बैठक में शामिल पूर्व केंद्रीय मंत्री सारण सांसद रूडी, मंत्री संजय झा व विभागीय अधिकारी

नई दिल्ली/छपरा। सारण जिले को उत्तर बिहार के मुख्य प्रवेश द्वार (गेटवे ऑफ नॉर्थ बिहार) के रूप में विकसित करने के लिए एक बड़ी पहल की गई है। नई दिल्ली स्थित ट्रांसपोर्ट भवन में सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के सचिव वी. उमाशंकर और क्षेत्रीय सांसद राजीव प्रताप रूडी की मौजूदगी में करीब तीन घंटे तक एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में सारण में प्रस्तावित एयरपोर्ट, अत्याधुनिक सड़क कनेक्टिविटी और नियोजित शहरी विकास की 17 प्रमुख योजनाओं पर विस्तृत चर्चा हुई और अधिकारियों ने इन पर अपनी सहमति जताई।

बैठक में संसद की स्थायी समिति के अध्यक्ष संजय झा, बिहार के मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत, पथ निर्माण विभाग के सचिव पंकज कुमार पाल और बीएसआरडीसीएल के प्रबंध निदेशक सौरभ जोरवाल सहित केंद्र व राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारी प्रत्यक्ष और ऑनलाइन माध्यम से शामिल हुए।

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17 प्रमुख कनेक्टिविटी योजनाएं और विकास का खाका

बैठक के दौरान ट्रांसपोर्ट प्लानर डॉ. सेवाराम ने एक विस्तृत पावर पॉइंट प्रेजेंटेशन दिया। इसमें सारण और आसपास के क्षेत्रों को जोड़ने के लिए कई महत्वपूर्ण प्रस्ताव पेश किए गए:

  • रिंग रोड और फ्लाईओवर: दीघा रोटरी के तीनों सेक्शन, जेपी सेतु, बाकरपुर क्लोवर लीफ, एनएच-139W पर दो अंडरपास, सर्विस रोड और प्रस्तावित रूडी जंक्शन का विकास किया जाएगा।
  • गंगा पथ व पुल कनेक्टिविटी: शेरपुर-दिघवारा पुल के माध्यम से नकटादियारा एवं गंगहरा गांव को जोड़ने, दिघवारा क्लोवर लीफ (भेल्दी स्पर) तथा गंगा पथ के कोईलवर विस्तार को क्लोवर लीफ से जोड़ने की योजना है।
  • 240 मीटर चौड़ा नॉर्थ रिंग रोड: पटना नॉर्थ रिंग रोड के लिए 240 मीटर चौड़ाई का प्रावधान रखा गया है, जिसमें दोनों ओर 45-45 मीटर चौड़ी सड़कें और 25-25 मीटर की ग्रीन बेल्ट बनाई जाएगी।

एयरो सिटी और कमर्शियल हब का निर्माण

सारण के नियोजित विकास के लिए संपूर्ण क्षेत्र को 5 जोन और 140 सेक्टरों में विभाजित करने का प्रस्ताव है।

  • एयरो सिटी बफर क्षेत्र: एयरपोर्ट कनेक्टिविटी को ध्यान में रखते हुए 5,508.72 एकड़ का एयरो सिटी बफर क्षेत्र प्रस्तावित है।
  • वाणिज्यिक केंद्र: 5 किलोमीटर लंबे ‘गौरव पथ’ के समीप 568.91 एकड़ में एक बड़ा कमर्शियल हब विकसित किया जाएगा।

इन योजनाओं के क्रियान्वयन से न केवल सारण में विश्वस्तरीय बुनियादी ढांचे का निर्माण होगा, बल्कि पूरे उत्तर बिहार में व्यापार, पर्यटन और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।