
✍By-नवीन सिंह परमार ☎07004126180
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👉सीवान ही नहीं बिहार की राजनैतिक व अपराधिक इतिहास के चर्चित कांडों में प्रमुख कांड माने जाने वाले सीवान तेजाब कांड में सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने मोहम्मद शहाबुद्दीन की याचिका को खारिज करते हुए उन्हें निचली अदालत व पटना हाईकोर्ट से मिलें उम्र कैद की सजा को बरकरार रखा 👈

( सीवान सांसद ओमप्रकाश यादव )
सीवान [30 अक्टूबर ] तेजाब कांड के मामले में सुप्रीम कोर्ट की फैसला न्याय की जीत है। न्यायालय ने अपने इस ऐतिहासिक फैसले में यह साबित कर दिया कि कानून के यहां देर भले ही है लेकिन अंधेर नहीं है। उक्त बातें सीवान के सांसद ओम प्रकाश यादव ने सुप्रीम कोर्ट के द्वारा शहाबुद्दीन की याचिका खारिज किए जाने के बाद कहीं । उन्होंने कहा कि कल सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले ने यह साबित कर दिया कि सीवान के पूर्व सांसद व राजद के बाहुबली नेता शहाबुद्दीन वास्तव में अपराधी हैं।
गौरतलब हो कि राजद के बाहुबली नेता व पूर्व सांसद को सुप्रीम को से सोमवार को बड़ा झटका मिला है। सुप्रीम कोर्ट ने चंदा बाबू के बेटों की हत्या मामले में मोहम्मद शहाबुद्दीन को हाईकोर्ट से मिली उम्र कैद की सजा को बरकरार रखा है। सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस की बेंच ने पूछा की दोहरे हत्याकांड के गवाह तीसरे भाई राजीव रोशन की गवाही देने जाने के दौरान क्यों की गयी ?
जानकारी के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट ने सीवान में चंदा बाबू के दो बेटों की हत्या मामले में हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी। सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट के फैसले को बरकरार रखा है। चीफ जस्टिस की बेंच ने मामले की सुनवाई करते हुए दोहरे हत्याकांड मामले में दिल्ली के तिहाड़ जेल में बंद मोहम्मद शहाबुद्दीन के अधिवक्ताओं से पूछा कि दोहरे हत्याकांड के गवाह तीसरे भाई राजीव रोशन की गवाही देने के लिए अदालत में जाते समय हत्या क्यों कर दी गयी? आखिर इस हमले के पीछे कौन था? साथ ही हाईकोर्ट के फैसले में दखल देने से इनकार करते हुए अपील खारिज कर दी।
👉क्या है सीवान का तेजाब कांड ?
बाहुबली नेता व राजद के पूर्व सांसद मो शहाबुद्दीन और उसके गुर्गों ने सीवान जिले के प्रतापपुर गांव में साल 2004 के अगस्त में सीवान के व्यवसायी चंदा बाबू के दो बेटों सतीश और गिरीश पर तेजाब से हमला कर हत्या कर दी थी।बताया जाता है कि दोनों का कसूर सिर्फ इतना ही था कि दोनों भाइयों ने शहाबुद्दीन के गुंडों को रंगदारी देने से इनकार कर दिया था। उक्त मामले में व्यवसायी चंदकेश्वर प्रसाद उर्फ चंदा बाबू की पत्नी कलावती देवी ने अपने बेटों की अपहरण व हत्या की आशंका से संबंधित एक मामला सीवान मुफस्सिल थाने में दर्ज करायी थी।इसके पांच साल बाद 2009 में सीवान के तत्कालीन पुलिस अधीक्षक अमित कुमार जैन के निर्देश पर हत्याकांड की जांच कर रहे अधिकारी ने मोहम्मद शहाबुद्दीन, असलम, आरिफ और राज कुमार साह को अप्राथमिकी अभियुक्त बनाया था।मामले की सुनवाई करते हुए दिसंबर 2015 को सीवान की निचली अदालत ने शहाबुद्दीन व अन्य को उम्रकैद की सजा दी थी। इसके बाद पटना हाईकोर्ट में शहाबुद्दीन के द्वारा निचली अदालत के फैसले के खिलाफ अपील की गयी। पटना हाईकोर्ट ने भी मामले की सुनवाई करते हुए 2017 में निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखा। मोहम्मद शहाबुद्दीन की धमकियों के बावजूद चंदा बाबू अपने बेटों के हत्यारों के खिलाफ न्याय की लड़ाई लड़ना जारी रखी, लेकिन उन्हें इसकी भारी कीमत भी चुकानी पड़ी।जून 2014 को मामले के चश्मदीद गवाह व चंदा बाबू के तीसरे बेटे राजीव रोशन की भी गोली मारकर हत्या कर दी गयी।

( सीवान के व्यवसायी चंदकेश्वर प्रसाद उर्फ चंदा बाबू)
वहीं तेजाब कांड पर सुप्रीम कोर्ट में शहाबुद्दीन की याचिका खारिज होने पर चंदा बाबू ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला सर्वमान्य होता है। मुझे तो भगवान से अधिक सुप्रीम कोर्ट पर भरोसा है। मैं चाहता हूं कि उम्र कैद की सजा को फांसी की सजा में बदल दिया जाए। सजा बरकार रखने से मुझे और सीवान के लोगों के लिए राहत की बात है। उन्होंने कहा कि शहाबुद्दीन को किसी भी हालत में जमानत नही मिलनी चाहिए । उसके जमानत पर छूटने से मेरे सहित कई लोगों को जान की खतरा है ।





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