अनादि आदि शक्ति पूंजी हैं,क्रींकुंड पीठाधीश्वर
🤺स्वयंसिद्ध अघोराचार्य बाबा सिद्धार्थ गौतम राम के प्रकाट्य दिवस १मई पर विशेष
🇦🇱परमार
 अखिलेश राणा🇦🇱
🔯हे सिद्धेश्वर!महाकपालेश्वर!
राघव माधव से परमेश्वर।
हे बोधिसत्व कैवल्य स्वयंभू
सिद्धार्थ गौतम से सर्वेश्वर।
हे अग्नि रुद्र हे परम शुद्ध,
करुणा निधि से महाबुद्ध।
हे परमधाम अविराम राम,
“परमार”करें प्रभु पाहिमाम।
🕉सदाशिव की क्रीड़ा स्थली काशी में अविनाशी आशुतोष के शीर्ष से नि:सृत सदानीरा की अजस्त्र-सहस्त्र स्रोतस्विनी शिव विभूति भक्ति ज्ञान वैराग्य की त्रिधारा रूप में प्रवाहित होती रही है। ‘वहिष्कार नहीं परिष्कार , विनाश नहीं निर्माण जैसी विधि की विभिषिका से विश्व को अक्षुण्ण रखने के लिए आदि शिव काम पंचम मुख अवधूत सिद्धेश्वर स्थल क्रीं कुंड से कालाधिपति स्रष्टा के ‘रेख पर मेख’मारते हुए काल के कुअंक को सुंदर सुअंक निर्माण करते आए हैं।  २०वीं शताब्दी के महान संत औघड़ेश्वर महाप्रभु बाबा भगवान राम ने केदारखंड स्थित शिवाला क्रींकुंड  अघोराचार्य बाबा कीनाराम स्थली में विचरण कर रही औघड़ेश्वरों की आत्माओं का साक्षात्कार किया बहरहाल,नियंता के पूर्ण संहार के विरुद्ध क्रीं कुंड पीठाधीश्वर बाबा राजेश्वर राम ने धर्म संघर्ष की और युग पुरुष औघड़ेश्वर महाप्रभु बाबा भगवान राम ने समझौता पर आपत्ति सहित नवीन संघर्ष का सूत्रपात की।
२९नवंबर१९९२को अपने​ नूतन स्वरूप बाबा सिद्धार्थ गौतम राम को ‘सर्वेश्वरी समूह देवाथानं’का अध्यक्षीय दायित्व सौंपकर कपालखप्पड़ में प्रवेश कर गए। मूर्तरूप में क्रीं कुंड पीठाधीश्वर बाबा सिद्धार्थ गौतम राम सर्वेश्वरी समूह वयस्क बाबा कीनाराम अघोर शोध संस्थान के संयुक्त अध्यक्ष की भूमिका में महाप्रभु के शिवात्मक कार्यक्रमों को गति देने रहें हैं।
सिद्धेश्वर सिद्धार्थ गौतम राम का अवतरण-शंकर के संहार के विरुद्ध शंकर बुढऊ बाबा दत्तात्रेय​ स्वरूप राजेश्वर राम २०वर्ष तक उत्तराधिकारी की प्रतीक्षा करते रहे, नश्वर शरीर त्याग की जिद १९५८से करते रहे। बहरहाल;बुढऊ बाबा के शिष्य औघड़ेश्वर महाप्रभु बाबा भगवान राम ने १मई १९६९को छ:माह के शिशु को अपने शक्ति समुच्चय रूप में प्रकट किया। औघड़ सिद्धार्थ गौतम राम संज्ञा देकर लौकिक संस्कार संपन्न कराने के बाद गुरु श्री के निर्वाण पर्व १०फरवरी१९७८को  गुरु पीठ अपने नूतन स्वरूप को सौंप कर सिद्धार्थ गौतम राम को अर्थात स्वयं स्वरूप को नमन किया।
शाक्य सिंह सिद्धार्थ गौतम बुद्ध की तरह वाराणसी पड़ाव स्थित अवधूत भगवान राम पाठशाला से लेकर तिब्बती उच्चतर शैक्षिक संस्थान सारनाथ में विद्या अध्ययन की औपचारिकता का निर्वाह किया। परीक्षा नहीं परिणाम दाता हैं बाबा सिद्धार्थ गौतम राम-” किसी ने दार पर चढकर फ़ना फिल्लाह को देखा।
किसी ने खाल खिंचवाकर रब्बे-लिल्लाह को देखा।
बशक्ले पीर में मैं ने बिस्मिल्लाह को देखा।”
गुरु गुरु बनाते हैं, शिष्य नहीं:-लौकिक शिक्षा या पारलौकिक आध्यात्मिक गुरु गुरु बनाता है, शिष्य नहीं
भगवान दत्तात्रेय के रूप में बाबा कालूराम ने बाबा कीनाराम को अघोराचार्य बनाया, बाबा राजेश्वर राम ने भगवान राम को औघड़ेश्वर बनाया तो आपने स्वरूप बाबा सिद्धार्थ गौतम राम को सर्वेश्वर बनाया। ३०नवंबर१९९२को बाबा सिंह शावकराम ने धुआंकार औघड़ेश्वर महाप्रभु को  मुखाग्नि देने वाले बाबा सिद्धार्थ गौतम राम के शरीर के साथ एकाकार होते दर्शन किया था। ठीक वैसे ही जैसे बाबा कालूराम बाबा कीनाराम के साथ एकाकार हुए थे। बहरहाल, औघड़ेश्वर महाप्रभु बाबा भगवान राम वर्तमान नर तन धारी महाकपालिक बाबा सिद्धार्थ गौतम राम के रूप में क्रींकुंड अघोर तख्त पर विराजमान हैं।  मान बड़ाई स्तुति से निस्पृह  महाराज श्री संपूर्ण देश विदेश के आश्रमों, शाखाओं व शैक्षिक संस्थानों कार्यक्रम संचालन प्रत्यक्ष व परोक्ष रूप से कर रहे हैं। बड़े सरकार के वसीयत व कार्यक्रमों कार्यक्रम संचालन करते हुए आगे बढाने का क्रम जारी रखे हुए। मेलानी हमीरपुर आश्रम के अलावा अवधूत भगवान राम महाविद्यालय सोनभद्र; मां योगिनी जी हायर सेकेंडरी स्कूल गुंड़ी ,भोजपुर के अलावा झारखंड महाराष्ट्र गोवा गुजरात में आश्रमों द्वारा शिक्षा संस्कार व संस्कृति रक्षण अंधविश्वास धर्मांतरण  पर सारस्वत प्रयास जारी है।
बकौल औघड़ेश्वर महाप्रभु बाबा भगवान राम:-“गौतम जी मेरे शिष्य हैं, किंतु जब मैं क्रींकुंड कीनाराम अघोर स्थल जाता हूं तो मन ही मन गौतम जी को शीश झुकाता​ हूं।
(सारनाथ के आंगन में, लेखक पंडित दयाराम पांडेय, भूमिका विश्व नाथ प्रसाद सिंह अष्ठाना)
“सिद्धार्थ गौतम राम रुपी दर्पण में सिर्फ वर्तमान सक्रिय मिलता है। उनका वर्तमान अपने एक एक मिनट का लेखा जोखा रखता है। बाबा सिद्धार्थ गौतम राम की बुनियाद बीसवीं शताब्दी का बुद्ध कहकर अवधूत भगवान राम को सर्वेश्वरी त्वमेव पाहिमाम कहता हूं। 
(पंडित दयाराम पांडेय; सारनाथ के आंगन में,बालरवि औघड़ सिद्धार्थ गौतम राम)