माझी(सारण) : सुरक्षा व सुविधा के नाम पर विभाग के वरीय पदाधिकारियों की उदासीनता मायुस करने वाली है। मांझी थाना भवन व पुलिस कर्मियों का आवास वर्षों से जर्जर स्थिति में है। जिसमें बैठ कर न तो पुलिस-कर्मी ठीक से काम कर सकते हैं और न आराम। दीवारें कई जगह दरक गई है। छत के निचले हिस्से से प्लास्टर उखड़ कर गिरते रहने की घटना आम बात है। कई बार पुलिस कर्मी घायल होते-होते बचे हैं। बरसात में दफ्तर में बारिश का पानी टपकने से कागजातों को बचाने के लिए प्लास्टिक आदि का इस्तेमाल करना पड़ता है। ऐसी परिस्थिति में भला कोई कैसे चैन के साथ ड्यूटी कर सकता है। फिर भी पुलिस-कर्मियों के हौसले बुलंद है। जिसका प्रमाण पिछले दिनों एसपी सारण द्वारा यहां के वर्तमान थानाध्यक्ष नीरज कुमार मिश्रा को सम्मानित किया जाना है। थानाध्यक्ष ने बताया कि सुविधाओं को बढाये जाने की जरूरत तो हैं ही। मगर हमें तो ड्यूटी करनी है। ज्यादा कुछ नही कह सकते।
कांग्रेसी नेता उमा शंकर ओझा का कहना है कि थाना परिसर में आयोजित बैठक में जाने का मौका मिलता रहता है। भवन की जर्जर स्थिति देख कर पुलिस-कर्मियों पर तरस आता है। विभाग के वरीय पदाधिकारियों इस पर ध्यान देने की जरूरत है। समाजसेवी साधु दुबे का कहना है कि थाना भवन व पुलिस-कर्मियों के आवास के पुनर्निर्माण की सख्त जरूरत है। विभाग गम्भीर नही दीखता। वहीं जदयु नेता अरविंद सिंह का कहना है कि थाना भवन व आवास बहुत पुराना हो चूका है। जो वर्षों से जर्जर स्थिति में है। पुलिस कर्मी डरे-डरे रहते हैं।

भौगोलिक दृष्टि से पुलिस कार्य चुनौतीपूर्ण

मांझी थाना क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति को देखते हुए पुलिस का कार्य काफी चुनौती-पूर्ण है। यह थाना सारण जिले के पश्चिमी छोर पर बिहार और यूपी के बॉर्डर से सटे सरयू नदी से महज दो सौ मीटर उत्तर की दूरी पर अवस्थित है। जो एक तरफ मांझी से मटियार, जई छपरा तक सरयू नदी तो दूसरी तरफ सिवान जिले का सिसवन थाना क्षेत्र का एरिया वही उतरी छोड़ पर एकमा तो उत्तर-पश्चिम के कोने पर रसूलपुर तक फैला है, वहीं पूर्वी छोर पर रिविलगंज का क्षेत्र है। थाना पुलिस अगर थाना परिसर से निकल कर अपने क्षेत्र का एक बार गस्त लगा ले तो चालीस किलोमीटर की दूरी का सफर पूरा हो जाता है। अजीब नक्शे वाले इस थाना क्षेत्र के अंतर्गत कुल अठारह पंचायतों के करीब एक सौ से अधिक गांव आते हैं। जिसकी आबादी लगभग ढाई लाख है। जहां शांति व कानून-व्यवस्था बनाये रखने की पूरी जिम्मेवारी यहां की पुलिस की है। इतने बड़े क्षेत्र पर नजर रखने के लिए थाने में करीब आधा दर्जन अधिकारी समेत महज 30से 35 पुलिस-कर्मी तैनात हैं। जो नाकाफी हैं। बॉर्डर पर यह थाना होने के कारण शराब समेत अन्य सामानों के तश्करों पर नजर रखने व जयप्रभा सेतु के एप्रोच मार्ग पर वाहनों के चेकिंग में हमेशा करीब आधा दर्जन पुलिस-कर्मी लगे रहते हैं। बॉर्डर एरिया में आपराधिक गतिविधियों पर नजर रखने के साथ नदी में कूद कर आत्म-हत्या पर अंकुश लगाने की महती जिम्मेवारी है। इसके अलावें मझनपुरा से जई छपरा, महम्मदपुर, भजौंना , खानपुर, कटोखर, मुबारकपुर, चेफुल, ताजपुर डुमरी आदि सीमावर्ती गावों की सुरक्षा भी इनके हाथ में है। वहीं थाना क्षेत्र में दो ओपी है। एक महम्मदपुर में जहां 3 व दूसरा ताजपुर में है जहां 2 पुलिस के जवान मौजूद रहते हैं। इतने बड़े क्षेत्र की सुरक्षा व विधि-व्यवस्था जिनके जिम्मे है। इस थाने को काट कर एक नया थाना के गठन की बात वर्षों से लंबित है।