काफ़ी विचलित और दुखी है।इसका मुख्य कारण यह है कि वह ईस्वर से दूर होता जा रहा है।जिस प्रकार कोई पौधा तभी तक जीवित रह पाता है जबतक वह नमी युक्त जमीं के संपर्क में रहता है जैसे हीं वह अपने जमीन से थोड़ा भी दूर होता है उसका अस्तित्व समाप्त हो जाता है ।ठीक उसी प्रकार मनुष्य जब तक प्रभु का समरण करता है सुखी संपन्न रहता है जैसे ही ईश्वर से विमुख होता है या होने का प्रयास करता है वह दुःखों को प्राप्त करता है।इसलिए मानव को अपने मूल आधार ईश्वर को कभी नही भूलना चाहिए।
मानव जबतक उस परम सत्य को जानकर उस पथ पर ठीक ढंग से चलता है तबतक उसे कस्टों का सामना नहीं करना परता है। मानव आज सांसारिक चकाचौंध को ही सबकुछ और सुख समझ बैठा है जबकि इसका अंतिम लक्ष्य ईश्वर प्राप्ति है।
उक्त बातें दिव्य ज्योति जागृति संस्थान के तत्वाधान में आयोजित पाँच दिवसीय रामचरितमानस सह गीता ज्ञान यज्ञ के प्रथम दिवस में जयप्रकाश महाविद्यालय नारायणपुर में स्वामी धनंजयानंद ने कही।
वहीं संस्थान से आई साध्वी अमृता भारती ने कहा कि आज इन्सान बौद्धिक उन्नति द्वारा मंगल तक पहुँच चूका है लेकिन वास्तविक जीवन में मंगल नही अमंगल है । इसका कारन भजन नही करना है।मनुष्य को परिभासित करते हुए उन्होंने कहा कि *मननात इति मनुष्यः* अर्थात जो मनन करता है वही मनुष्य है।जिस प्रकार एक नदी तभी तक भटकती है जबतक सागर में नही मिल जाती ठीक उसी प्रकार आत्मा के दुख का कारन परमात्मा से विछोह है ।संत महापुरुष केवल बातें नहीं करते वे आत्मशक्ति को परम शक्ति से मिलाना ।
अतः मानव को दिव्य गुरु के शरणागत होकर सच्चा ज्ञान लेकर भक्ति करनी चाहिए।हारमोनियम पर संगीतज्ञ साध्वी सरिता भारती साध्वी शोभा भारती तबले पर रमेश जी तथा रमेश जी ने भजन के माध्यम से श्रोताओं को खूब झुमाया।





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