Category Archives: ●सम्पादकीय.

‘पत्रकार’ नवीन गुप्ता को मारने वाला ‘संवाद सूत्र’ अब मरना चाहिए।

 ‘पत्रकार’ नवीन गुप्ता को मारने वाला ‘संवाद सूत्र’ अब मरना चाहिए।

गोरखपुर से दैनिक खोज खबर के लिए अतिथि संपादक संजय कुमार गुप्ता की रिपोर्ट:-कानपुर के पत्रकार नवीन गुप्ता की हत्या के बाद अखबार में जो खबर छपी, उसमें उन्हें ‘संवाद सूत्र’ बताया गया है। पूरी खबर में कहीं भी पत्रकार नवीन नहीं लिखा गया है। स्याही उतनी ही लगनी थी, जगह भी उतनी ही देनी थी लेकिन नहीं ?

जिस सम्मान के लिए नवीन अखबार से जुड़े रहे, मृत्युपरांत श्रद्धान्जलिस्वरूप मानकर ही, उनके लिए एक सम्मानजनक शब्द लिख देने से अखबार का क्या चला जाता, वे वर्षों तक बगैर वेतन काम लेने वाले अखबार प्रबंधन ने कम से कम अपने पत्रकार को अंतिम वेतन यही दे दिया होता एक पत्रकार को बस पत्रकार कह दिया होता…!

संवाद सूत्र; यह कितना अपमानजनक है; इसे जीने वाले ही जानते हैं…। यह शब्द जिससे जुड़ जाता है, वह अपनों के बीच में ही अछूत हो जाता है। उफ्फ… ‘बंधुआ’ शब्द आज भी अपने बदले हुए नाम से मीडिया में कितनी शान से जिंदा है।

अपने मतलब के लिए इसमें कितनी शक्ति भर दी गई है कि पत्रकार तो मर भी जाता है लेकिन यह शब्द नहीं मर पाता है। पत्रकार को हर क्षण मारने वाला यह शब्द भी अब मरना चाहिए।

मेरी उच्चतम न्यायालय से मांग है कि जिस तरह समाज में एक जाति विशेष के नाम को गाली बताते हुए उसके प्रयोग पर रोक लगा दी; मीलॉर्ड, मीडिया में भी संवाद सूत्र/स्ट्रिंगर शब्द पर रोक लगाइए। गांव, कस्बा, पंचायत, प्रखंड, नगर निगम, राजधानी कोई भी जगह हो, किसी पत्रकार को संवाद सूत्र न कहा जाए; वह पत्रकार है, उसे बस पत्रकार ही कहा जाए.

गुदरी के लाल देशरत्न डा.राजेन्द्र प्रसाद का जन्म दिन पर लाल बिहारीलाल की विशेष रिपोर्ट

गुदरी के लाल देशरत्न डा.राजेन्द्र प्रसाद का जन्म दिन पर लाल बिहारीलाल की विशेष रिपोर्ट

अतिथि संपादक लाल बिहारीलाल के क़लम से:-राजेन्द्र बाबू बचपन से ही काफी मेधावी एवं बहुभाषी थे। इनकी हायर सेकेन्ड्री की पढ़ाई जिला स्कूल छपरा से शुरु हुई औऱ कोलकाता से डिग्री मिली।अपनी वकालत का अभ्यास भागलपुर में किया। इनकी शादी 13 साल की उम्र में ही हो गई परन्तु इनके पढाई पर कोई असर नहीं पड़ा। इनका झुकाव बचपन से ही समाज और साहित्य के प्रति काफी था इसलिए गांधी जी से प्रभावित होकर अपनी नौकरी छोड़कर भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन का झंडा उठा लिया। और साहित्य की श्रीवृद्धि में भी अपना अमूल्य योगदान दिया।

•गुदरी के लाल देशरत्न डा.राजेन्द्र प्रसाद का जन्म 3दिसम्बर 1884 को बिहार केतत्कालिन सारणजिला(अबसीवान)के जीरादेई गांवमें एक कायस्थ परिवार में हुआ था।इनके पिता महादेव सहाय हथुआ रियासत के दीवन थे। अपने पाँच भाई-बहनों में वे सबसेछोटे थे इसलिए पूरे परिवार में सबके लाडले थे। इन्हें चाचा भी काफी लार प्यार करतेथे।

राजेन्द्रबाबू के पिता महादेव सहाय संसकृत एवं फारसीके विद्वान थेएवं उनकी माता कमलेश्वरी देवी एक धर्मपरायण महिला थीं।इसका असर राजेन्द्र बाबू केजीवन पर भी पड़ा ।ये बचपन से ही काफी मेधावी एवं बहुभाषी थे। इनकी हायर सेकेन्ड्रीकी पढ़ाई जिला स्कूल छपरा से शुरु हुई औऱ कोलकाता से डिग्री मिली. अपनी वकालत काअभ्यास भागलपुर में किया। इनकी शादी 13 साल की उम्र में ही हो गई परन्तु इनके पढाईपर कोई असर नहीं पड़ा। इनका झुकाव बचपन से ही समाज और साहित्य के प्रति काफी थाइसलिए गांधी जी से प्रभावित होकर अपनी नौकरी छोड़कर भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन काझंडा उठा लिया। और साहित्य की श्रीवृद्धि में भी अपना अमूल्य योगदान दिया।

1920ई. में जब अ. बा. हि.सा.सम्मेलनका10वाँ अधिवेशन पटना में हुआ तब भी वे प्रधान मन्त्री थे।1923ई. में जब सम्मेलन का अधिवेशन कोकीनाडा में होने वाला था तब वे उसके अध्यक्ष मनोनीत हुए थे परन्तु रुग्णता के कारण वे उसमें उपस्थित न हो सके अत: उनका भाषण जमनालाल बाजाजने पढ़ा था।1926ई० में वे बिहार प्रदेशीय हिन्दी साहित्य सम्मेलन के और1927ई० में उत्तर प्रदेशीय हिन्दी साहित्य सम्मेलन के सभापति थे। हिन्दी में उनकी आच्मकथा(1946) बड़ी प्रसिद्ध पुस्तक है।

इसके अतिरिक्त कई पुस्तकें भी लिखीजिनमेंबापू के कदमों में(1954), इण्डिया डिवाइडेड (1946), सत्याग्रह ऐट चम्पारण (1922), गान्धीजी की देन, भारतीय संस्कृतिवखादी का अर्थशास्त्रइत्यादि उल्लेखनीय हैं। अंग्रेजी में भी उन्होंने कुछ पुस्तकें लिखीं। उन्होंने हिन्दी केदेशऔर अंग्रेजी केपटना लॉ वीकली समाचार पत्रका सम्पादन भी किया था।

भा.स्वतंत्रता आंदोलनमें उनका पदार्पण वक़ील के रूप में अपने कैरियर की शुरुआत करते ही हो गया था।चम्पारणमें गांधी जी ने एक तथ्य अन्वेषण समूह भेजे जाते समय उनसे अपने स्वयंसेवकों के साथ आने का अनुरोध किया था। राजेन्द्र बाबूमहात्मा गांधीकी निष्ठा,समर्पण एवं साहस से बहुत प्रभावित हुए और1921में उन्होंनेकोलकाता विश्वविद्यालयके सीनेटर का पदत्याग कर दिया। गाँधीजी ने जब विदेशी संस्थाओं के बहिष्कार की अपील की थी तो उन्होंने अपने पुत्र मृत्युंजय प्रसाद,जो एक अत्यंत मेधावी छात्र थे, उन्हेंकोलकाता विश्वविद्यालयसे हटाकर बिहार विद्यापीठ में दाखिल करवाया था।

उन्होंनेसर्चलाईटऔरदेशजैसी पत्रिकाओं में इस विषय पर बहुत से लेख लिखे थे और इन अखबारों के लिए अक्सर वे धन जुटाने का काम भी करते थे।1914मेंबिहारऔरबंगालमे आईबाढ़में उन्होंने काफी बढ़चढ़ कर सेवा-कार्य किया था।

बिहारके1934केभूकंपके समय राजेन्द्र बाबू कारावास में थे। जेल से दो वर्ष में छूटने के पश्चात वे भूकम्प पीड़ितों के लिए धन जुटाने में तन-मन से जुट गये और उन्होंने वायसराय के जुटाये धन से कहीं अधिक अपने व्यक्तिगत प्रयासों से जमा किया।शिंधऔर क्वेटाके भूकम्प के समय भी उन्होंने कई राहत-शिविरों का इंतजाम अपने हाथों मे लिया था।

1934में वेभारतीय राष्ट्रीय कांग्रेसअधिवेशन में अध्यक्ष चुने गये।नेता जी सुभाष बोसके अध्यक्ष पद से त्यागपत्र देने पर कांग्रेस अध्यक्ष का पदभार उन्होंने एक बार पुन:1939में सँभाला था। फिर 1942 में अंग्रैजो भारत छोड़ो आंदोलन में भी अपनी महती भूमिका निभाया।

स्वतंत्र भारत के संविधान निर्माण में भी सहयोग किया था। किसानों के प्रति लगाव एवं जमीनी स्तर पर जूडे होने के कारण स्वतंत्र भारत के प्रथम कृषी एवं खाद्य मंत्री बने थे फिर 26 जनवरी 1950 को संविधान लागू होने के एक दिन पहले25जनवरी1950को उनकी बहन भगवती देवी का निधन हो गया लेकिन वे भारतीय गणराज्य के स्थापना की रस्म के बाद ही दाह संस्कारमें भाग लेने गये। 26 जनवरी 1950 को वे स्वतंत्र भारत के प्रथम राष्ट्रपति बने।

राष्ट्रपति के तौर पर उन्होंने कभी भी अपने संवैधानिक अधिकारों मेंप्रधानमंत्रीया कांग्रेस को दखलअंदाजी का मौका नहीं दिया और हमेशा स्वतन्त्र रूप से कार्य करते रहे। हिन्दू अधिनियम पारित करते समय उन्होंने काफी कड़ा रुख अपनाया था। राष्ट्रपति के रूप में उन्होंने कई ऐसे दृष्टान्त छोड़े जो बाद में उनके परवर्तियों के लिए मिसाल के तौर पर काम करते रहे।12वर्षों तक राष्ट्रपति के रूप में कार्य करने के पश्चात उन्होंने1962में अपने अवकाश की घोषणा की। अवकाश ले लेने के बाद ही उन्हेंभारत सरकारद्वारा सर्वोच्च नागरिक सम्मानभारत रत्नसे नवाज़ा गया।

अपने जीवन के आख़िरी महीने बिताने के लिये उन्होंने पटना के निकट सदाकत आश्रम चुना। यहाँ पर28फ़रवरी1963में उनके जीवन की कहानी का अंत हो गया। यह कहानी थी श्रेष्ठ भारतीय मूल्यों और परम्परा की चट्टान सदृश्य आदर्शों की। हमको इन पर गर्व है और ये सदा राष्ट्र को प्रेरणा देते रहेंगे। ऐसे राष्ट्रभक्त बहुत कम ही जन्म लेते है जो सबकुछ छोड़कर देश की सेवा में सदा लगा रहे।

उनकी वंशावली को जीवित रखने का कार्य उनके प्रपौत्र अशोक जाहन्वी प्रसाद कर रहे हैं। वे पेशे से एक अन्तर्राष्ट्रीय ख्याति-प्राप्तवाज्ञानिकएवंमनोचिकित्सकहैं। उन्होंने बाई-पोलर डिसऑर्डर की चिकित्सा मेंलीथियमके सुरक्षित विकल्प के रूप में सोडियम वैलप्रोरेट की खोज की थी। अशोक जी प्रतिष्ठित अमेरिकन अकैडमी ऑफ आर्ट ऐण्ड साइंस के सदस्य भी हैं।

लेखक-वरिष्ठ साहित्यकार एवं लाल कला मंच,नई दिल्ली के सचिव हैं।

​नाबालिग कमसिनों से संबंध बनाने की कुप्रथा पर सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले पर विशेष

नाबालिग कमसिनों से संबंध बनाने की कुप्रथा पर सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले पर विशेष-

दैनिक खोज खबर संवाददाता बगहा प, च, विजय कुमार शर्मा की कलम से
•सम्पादकिय …साथियों, फल तभी देखने में सुंदर और खाने खाने में मीठा लगता है जब वह पूरी तरह से पक जाता है। कच्चा फल तीखा और अस्वादिष्ट ही नहीं लगता है बल्कि नुकसान दायक भी होता है। मनुष्य के भी परिपक्व होकर होने का एक समय होता है चाहे नर हो चाहे नारी हो। प्रकृति चाहे फल हो चाहे नर नारी हो उसके परिपक्व होने के संकेत देने लगती है और लोग कहने लगते हैं कि यह फल गदराकर पकने वाला हो गया है।

इसी तरह नर और नारी भी जब परिपक्व होने लगते हैं तो लोग कहने लगते हैं कि अब शादी ब्याह लायक हो गये है और उनके हारमोन बदलने लगते हैं।हमारे यहाँ एक तबका ऐसा रहा है जिसे कच्चे तीखे फल यानी कमसिन पंसद रही हैं हालांकि ऐसे लोगों को इंसान नहीं बल्कि शैतान की श्रेणी में हमेशा देखा जाता है।

दासी प्रथा के जमाने में इसे बढ़ावा मिला और साठ साल के तक के बुढ्ढों ने  सोलह साल की कमसिन लड़कियों को पत्नी बनाकर कली को खिलने से पहले ही रौंदकर उसके स्वरूप को कुरूप कर दिया।ऐसे मानसिक विक्षिप्त लोग कमसिनों से शादी करके शादी की आड़ में अपनी हवश पूरा करते हैं। अबतक हमारा संविधान भी शादी के नाम पर कमसिनों के साथ शारीरक हवस करने की छूट दे रखी थी।वैसे तो संविधान में बालिका को अठ्ठारह और युवक को बाइस वर्ष की उम्र होने पर परिपक्व माना गया है।इससे कम उम्र की शादी को गैरकानूनी माना है इसके बावजूद लोगों पत्नी के नाम पर इसका उल्लघंन कर रहे हैं।लोग नाबालिग से शादी करके उसकी सहमति या असहमति को नजंरदाज कर संबंध बनाना अपना हक मानते थे।एक दिन पहले देश की सर्वोच्च अदालत ने इस संबंध में अपना एक अभूतपूर्व ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए नाबालिग यानी कमसिन पत्नी के साथ भी शारीरक संबंध बनाने को दुष्कर्म की श्रेणी में लाकर अपराध घोषित कर दिया है।अदालत ने अपने दूरगामी परिणाम वाले इस फैसले में कहा है कि वैसे तो अठ्ठारह साल की लड़की की सहमति से संबंध बनाने की व्यवस्था है लेकिन नाबालिग लड़की से संबंध बनाने के मामले में उसकी सहमति और असहमति का कोई मतलब ही नही होता है।इस ऐतिहासिक समारिक महत्व के फैसले में इंडियन पैनल कोड की धारा 375 के अपवाद दो को नये ढंग से परिभाषित किया गया है।इस बीसवीं नारी सदीं के अवसर पर जस्टिस देशदीपक गुप्ता व न्यायमूर्ति मदन बी लोकुर द्वारा सुनाया गया फैसला एक गैर सरकारी संस्था “इंडपेंडेंट थाँट” की याचिका पर सुनाया गया है।

सदियों से चल रही इस कुप्रथा का सती प्रथा की तरह आखिरकार अंत हो गया है।इस फैसले की तिथि और फैसला सुनाने वाला राजा राममोहन राय की तरह इतिहास दोहराया जायेगा।हम अपने और अपने हजारों पाठकों एवं वेवश असहाय नाबालिग कमसिन बहनों बेटियों की तरफ से इस फैसले के लिये दोनों न्यायमूर्तियों एवं सर्वोच्च न्यायालय को साधुवाद देते हैं।आशा ही ही विश्वास है कि यह फैसला नवयुग निर्माण और नारी सदीं में एक मील का पत्थर साबित होगा।

आंखों के नीचे काले घेरे और झुर्रियां दूर करने के सहज उपाय

आंखों के नीचे काले घेरे और झुर्रियां दूर करने के सहज उपाय

दैनिक खोज खबर सेन्ट्रल डेस्क:-आंखो के आस पास की त्वचा बेहद नरम और मुलायम होती है। जिस वजह से बहुत ही जल्दी यहां त्वचा ढीली और काली होने लगती है। जैसा की मैने पंकज भैया से मुलाक़ात होने पर यह महसूस किया की कैसे अधिक देर तक कंप्यूटर और स्मार्ट फ़ोन पर कार्य करने और टेंशन की वजह से उनके आंखों के नीचे काले घेरे और झुर्रियां दिखने लगी है।

•मैने उनका एक फ़ोटो लेने के उपरान्त उन्हें हेल्थ टिप्स दे दिया

जिसे वे सायद ही इस्तेमाल करेंगे लेकिन आप लोग आंखों के नीचे काले घेरे और झुर्रियां दूर करने निम्नलिखित टिप्स का इस्तेमाल जरूर करे…

•क्या न करें:-टेंशन की वजह से आंखों के आस-पास झुर्रियां भी बढ़ने लगती हैं और बाल तक झड़ने लगते हैं इसलिए बेवजह की टेंशन से बचें। अधिक देर तक टी वी और कंप्यूटर पर कार्य न करें।

•एलोवेरा:-1 चम्मच एलोवेरा के रस को सुबह-शाम दो बार चेहरे पर, नहाने के बाद और सोने से पहले लगाएं। यह आपकी त्वचा को टाईट करेगा।

•जैतून तेल:-जैतून का तेल सौंदर्य से जुड़ी कई समस्याओं में काफी फायदेमंद है। इससे आंखों के आसपास हल्के हाथों से मालिश करें, इससे रक्त संचार ठीक रहता है और आंखों की थकान कम होती है जिससे डार्क सर्कल की समस्या दूर होती है।

•गुलाब जल:-गुलाब जल की मदद से डार्क सर्कल की समस्या से निजात पा सकते हैं। बंद आंखों पर गुलाब जल में भिगोई हुई रूई को आंखों पर रखें। ऐसा केवल 10 मिनट तक करें। ऐसा करने से आंखों के आस पास की त्‍वचा चमक उठेगी।

•बादाम का तेल:-काले घेरे से छुटकारा पाने के लिए बादाम के तेल बहुत फायदेमंद है। बादाम के तेल को आंखों के आस-पास लगाकर कुछ मिनटों के लिए छोड़ दें। फिर उंगलियों से 10 मिनट तक हल्की मालिश करें। इसके बाद चेहरा साफ कर लें।

•केला:-पके हुए केले को मसल लें और इसमें गुलाब जल डालें। इसे आंखों के आस पास लगाएं। और आधे घंटे के बाद गुनगुने पानी से चेहरे को धो लें

•आलू:-आलू के रस को आँखों के नीचे हलके हाथ से मसाज करने से काले घेरे दूर होते हैं।

​सीवान में जानलेवा साबित हो रहे है निर्माणाधीन मकान का सेप्टिक टैंक,दो माह के अंदर,  छ: मजदूरों की ले ली जान

✍नवीन सिंह परमार ” संपादक ” 

☀श्रम विभाग की लापरवाही से जान गवा रहे है मजदूर
☀निर्माण कार्यों में सुरक्षा मानकों नहीं रखा जा रहा है ध्यान
☀मृतक के परिजनो को मिलेगा चार-चार लाख रूपये मुआवजा

🔸सीवान में आए दिन कोई न कोई दुर्घटना होना कोई बड़ी बात नहीं है, लेकिन आजकल सीवान में सुरक्षा मानकों को ध्यान में न रखते हुए धराधर किए जा रहे निर्माण कार्य में मजदूरों की जान जाना आम बात हो चला है । नहीं तो क्या कारण है कि दो माह के अंदर ही निर्माणाधीन मकान के सेप्टिक टैंक में गिरने से कुल छह मजदूरों की मौत हो चुकी है । जानकारों की माने तो सीवान में धराधर हो रहे निर्माण कार्यों में श्रम विभाग के अनदेखी व मिलीभगत से सुरक्षा मानकों का ध्यान निर्माणकर्ता व ठेकेदार नहीं रखते है जिसके कारण निरीह मजदूर की जान चली जा रही है ।

गौरतलब हो कि शनिवार को सीवान शहर के मालवीय नगर के पूरब विवेकानंद नगर,  नई बस्ती स्थित एक निर्माणाधीन मकान के सेप्टिक टैंक में चार  मजदुर गिर गए , जिसके टैंक के अन्दर दम घुटने से उनकी मौत हो गयी ।
घटना के संबंध में बताया जाता है कि  विवेकानंद नगर मुहल्ला स्थित एक निर्माणाधीन मकान के सेप्टिक टैंक का सेंट्रिंग खोलने के क्रम में दो मजदुर टैंक के अंदर गिर गये जिसके बाद ठीकेदार ने शोर मचाकर लोगो को बुलाया और फिर खुद दोनों को बचाने टैंक के अन्दर कूद गया। वहीं तीनों के टैंक में जाने की सुचना मिलने के बाद बगल में एक दुसरे मकान में काम कर रहे एक अन्य मजदुर भी तीनो को बचने के लिए टैंक में उतरा। इस दौरान वह भी टैंक में गिरा गया।

घटना की जानकारी मिलने के बाद महादेवा ओपी पुलिस सहित सदर अनुमंडल पदाधिकारी एसबी मीणा घटना स्थल पर पहुँच कर  जेसीबी की मदद से टैंक को तुड़वाकर चारो को बाहर निकलवाया। जिसके बाद उन्हें सदर अस्पताल भेजा गया। जहाँ चिकित्सको ने चारों को मृत्त घोषित कर दिया।

शनिवार को सेप्टिक टैंक में गिर कर मरने वाले मजदूरों  में  मुफस्सिल थाना क्षेत्र के मोहिद्दीनपुर गाँव निवासी सुरेश राम का पुत्र ठीकेदार डब्लू कुमार, मुन्नीलाल राम का पुत्र भरत राम, राधाकिशुन राम का पुत्र हलचल कुमार और मुफस्सिल थाना के ही  बरहन गोपाल  गाँव निवासी सफी मिया का पुत्र अरमान अली हैं।

वहीं घटना के बाद सीवान जिलाधिकारी  महेंद्र कुमार ने चारों की मौत को अस्वाभाविक मौत बताते हुए सभी के परिजनों को चार-चार लाख रूपये मुआवजा देने की बाते कहीं।
👉17 जुलाई को भी हुई थी एक हादसा : 

बता दे कि सीवान में निर्माणाधीन मकान के सेप्टिक टैंक में गिर कर मजदूरों की जान गंवाने की यह दो महीने में दूसरी बड़ी घटना है । पिछले 17 जुलाई को सीवान के पचरुखी थाना थाना क्षेत्र के गोपालपुर गांव में  बन रहे एक मकान के निर्माणाधीन शौचालय की टंकी की ढलाई में लगे पटरे को खोलने के दौरान तीन मजदूर टंकी के अंदर गीर गए थें, उन मजदूरों की भी टंकी के अंदर दम घुटने लगा और वे टंकी के अंदर ही बेहोश गये। आनन फानन में तीनो मजदूरो को सेप्टिक टैंक से बाहर निकाला गया और उन्हें पचरुखी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया गया। लेकिन, पीएचसी पर उस समय न तो कोई डॉक्टर मौजूद था और ना ही ऑक्सिजन सिलिंडर था। जिससे तीनो मजदूरों में से  दो की मौत हो गई वही तीसरे मजदुर को निजी क्लिनिक में इलाज कराया गया जहां उसकी जान बची। पचरुखी के गोपालपुर गांव में 17 जुलाई को हुए हादसे में अपनी जान गंवाने वाले मजदूर गोपालपुर गांव के  तौहीद अली व इलियास हुसैन थें  जबकि घायल मजदुर का नाम समीर आलम था।

स्वच्छ भारत अभियान के लिए एसडीएम की पांच दिवसीय साईकिल यात्रा शुरू

स्वच्छ भारत अभियान के लिए एसडीएम की पांच दिवसीय साईकिल यात्रा शुरू

आज़ाद नेब

जहाजपुर 26 अगस्त। स्वच्छ भारत अभियान को लेकर राज्य में सुर्खियों में आए जहाजपुर के एसडीएम करतार सिंह की पांच दिवसीय साईकिल यात्रा का आगाज 51 सदस्य दल के साथ हुआ।

अल सुबह बस स्टेण्ड से स्वच्छता के लोगो लगी टी-शर्ट ओर केप पहने एसडीएम की अगुवाई में 51 सदस्य दल आज क्षेत्र की पांच दिवसीय यात्रा पर साईकिलों से रवाना हुआ। पर्यावरण बचाने ओर घर-घर टायलेट निर्माण के लिए एसडीएम करतार सिंह पण्डेर,गंधेर ओर टिठोडी ग्राम पंचायत में स्वच्छता अभियान को लेकर आमजन को जागरूक करेगे। सिंह की अगुवाई में गया साईकिल यात्रियों का जत्था स्वच्छता की अखल जागाएगा। दो चरणो में साईकिल यात्रा केा लेकर आमजन भी खासा उत्साह देखा गया। 
उधर तहसीलदार ओमप्रकाश जैन ओर बीडीओ अर्चना मौर्य के नेतृत्व में आज शौचालय विहिन घरों में खडडे खुदवाने का काम भी गति पकड रहा है। मशीनों के माध्यम से शौचालय निर्माण के लिए खडडे खुदवाए जा रहे है।साईकिल यात्रा में विभिन्न विभागों के अधिकारी कर्मचारी,स्वयं सेवी संस्थाओं के प्रतिनिधी भी शामिल हे।

यह साईकिल यात्रा तहसील क्षेत्र की 38 ग्राम पंचायत मुख्यालय पर जाकर आमजन को स्वच्छता के प्रति जागरूक करेगी। गौरतलब है कि जहाजपुर एसडीएम स्वच्छता अभियान को लेकर नित नए प्रयोग कर रहे है। पूर्व में भी छह लोगो को गिरप्तार करने के साथ ही एक गांव की बिजली काटने के आदेशों से एसडीएम देशभर में सुर्खियेा में रहे है।

ट्रिपल तलाक़/बाबा राम रहीम

ट्रिपल तलाक़/बाबा राम रहीम
आज़ाद नेब एडिटर दैनिक खोज खबर राजस्थान 

जयपुर 26 अगस्त। आप को अजीब सा ज़रूर लग रहा होगा लेकिन ज़रा सोचिए दो दिन में आगे पीछे हुए इन दो मामलों को। जिनमे एक मामला ट्रिपल तलाक़ का था जो धर्म और आस्था से जुड़ा था। उस फैसले को इस तरह से पेश किया गया कि मानो दुनिया की सबसे बड़ी बुराई यही थी। और इस तरह का माहौल बनाया गया या यूं संदेश देने की कोशिश की  गयी कि मानो अपने ही देश के नागरिक मुसलमानों से कोई जंग जीत ली गयी हो। या देखो हमने तुम्हारे मज़हब में भी दखलंदाज़ी करके दिखा दी और जाने क्या क्या साबित करने की कोशिश की गई। लेकिन वो मुसलमान जिन्हें उन्मादी,कट्टर,तालिबानी,गद्दार, देशद्रोही,आतंकवादी और जाने किन किन अल्फाजों से मौजूदा दौर में नवाज़ा जा रहा है। और जिनकी तादाद 20 करोड़ से भी ऊपर बताई जाती है उनके धार्मिक और आस्था से संबंधित मामले पे (गलत या सही ये अलग बहस का मुद्दा है) फैसला आना था? देश मे कहीं भी 144 लगाने या और कोई भी क़दम उठाने की ज़रूरत न पहले और न बाद में पड़ी। कहीं 20 करोड़ में से 20 लोग भी जमा नही हुए। वहीं दूसरी और शांति प्रिय, देशभक्त, संविधान और देश को धर्म से ऊपर मानने वाले अहिंसा के दूत एक ऐसे बाबा के लिए लाखों की तादाद में जमा हो रहे हैं (144 के बावजूद) जिसके ऊपर हत्या और बलात्कार का आरोप है। जिसे अभी सिर्फ अदालत में पेश होना था?

ये कौन से खतरनाक मदरसों से लोग आ रहे है ❓
जिनके कारण तीन प्रदेश और पूरा सिस्टम जम सा गया है।रेल सेवा, नेट, मोबाइल सेवा, स्कूल कालेज सभी कुछ बंद ?गंभीरता से विचार और जांच होनी चाहिए। कहीं ये लोग उन मदरसों से तो नही भेजे जा रहे हैं जिनके बारे में कहा जाता है कि वहां देश के खिलाफ पढ़ाया जाता है। और अगर ये उन मदरसों से नही आ रहे तो ये कौन से संस्थान से या कौन सी विचारधारा या सम्प्रदाय से हैं।जिन्होंने तीन प्रदेशो को डिस्टर्ब करके देश को करोड़ों रुपये का नुकसान, कर्फ्यू लागू, हर आम और शरीफ इंसान परेशान, मरीजों और गरीबों का ज़िक्र करना तो वैसे भी फ़िज़ूल है खेर और उससे अफसोसनाक ये कि एक व्यक्ति को देश और संविधान से ऊपर कर दिया? लेकिन जवाब अब भी यही मिलेगा।कि उन्मादी और संविधान में विश्वास न रखने वाले तो वही हैं जिनके सिर के ऊपर कैमरे लगाने का आदेश पारित करा गया है?

जय हिंद

« Older Entries