संजय पांडे/छपरा। जयप्रकाश विश्वविद्यालय (छपरा) के जयप्रकाश अध्ययन केंद्र के तत्वावधान में लोकनायक जयप्रकाश नारायण की 124वीं जयंती पर एक विशेष व्याख्यान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. परमेंद्र कुमार बाजपेयी द्वारा लोकनायक की प्रतिमा और तैलचित्र पर माल्यार्पण कर किया गया।

मुख्य वक्ता पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो. विभु कुमार ने कहा कि जयप्रकाश नारायण स्वतंत्र भारत में आध्यात्मिक और नैतिक क्रांति के प्रणेता थे। उन्होंने सत्ता-केंद्रित राजनीति से अलग हटकर समाज कल्याण, नैतिकता और लोकनीति को प्राथमिकता दी। प्रो. गजेंद्र कुमार ने जयप्रकाश जी के स्वतंत्रता संबंधी विचारों को रेखांकित करते हुए कहा कि किसी भी प्रकार की गुलामी को स्वीकार न करना ही वास्तविक आजादी है।

अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रो. परमेंद्र कुमार बाजपेयी ने कहा कि जयप्रकाश नारायण राजनीतिज्ञ नहीं, बल्कि राजनीति को दिशा देने वाले दार्शनिक थे। वे राजनीति की जगह ‘लोकनीति’, ग्राम स्वराज और विकेंद्रीकरण के समर्थक थे ताकि लोकतंत्र जमीनी स्तर पर मजबूत हो सके।

कार्यक्रम का विषय-प्रवर्तन डॉ. रितेश्वर नाथ तिवारी ने किया, संचालन NSS समन्वयक प्रो. हरिश्चंद्र ने किया और धन्यवाद ज्ञापन डॉ. अभय कुमार सिंह ने प्रस्तुत किया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के अनेक शिक्षक, शोधार्थी एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे।