
सीवान में एक वर्ष पूर्व एक मासूम बच्ची के साथ दुष्कर्म कर के हत्या करने वाले अपराधी को न्यायालय ने दिया सजा ए मौत
लगभग 11 वर्ष बाद हुई सीवान न्यायालय में सजा ए मौत की सजा
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🔴 सीवान में लगभग एक वर्ष पूर्व एक 4 वर्षीय मासूम बच्ची के साथ दुष्कर्म करने एवं सबूत को मिटाने के उद्देश्य निर्मम हत्या किए जाने के मामले में दोषी पाएं गए
एकमात्र अभियुक्त जियाउद्दीन उर्फ़ धनु को न्यायालय ने सजाए मौत की सजा दी है।
गौरतलब हो कि सीवान के अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (प्रथम) विनोद कुमार शुक्ला की अदालत ने उक्त सनसनीखेज मामले में बुधवार को सुनवाई करते हुए अभियुक्त को पास्को अधिनियम की धारा के अंतर्गत मृत्युदंड की सजा दी। अदालत में अभियोजन की ओर से बहस करने वाले अपर लोक अभियोजक नरेश कुमार सिंह ने सजा के बिंदु पर बहस करते हुए अदालत से निवेदन किया कि मामला रेयरेस्ट ऑफ रेयर है इसलिए अभियुक्त को अधिकतम सजा की व्यवस्था की जानी चाहिए। 4 वर्षीय मासूम बच्ची यासमीन प्रवीण की मा एवं कांड की सूचीका रुकसाना खातून की ओर से अधिवक्ता मोहम्मद कबीर ने अदालत में पक्ष रखते हुए निवेदन किया कि घटना क्रुर से क्रूरतम है तथा अभियुक्त ने पूरी योजनाबद्ध तरीके से पहले तो बच्ची के साथ दुष्कर्म किया और तत्पश्चात कोई सबूत ना रह जाए इसलिए उसकी निर्मम हत्या करके भाग गया। चुकी अभियुक्त कस्टडी से भी भाग चुका है और पुलिस बड़ी मुश्किल परिस्थितियों में उसे गिरफ्तार किया है। इसलिए युवक अपराधी चरित्र का है और उसे अधिकतम सजा मिलनी चाहिए ताकि समाज में फिर कोई यासमीन वहशीपन का शिकार ना बन सके। अदालत ने पक्ष और विपक्ष को सुनने के पश्चात अभियुक्त को मृत्युदंड की सजा दी है ।प्राप्त जानकारी के मुताबिक बड़हरिया थाना के
इजमाली गांव निवासी मोहम्मद राजा की 4 वर्षीय पुत्री यासमीन प्रवीण अगस्त 2018 में पड़ोस में हो रहे मिलाद को सुनने के लिए गई हुई थी। इसी बीच पड़ोसी जियाउद्दीन उर्फ़ धनु ने बच्ची को चॉकलेट का प्रलोभन देकर उसे मक्के के खेत में ले गया तथा दुष्कर्म करने के पश्चात उसकी निर्मम हत्या कर दी थी। ग्रामीणों ने जियाउद्दीन को बदहवाश स्थिति में मक्के के खेत से निकलते हुए देखा था। संदेह के आधार पर खोजबीन करने पर बच्ची का क्षत-विक्षत शव मक्के के खेत से बरामद किया गया था। रुखसाना के बयान पर एकमात्र अभियुक्त के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी। मामले में उषा सिंह ने भी बहस किया।
बता दे कि सीवान में लगभग 11 वर्ष पूर्व भी इसी प्रकार के एक मामले में अपर लोक अभियोजक नरेश कुमार सिंह ने रामदेव नाम के एक अन्य अभियुक्त को तत्कालीन अपर जिला न्यायाधीश ज्ञानेश्वर श्रीवास्तव की अदालत से फांसी की सजा दिला चुके हैं।
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✍परमार मीडिया सीवान




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