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सीवान :दो सौ दस बोतल देसी  शराब बरामद , दो  गिरफ्तार 

सीवान :दो सौ दस बोतल देसी  शराब बरामद , दो  गिरफ्तार 

 

#एक बाइक भी जप्त 
#बरुणेश आनन्द बरुण की रिपोर्ट 
मैरवा ( सिवान ) :

थाना  क्षेत्र से विभिन्न इलाकों से  शनिवार रात से लेकर रविवार दिन तक शराब के मामले में कुल दो सौ दस बोतल देसी शराब सहित एक बाईक व मामले से संबंधित  दो ब्यक्तियो की गिरफ्तारी साथ ही  दो अन्य को  चिन्हित किया गया । चिन्हितो के  गिरफ्तारी के लिए छापेमारी चल  रही है  ।मामलो के बारे में बतलाया जाता है कि शनिवार की देर संध्या कैथवली के समिप से  वाहन जांच के क्रम में  शराब के नशे में चूर एक को पकङा गया जिसकी पहचान धनौती मठ निवासी धर्मेन्द्र कुशवाहा के रुप में हुई उसके साथ उसकी मोटरसाइकिल भी जप्त हुई  वही एक अन्य मामले में तीतरा से पुअनी बिजय बहादुर सिंह ने  सूचना पर छापेमारी कर झारियो में छुपाकर रखा गया 180 बोतल यूपी निर्मित देसी शराब किया । मामले के बारे में उन्होने बतलाया कि  संबंधित दो  धंधेबाजो को चिन्हित कर लिया गया है जिन्हे जल्द ही पकङ लिया जाएगा।रविवार दिन में एक अन्य मामले में तीस बोतल देसी शराब के साथ सजना टोला छोटका मांझा निवासी अजय साह को माझा नहर से  पकङा गया ।मामलो के बारे में  थाना प्रभारी संजय कुमार ने कहा कि शराब के अभी तक के  अलग –  अलग मामलो में कुल  दो सौ दस बोतल देसी शराब सहित दो की  गिरफ्तारी हुई है साथ ही एक बाइक भी है  उक्त दो में से शनिवार की रात्रि में पकङा गया पियक्कर धर्मेन्द्र  को रविवार दिन में  उत्पाद विभाग अधिनियम के तहत  न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया।वही अन्य को  सोमवार को उत्पाद विभाग अधिनियम के तहत न्यायिक हिरासत में जेल भेजा जाएगा ।

सीवान : स्कार्पियों और बाइक आमने-सामने भिड़े , एक   गंभीर 

सीवान : स्कार्पियों और बाइक आमने-सामने भिड़े , एक   गंभीर 
#बरुणेश आनन्द बरुण की रिपोर्ट 

मैरवा ( सिवान ) :- – – थाना क्षेत्र स्थित मुख्य मार्ग मैरवा – सिवान के  लक्ष्मिपुर स्थित ओवरब्रिज पर रविवार संध्या में विपरित दिशा से आ रही स्कार्पियो व मोटरसाइकिल कि टक्कर में मोटरसाइकिल चालक गंभीर रूप में घायल हो गया ।  घटनास्थल से संबंधित  स्कार्पियो पर सवार व्यक्तियो ने गाङी रोककर मोटरसाइकिल चालक से पता पुछकर स्थानीय नगर की जानकारी के साथ ही उचीत इलाज के लिए उसके कहने पर उसके गाॅव के निकट के एक निजी अस्पताल में लाया।  जहाॅ स्कार्पियों लगाकर उसके इलाज क्रम में जूट गए डाॅ की परामर्श पर उसे जिला के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया।  बतलाया जाता है कि  स्कार्पियो बेगुसराय से वाराणसी जा रही थी।  गाङी के आगे एक पोस्टर चस्पा है जिसपर भारत – नेपाल पाइपलाइन परियोजना ( मोतीहारी से अमलेख गंज ) इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन लिमिटेड अंकित है प्रथम द्रष्टव्या गाङी विभागीय लगती है। वही घटनास्थल पर लावारिस हालत में  पङी बाइक को सूचना पर पहुंची पुलिस ने अपने कब्जे में कर लिया । बाइक का नंबर बी आर 29 एन 4450 है घायल युवक जिरादेई क्षेत्र के   सिसहानी  निवासी बतीश वर्षीय पप्पू यादव पुत्र  राधाकिशुन यादव  है ।घटना के बारे में पुछे जाने पर  थानाध्यक्ष संजय कुमार  ने कहा  कि लवारिस हालत में एक दुर्घटनाग्रस्त बाइक आई है ।  मामले के बारे में कुछ विशेष  पता नही चल सका है । घटनास्थल पर उपस्थित जनो ने बताया कि प्रथम द्रष्टव्या घायल युवक का दाया पैर व दाए बाह में गम्भीर चोट है फिलहाल युवक जिला के एक निजी हड्डी अस्पताल में परिजनो की देख रेख में  इलाजरत्त है ।

सारण :शराबबंदी जिनके भरोसे वही छलका रहे जाम ! एसपी ने दो पुलिसकर्मियों को किया सस्पेंड 

सारण :शराबबंदी जिनके भरोसे वही छलका रहे जाम,एसपी ने दो पुलिसकर्मियों को किया सस्पेंड 

छपरा (सारण)

जिले के एकमा थाना के दो पुलिसकर्मियों को जाम छलकाना महंगा पड़ गया।मिली जानकरी के अनुसार 20 नवम्बर 17 को एकमा थाने के एक दफादार जगदीश सिंह के घर विशुनपुरा गांव में शादी समारोह था , उसी में एकमा थाना के एएसआई परमानंद पासवान और  सिपाही विवेक कुमार शामिल हुये थे । दोनों शराब पीने के बाद मदहोश हो गये । मदहोश हालत में ही वही पर किसी ने विडिओ बना लिया । जो विडिओ  सारण एसपी हर किशोर सिंह ने नजर में आ गया । जिसके बाद उन्होने इस मामले की जांच की और विडियो सही पाकर दोनों को निलंबित कर दिया।जिन पुलिसकर्मियों को निलंबित किया गया है।  उनमें एकमा थाना के एएसआई परमानंद पासवान और  सिपाही विवेक कुमार शामिल है ।

सारण:मानवाधिकार दिवस पर जगदम कॉलेज के एनएसएस कैडेटों ने दलित बस्ती में चलाया जागरूकता अभियान 

सारण:मानवाधिकार दिवस पर जगदम कॉलेज के एनएसएस कैडेटों ने दलित बस्ती में चलाया जागरूकता अभियान 

 

छपरा 

राष्ट्रीय सेवा योजना जगदम कॉलेज इकाई छपरा के कार्यक्रम पदाधिकारी डॉ जागो चौधरी के निर्देशन में अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार दिवस के अवसर पर एनएसएस कैडेटों ने गोद लिए गए गांव दलित बस्ती उतरी दहियावां टोला छपरा के बच्चों को उनके अधिकारों के प्रति जागरुक किया गया । अपने मौलिक अधिकार शिक्षा समानता धार्मिक स्वतंत्रता शोषण के विरुद्ध अधिकार संवैधानिक उपचारों का अधिकार के बारे में विस्तारपूर्वक बताया गया । उनसे अपने अधिकारों के प्रति सजग रहने की अपील की गई ।

तत्पश्चात बच्चों के बीच *शिक्षा हमारा अधिकार* विषय पर पेंटिंग प्रतियोगिता का आयोजन किया गया जिस में प्रथम स्थान रंजन कुमार, द्वितीय चंदन कुमार, तृतीय रागिनी कुमारी, तथा सांत्वना पुरस्कार के लिए श्रुति और स्नेहा का चयन किया गया इस अवसर पर स्वयंसेवकों में रणजीत कुमार ,प्रिंस कुमार मोहम्मद शमशाद ,किशन कुमार, रितेश कुमार, कुमारी अनीषा, ममता कुमारी ,सरिता कुमारी, दीपा ,संध्या ,सुप्रिया ,आदि ने सक्रिय भूमिका निभाई।

मानवअधिकार दिवस पर विशेष-10दिसंबर मानव अधिकारों के जागरुकता का दिन

मानवअधिकार दिवस पर विशेष-

10दिसंबर मानव अधिकारों के जागरुकता का दिन

लाल बिहारी लाल


नईदिल्ली। आज मानव के अधिकारों के संरक्षण का संवैधानिक दर्जा पूरी दुनिया प्राप्त है। मानवअधिकारों से अभिप्राय मौलिकअधिकारों एवं स्वतंत्रत से है जिसके सभी मानव प्राणी समान रुप से हकदार है। जिसमेंस्वतंत्रता, समाजिक ,आर्थिक औऱ राजनैतिक रूप में देना है। जैसे कि जीवन और आजादरहने का अधिकारअभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और कानून केसामने समानता एवं आर्थिकसामाजिक औरसांस्कृतिक अधिकारों के साथ ही साथ सांस्कृतिक गतिविधियों में भाग लेने का अधिकारभोजन का अधिकार, काम करने का अधिकार एवं शिक्षा का अधिकार।आदि शामिल है।

मानवाधिकारों के इतिहास और इसकी चिंताओं कोदेखें तो सर्वप्रथम इसके बारे में हमें भारतीय वांग्मय में व्यापक तौर पर सामग्रीमिलती है। दुनिया कि आदि ग्रंथ कहे जाने वाले सबसे प्राचीन ग्रंथों के रूप मेंमान्य वेदों में यह सर्वप्रथम दिखाई देते हैं। ऋग्वेदयजुर्वेदसामवेद सेलेकर अथर्ववेद में अनेक ऋचाएं हैंजो इस बात परचिंता व्यक्त करती हैं कि व्यक्ति के स्वतंत्रता के अधिकार के साथ उसके बोलने कीआजादी का संपूर्ण रूप से ख्याल रखा जाए। राज्य के स्तर पर या स्थानीय निकाय मेंप्रत्येक नागरिक कानूनी समानताआर्थिकसामाजिक और सांस्कृतिक अधिकारों के स्तर पर एक समान हो। भारत मेंइन वैदिक ग्रंथों के बाद अन्य पौराणिक ग्रंथोंजातक कथाओंअपने समय के कानूनी दस्तावेजों सहित धार्मिक और दार्शनिकपुस्तकों में ऐसी अनेक अवधारणाएं,नियमसिद्धांत मिलते हैं जो यह सिद्ध करते हैं कि भारत में मानवाधिकारकी चिंता शुरू से की जाती रही है।

इसके बाद युरोप के देशों समेत दुनिया के तमामदेशों में किसी न किसी रूप में मानव के अधिकारों और उनके संरक्षण की बातें उठनेलगीं। तो संयुक्त राष्ट्र संघ ने 10 दिसम्बर1948 को मानव अधिकार की सार्वभौम घोषणा अंगीकार की ।इन प्रपत्रों कोलगभग विश्व के 380 भाषाओं में अनुवादकराया गया जिसके कारण इस अधिनियम को गिनीज बुक आफ रिकार्ड में नाम दर्ज हुआ। और 4दिसंबर 1950 से विधिवत इसे लागू भी कर दिया गया। जिसमें यह बात साफ तौर पर लिखी गईकि राष्ट्र के लोग यह विश्वास करते हैं कि कुछ ऐसे मानवाधिकार हैं जो कभी छीनेनहीं जा सकतेमानव की गरिमा है और स्त्री-पुरुष के समानअधिकार हैं। इस घोषणा के परिणामस्वरूप विश्व के कई राष्ट्रों ने इन अधिकारों कोअपने संविधान में शामिल करना आरंभ कर दिया।इशका लोगो 23 सितंबर 2011 को न्यूयार्कमें जारी किया गया। इस अधिनियम से पूरी दुनिया में मानवहितों की रक्षा करने मेंकाफी सहयोग मिला है।



                        

भारत में इसका गठन 28 सितंबर 1993 को हुआ और12 अक्टूबर 1993 से राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग काम करना शुरु कर दिया। इसकेअध्यक्ष(चेयरमैन) सर्वोच्च न्यायालय के सेवानिवृत जज होते हैं। इसका मुख्यालय नईदिल्ली में है। और इसके प्रथम चेयरमैन जस्टिस रंगनाथ मिश्रा थे वही वर्तमान मेंइसके चेयरमैन 29 फरवरी 2016 से जस्टिस एच.एल दतु हैं।

भारतमें मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम1993 की धारा 21 में राज्य में मानवाधिकार आयोग गठन का प्रावधान है और सभीराज्यों में इस आयोग का गठन हो चुका है। इन आयोगों के वित्तीय भार का वहन राज्यसरकारों द्वारा किया जाता है। संबंधित राज्य का राज्यंपाल,अध्यक्ष तथा सदस्यों की नियुक्ति करता है। आयोग का मुख्यालयराज्य में कहीं भी हो सकता है। सन 1993 की धारा 21 (5) के तहत राज्यमानव अधिकार के हनन से संबंधित उन सभी मामलों की जांच कर सकता है,जिनका उल्लेख भारतीय संविधान की सूची में किया गयावहीं धारा 36 (9) के अनुसारआयोग ऐसे किसी भी विषय की जांच नहीं करेगाजो किसीराज्य आयोग अथवा अन्य आयोग के समक्ष विचाराधीन है। मानव के हीतो की रक्षा करना हीइस आयोग का मुख्य काम है जिसे संवैधानिक मानयता प्राप्त है। इस मानवहितों की रक्षाके उद्देश्यों को जन-जन तक पहुंचाने के लिए हर साल पूरी दुनिया में 10 दिसंबर कोविश्व मानव अधिकार दिवस मनाते हैं।

(लेखकवरिष्ठ साहित्यकार एवं पत्रकार हैं।)

इन तरीकों से पहचानें “फेक फेसबुक आईडी” को

इन तरीकों से पहचानें “फेक फेसबुक आईडी” को

 •फेसबुक पर फर्जी गर्ल आईडी बनाकर युवकों को बेवकूफ बनाने वाले लोगों की आज कोई कमी नहीं है. युवक भी महिला के नाम से बनी आईडी से फ्रेंड रिक्वेस्ट आते ही बिना सोचे समझे स्वीकार कर लेता हैं या फिर खुद कोई न सर्च कर आईडी ढूंढ़ते हैं और फ्रेंड्स बना लेते हैं.

इस तरह के फेक आईडी आपको केवल बेवकूफ बनाकर फायदा उठाने के लिए तैयार किए जाते हैं या हो सकता है ऎसा करके कुछ लोगों को संतुष्टि मिलती हो. ऎसे भी मामले देखे गए हैं जब कोई मनचला किसी असली गर्ल आईडी से दोस्ती करने के लिए फेक गर्ल आईडी बनाता है और बाद में उसका गलत फायदा उठाता है.

कारण चाहे जो भी हो, जो लोग फेक आईडी के फ्रेंड बन जाते हैं उनको मानसिक तनाव तो होता ही है. इसके साथ कभी कभार अपनी बेवकूफी पर शर्मिन्दगी भी झेलनी पड़ती है. तो फिर कैसे मालूम चले कि कोई गर्ल आईडी फेक है यानि कि या तो वह आईडी किसी मनचले ने बनाई है या फिर चाहे वह रियल युवती ही क्यों ना हो, आपसे निजी जानकारी लेना चाहती हो और उसका उपयोग ब्लैकमैलिंग में करना चाहती हो. फेक आईडी पकड़ने के लिए सबसे पहले उस अकाउंट की प्रोफा इल फोटो पर गौर करें. अगर पूरे अकाउंट में सिर्फ एक ही प्रोफाइल फोटो हो, तो यह साफ हो जाता है कि वह फेक या फर्जी फेसबुक अकाउंट है.

1. स्टेट्स :-स्टेट्स अपडेट भी बताता है बहुत कुछः फेक आईडी की सबसे बड़ी पकड़ यह है कि ऎसे आईडी वाले लोग लम्बे समय तक अपना स्टे्टस अपडेट नहीं करते हैं. ऎसा फेसबुक अकाउंट जिसके द्वारा ना तो कोई वॉल पोस्ट की गई हो, ना किसी फ्रेंड के स्टेट्स पर कमैंट किया हो, तो यह निष्कर्ष निकलता है कि वह फेक अकाउंट है और अपनी पहचान जाहिर ना हो इसलिए कोई एक्टिविटी नहीं कर रहा है.

2. रिसेंट एक्टिविटी :-रिसेंट एक्टिविटी खोल देती है पोल:- प्रोफाइल फोटो, स्टेट्स अपडेट के बाद आपको संभावित फेक आईडी की रिसेंट एक्टिविटीज पर गौर करना चाहिए. यूजर आपके फ्रेंड्स को ही एड कर रहा है और नए फ्रेंड्स बना रहा है और उसने किसी फेसबुक पेज या फिर गु्रप को ज्वॉइन नहीं कर रखा है, तो यह साफ हो जाता है कि वह केवल फ्रेंड्स की संख्या बढ़ाने में लगा है और फेक आईडी से काम कर रहा है.

3. फ्रेंड लिस्ट :-फ्रेंड लिस्ट में से भी मिलती है जानकारी :- फेक फेसबुक आईडी की पहचान में उसकी फ्रेंड लिस्ट भी काफी मदद करती है. अगर संभावित आईडी के फ्रेंड्स में अपोजिट सेक्स के लोग बहुत ज्यादा हैं, तो समझा जाता है कि वह फेसबुक अकाउंट फर्जी है. विपरीत लिंग के लोगों का किसी प्रोफाइल में ज्यादा जुड़ा होना यह भी बताता है कि वह या तो मजे के लिए बनाया गया आईडी है या फिर डेटिंग के लिए लोगों को फांस रहा है.

4. अबाउट :-अबाउट तो देखना ही चाहिए:- इन सब हथियारों पर किसी आईडी को परखने के बाद आपको उस फेक लगने वाली आईडी का “अबाउट” पेज देखना चाहिए. अगर यूजर ने अपनी स्कूल, कॉलेज, काम की जगह, रहने का स्थान जैसी जानकारियां नहीं दे रखीं हैं और डेटिंग ऑप्शन को ऑन किया हुआ है और महिला, पुरूष दोनों में इंट्रेस्टेड है, तो यह भांपने में देर नहीं लगानी चाहिए कि वह आईडी फर्जी या फेक है.

5. मोबाइल नंबर :-मोबाइल नंबर भी है क्या? अरे, वाह :- बहुत से युवक यह देखकर अतिप्रसन्न हो जाते हैं कि किसी गर्ल फेसबुक आईडी ने अपना मोबाइल नंबर भी कांटेक्ट इंफो में दे रखा है. फेक फेसबुक प्रोफाइल्स में यह बात आम है, लेकिन क्या कभी आपने सोचा है कि कोई भी आम लड़की अपने मोबाइल नंबर जनता में बांटेगी क्या? इसलिए विचार करें कि कोई भी ऎसी जानकारी जो लोग देना कम पसंद करते हैं, वह कोई क्यों दे रहा है.

6. फेसबुक एप :-फेसबुक एप यूज किया कि नहीं:-फेसबुक पर रहने वाला कमोबेश हर बंदा किसी ने किसी ऎप को जरूर यूज करता है या फिर लाइक करता है। जैसे कैंडी क्रश सागा, तीन पत्ती इत्यादि। ये प्रोफाइल अपने दोस्तों और नजदीकी रिश्तेदारों को भी ऎप यूज करने की रिक्वेस्ट भेजते हैं। अगर किसी प्रोफाइल में ऎसा देखने को नहीं मिले, तो समझिए कुछ गड़बड़ है। हालांकि यह केवल अकेला ऎसा कारण नहीं है जिससे फेक आईडी को जान सकें, लेकिन फेक आईडी पकड़ने में मदद जरूर करती है.

7. फोटो फर्जी :– फोटो फर्जी है या नहीं, बताता है गूगल:- अगर आपको पूरा यकीन हो चुका है कि कोई फेसबुक अकाउंट फर्जी है, तो गूगल में उसकी प्रोफाइल फोटो को तलाश करें.

अमूमन फेक प्रोफाइल फोटोज को गूगल सलेक्ट कर लेता है और अपने पास स्टोर कर लेता है. जब आप ऎसी फोटो को गूगल इमेज में लेजाकर ड्रॉप करते हैं, तो गूगल उसकी पूरी हिस्ट्री बताने के साथ फेक या ओरिजनल की तस्वीर साफ कर देता है.

फोटो फर्जी है या नहीं, बताता है गूगल:– अगर आपको पूरा यकीन हो चुका है कि कोई फेसबुक अकाउंट फर्जी है, तो गूगल में उसकी प्रोफाइल फोटो को तलाश करें. अमूमन फेक प्रोफाइल फोटोज को गूगल सलेक्ट कर लेता है और अपने पास स्टोर कर लेता है. जब आप ऎसी फोटो को गूगल इमेज में लेजाकर ड्रॉप करते हैं, तो गूगल उसकी पूरी हिस्ट्री बताने के साथ फेक या ओरिजनल की तस्वीर साफ कर देता है.

​श्रीबाबू की जयंती  में आखिर श्रीबाबू पर एक लाइन भी  क्यों नहीं बोले- लालू प्रसाद?

पिछले   शनिवार को कांग्रेस ने पटना में बिहार के प्रथम मुख्यमंत्री श्रीकृष्ण सिंह की 130वीं जयंती मनाई. यह आयोजन मुख्य रूप से कांग्रेस के नेता और भारत सरकार के पूर्व मंत्री अखिलेश प्रसाद सिंह के नेतृत्व में आयोजित किया गया ।

जयंती समारोह में लालू प्रसाद यादव मुख्य अतिथि थें । लालू जी ने अपने आदत के अनुसार समारोह में जम कर बोला । उन्होंने  बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तक को आरे हाथ लिया । वे सब कुछ बोले, लेकिन जिस श्रीबाबू की जयंती थी ।उनके विषय में एक लाइन नहीं बोला । आखिर लालू प्रसाद ने श्रीबाबू के संबंध में क्यों नहीं बोला?  बिहार का हर एक जागरूक नागरिक आज यह प्रश्न पूछ रहा है कि ” श्रीबाबू की जयंती समारोह में मुख्य अतिथि लालू प्रसाद यादव ने उनके विषय में कुछ क्यों नहीं बोला ? 

इस प्रश्न का उत्तर बिहार के वरिष्ठ पत्रकार सुरेंद्र किशोर ने अपने फेसबुक वाॅल पर दिया है । प्रस्तुत है सुरेंद्र किशोर जी का उत्तर हूबहू उनके शब्दों में —


बिहार के वरिष्ठ पत्रकार सुरेंद्र किशोर जी के फेसबुक वाॅल से –
हमारे जागरूक फेसबुक मित्र अनिल सिंहा ने आज  लिखा है कि पटना में आयोजित समारोह में मुख्य अतिथि ,श्री बाबू पर कुछ कहने के बजाए अपने विरोधियों के खिलाफ बोलने में ही लगे रहे।

   अनिल जी ने ठीक ही कहा।पर क्या कीजिएगा !

आजकल ऐसे अवसरों पर ऐसा ही होता है।सिद्धांतवादी स्वतंत्रता सेनानियों की जयंती मनाने का उद्देश्य ही कुछ दूसरा होता है।

 गांधी युग के वैसे महा पुरूषों के बारे में आज के अवसरवादी नेता आखिर बोलंे तो बोलें क्या ?

 यह तो बोल नहीं सकते कि श्रीबाबू ने अपने पुत्र को अपने जीवन काल में विधायक तक नहीं बनने दिया तो मैं भी उनके ही रास्ते पर चलूंगा !

यह भी नहीं बोल सकते कि लंबे समय तक सत्ता में रहने के बावजूद श्रीबाबू ने अपना एक मकान तक पटना में नहीं बनवाया तो मैं भी नहीं बनाऊंगा।

श्री बाबू ने अपने राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों को व्यक्तिगत दुश्मन नहीं माना तो मैं भी नहीं मानूंगा,आज के नेता यह बात किस मुंह से बोलेंगे ?

  यह कैसे बोलेंगे कि चुनाव के समय श्रीबाबू अपने चुनाव क्षेत्र में नहीं जाते थे तो मैं भी नहीं जाऊंगा क्योंकि मैं बाकी के पौने पांच साल तो अपने क्षेत्र की जनता की  सेवा करता ही हूं !

  इस बात की चर्चा आज के कितने नेता कर सकेंगे कि श्री बाबू के निधन के बाद उनके पास कुछ ही हजार रुपए मिले थे जो उनके मित्रों और समर्थकों के लिए रखे हुए थे ।यह सब बोलने में शर्म नहीं आएगी !

 उनके गुणों की चर्चा करने और उनसे सीख लेने की लोगों से अपील करने में आज के अधिकतर नेताओं के सामने कठिनाइयां हैं ! क्योंकि, वे  खुद उस तरह की जीवन शैली से काफी दूर  हैं।

  इसीलिए ऐसे अवसरों पर भी आज के अधिकतर नेता अपने ताजा राजनीतिक एजेंडे को ही आगे रखते हैं।बेचारों पर दया कीजिए अनिल बाबू !


✍संकलन : नवीन सिंह परमार 

DAINIKKHOJKHABAR ☎07004126180

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