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8वां भोजपुरिया स्वाभिमान सम्मेलन पंजावर में सम्पन्न

8वां भोजपुरिया स्वाभिमान सम्मेलन पंजावर में सम्पन्न

दैनिक खोज खबर” ऑन-लाईन हिन्दी न्यूज वेबपोर्टल के लिए लाल बिहारी लाल की रिपोर्ट:-नई दिल्ली। देश के प्रथम राष्ट्रपति व भोजपुरिया मांटी की आन-बान-शान के प्रतिक देशरत्न डाक्टर राजेन्द्र बाबू के जयंती के अवसर पर आखर परिवार के द्वार बिहार के सीवान जिले के रघुनाथपुर प्रखंड के पंजवार में आयोजित किया गया।भोजपुरिया महाकुंभ के आठवां स्वाभिमान सम्मेलन का उद्घाटन बिहार पुलिस के महानिदेशक गुप्तेश्वर पांडेय ने दीप प्रज्वलित कर के किया तथा कार्यक्रम की शुरुआत प्रो. निरुपमा सिंह के द्वारा गाए गए मंगलचरण से हुआ।

इस अवसर पर भोजपुरिया कैलेंडर का लोकार्पण डीजीपी गुप्तेश्वर पांडेय सहित अन्य अतिथियों के द्वारा किया गया । भोजपुरीया स्वाभिमान को बढानेवाले12महानुभावों के जीवन विवरण और चित्र इस कैलेंडर के माध्यम से आखर परिवार ने प्रसारित किया है ।

इस मौके पर मंच पर उपस्थित थे विधान पार्षद प्रो. विरेन्द्र नारायण यादव,पूर्व पुलिस अधिकारी धूर्व गुप्ता,मोहन प्रसाद विद्यार्थी,सौरभ पाण्डेय,प्रोफेसर मुन्ना पाण्डेय सहित भोजपुरिया क्षेत्र के कई गणमान्य लोग उपस्थित थे । कार्यक्रम का संचालन संजय कुमार सिंह ने किया । इस मौके उपस्थित जन-समुह को संबोधित करते हुए श्री पाण्डेय ने कहा कि स्वाभिमान वहीं होता है जहां शौर्य व पुरूषार्थ रहता है । भोजपुरीया समाज में शौर्य व पुरूषार्थ दोनों है इस लिए ही सुदूर ग्रामीण अंचल में भोजपुरिया स्वाभिमान के नाम पर इतना बड़ा सम्मेलन आयोजित हो रहा है । उन्होंने कहा कि मैं एक भोजपुरिया हूँ,इस बात का मुझे हमेशा गुमान रहता है । डीजीपी ने कहा कि जो मनुष्य अपनी मातृभाषा व मातृभूमि से प्रेम नही करता वह मनुष्य के नाम पर कलंक है ।

भोजपुरी स्वाभिमान सम्मेलन के मंच से एक ओर जहां डीजीपी श्री पाण्डेय ने भोजपुरी भाषा, साहित्य व संस्कृति के प्रति जमकर लोगों का उत्साहवर्धन किया वहीं इस मंच का उपयोग उन्होंने बिहार सरकार के शराबबंदी कानून का समर्थन,बाल विवाह का विरोध व दहेज के विरोध शुरू किए गए अभियान को भी अपने गीतों के माध्यम से किया । डीजीपी के इस खूबसूरत प्रयास को उपस्थित जन-समुह ने हाथों-हाथ लिया । लोगों के उत्साह का ही कारण रहा कि डीजीपी श्री पाण्डेय ने एक से बढ़कर एक भोजपुरी गीत प्रस्तुत कर के सरकार के शराबबंदी कानून के पक्ष में माहौल बनाया साथ ही साथ दहेज दानव के खिलाफ लोगों को जागरूक ही नही किया बल्कि उपस्थित जन-समुह,विशेषकर हजारों की संख्या में उपस्थित छात्र–छात्राओ को दहेज न लेने व न देने का संकल्प भी दिलाया।

रविवार को पंजवार में आयोजित भोजपुरिया स्वाभिमान सम्मेलन का शुभारंभ हर वर्ष की भांति भोजपुरिया गौरव यात्रा से हुआ । यह यात्रा विद्या मंदिर पुस्तकालय से शुरू होकर पुरा गांव भ्रमण करते हुए सम्मेलन स्थल पर पहुँचा। सम्मेलन में सैकड़ो की संख्या में स्कूली बच्चे व आखर परिवार के सदस्य शामिल थे । गौरव यात्रा लगभग तीन किलोमीटर लंबी थी ।

लोकलहरी की टीम ने एक से बढ़कर एक भोजपुरी गीत प्रस्तुत कर लोगों के बीच अपनी विशेष पहचान बना ली । टीम का निर्देशन काशी हिन्दू विश्वविद्यालय की शोध छात्रा ऋचा वर्मा ने किया । इसके अलावे ब्यास भरत शर्मा का गायन सहित कई रंगारंग सांस्कृतिक कार्यों क्रमों का आयोजन किया गया। महेंद्र मिश्र की जीवनी पर आधारित नाटक “फूलसूंघी” का मंचन कस्तूरबा बालिका इंटर कॉलेज पंजवार की छात्राओं द्वारा प्रस्तुत किया गया । पांडेय कपिल द्वारा रचित उपन्यास का नाट्य रूपांतरण और निर्देशन संजय सिंह के द्वारा किया गया । कुल मिलाकर ग्रामिण अंचल में भोजपुरी की सुंगंध फैलाने में आखर परिवार सफल रहा।अंत में आखर के वरिष्ठ सदस्य ब्रजकिशोर तिवारी ने सबको धन्यवाद दिया।अगले साल पुनःमिलने मिलाने के साथ8वा सम्मेलन सम्पन्न हुआ।

​🔴सीवान कोऑपरेटिव बैंक ने दी बाढ पीड़ितों के लिए सहायता राशि 

🚫सीवान : सीवान सेन्ट्रल कोआपरेटिव बैंक ने बिहार के बाढ प्रभावितों के सहायता के लिए तीन लाख रुपये का सहयोग राशि बिहार के स्वास्थ्य मंत्री मंगल पाण्डेय को भेंट किया । मुख्यमंत्री राहत कोष के नाम   सहायता राशि का चेक बैंक के अध्यक्ष मनोज कुमार सिंह ने स्वास्थ्य मंत्री को दिया । इस मौके पर बैंक के प्रबंध निदेशक सत्येंद्र कुमार, प्रशासनिक अधिकारी दिग्विजय सिंह, मुख्यालय प्रबंधक  आलोक कुमार वर्मा,  स्थानीय विधायक व्यासदेव प्रसाद, भाजपा नेता रामाकांत पाठक, देवेशकान्त सिंह  सहित बैंक के कई निदेशक व प्रबुद्ध नागरिक उपस्थित थे ।

​🔴भारतीय शास्त्रीय संगीत के युग -पुरूष, शहनाई के जादूगर आ भारत रतन उस्ताद बिस्मिल्लाह खान के पुण्यतिथि पर लोर से भरल श्रद्धांजलि 

☀मरहूम उस्ताद बिस्मिल्लाह खां (जन्म: 21 मार्च, 1916 – मृत्यु: 21 अगस्त, 2006 )
भारतीय शास्त्रीय संगीत के युग-पुरुष , शहनाई के जादुगर , गंगा जमुनी परम्परा के वाहक , भारत रतन बिस्मिल्लाह खान के हर एक सांस संगीत खाति बनल रहे ।


बिहार के एगो छोट कस्बा डुमरांव मे जनमल खान साहब , बनारस के आपन कर्मभुमि बनवले , आ जिनगी भर संगीत मे , कहल जाउ त आपन मय जिनगी संगीत के नावे कई देहले । उँहा के शहनाई शादी बिआह से उत्सव महोत्सव राष्ट्रीय अंतराष्ट्रीय हर जगहा बाजल , शहनाई के धुन प हर जाति धर्म क्षेत्र भाषा के लोग मदहोश भईल ।
असल मे बिस्मिल्लाह खाँ जी काशी विश्वनाथ मंदिर के शहनाई वादक रहनी , हिन्दी फिल्म ‘ गुंज उठी शहनाई ‘ स्वदेश ‘ आ सत्यजीत रे के बंगला फिल्म ‘जलसाघर’ मे भी उँहा के शहनाई के जादू से सुनेवाला मदहोश हो गइले ।
अतना नाव कमईला के बादो बिस्मिल्लाह खाँ अपना उपलब्धि से खुस ना रहले , ऊ कहसु कि ” अभी असली खांटी सुर लागले कहा बा , ओहि के त हम जोहत बानी , आ ओहि के पावे खाति हम शहनाई बजावत बानी , जहिये उ असली सुर लागि जाई त बुझि लेब कि हम बाबा बिश्वनाथ के शरण मे पहुंच गइल बानी ” ।
पता ना शहनाई के सुर उँहा के स्वर्गवासी भईला के बाद कंहवा ले ले के गइल बाकि उँहा के हमनी के दिल दिमाग मे बहुत गहिराह जगह बना ले ले बानी । उँहा के फकीराना अंदाज , खुलल निरभेद मुस्कान , शहनाई आ सुर से दिवानगी आवे वाला संगीत पीढी खाति हरमेसा मार्गदर्शन करी ।
ऑनलाइन हिन्दी न्यूज वेबपोर्टल ” दैनिक खोज खबर ” आ DKK मीडिया  परिवार एह महान भोजपुरिया के गंगा जमुनी संस्कृति परम्परा के अनमोल धरोहर , भारत रतन के लोर से भरल श्रधांजलि दे रहल बा ।


👉साभार : आखर

​♨एगो कवि ,अध्यापक , पत्रकार,  स्वतंत्रता सेनानी आ मातृभाषा प्रेमी मोती बी.ए. के 98वा जयंती पर DKK MEDIA  परिवार के ओर से बेर बेर नमन 

✍दैनिक खोज खबर सेन्ट्रल डेस्क 

🚫मोती बी.ए. ( मोतीलाल उपाध्याय )  एगो कवि ,अध्यापक , एगो पत्रकार,  स्वतंत्रता सेनानी आ मातृभाषा प्रेमी रहनी ।  आपन क्रांतिकारी कवितन के पाठ जब मंच से कइनी त बहूत मशहूर हो गइनी आ ओह घरी इँहा के बीए कइले रहनी , एहि से अपना नाव के मोती बी.ए क लेहनी । 
मोती बी.ए. जी जनम 1 अगस्त , 1919 में देवरिया जिला के बरेजी गांव में भइल रहे । नदिया के पार ( 1948 ) सिनेमा के गीतकार रहनी आ एह सिनेमा के 8 गो गीत लिखले रहनी ।  हिन्दी सिनेमा में भोजपुरी के बीआ डाले वाला गीतकार मोती बी.ए. जी रहनी ।  भोजपुरी भाषा साहित्य आ सिनेमा खातिर इँहा के आपन सबकुछ खपा देहनी ।  
आज इँहा के जनमदिन प इँहा के लिखल कुछ रचना कुछ गजल कुछ गीत – 
1- बेआन दू गो सखी के
बेआन पहिला सखी के – मोर पिया आदमखोर

सुनु सजनी

ठाढ़े अदिमी चबाय
बेआन दुसरा सखी के – मोर पिया जाँगर चोर

सुनु सजनी

देखते अदिमी लुकाय
पहिलकी – जिनिगी भइल सखी

साँपे के बीअरि

गोंहुवन जेइ में समाय

फट कढ़ले गोंहुवन फुफुकारे

जब जब बहेला बतास
दूसरीकी – जिनिगी हमार सखी

जस मुसकइलि

मूस राम रहे छितराय

खाली रे बिअरिया के

फूटल करमवा जे

एगो साँप आवे एगो जाय।
2- “अझुरा”

   
अझुराई

तबे नू सझुराई

अझुरइबे ना करी कुछू

त कवन चीज केहू सझुराई!

जवन चीज कबों अझुरइबे ना करी

आ हरदम सझुरइले रही

त ओकर अझुराइल-सझुराइल बराबरे ह

ओकरा खातिर-अझुरा सझुराह, सझुरा अझुरा

जेइसने अझुराइल

ओइसने सझुराइल
3- कवन गीत गाईं
कवन गीत गाईं, कवन धुन सुनाई, पंचन के बीच

शब्द उहे, अर्थ उहे, भाव का बताई पंचन के बीच।

कवन गीत गाईं…
कवन रस बरिसो जवन बरिसाई

संसति के कइसे हम सन्स्कृति बनाई

निराधार जीवन के आधार खोजीं

बे पहिया के गाड़ी कइसे चलाई, पंचन के बीच।

कवन गीत गाईं…
मेघ राग गवला से बरिसेला पानी

पानी ना बरसे त सूखत किसानी

गीतिन के भीतर से धूँआ उठतबा

इन्द्रदेव के कवने विधि से मनाई, पंचन के बीच।

कवन गीत गाईं…
धाने के गोफा में बालि बा सकाइल

दूध बिना ओकर बा होठवा झुराइल

लोरि ढरकवला से होखे के का बा

देखि देखि आपन करेजा ठेठाई, पंचन के बीच।

कवन गीत गाईं…
नवकी बेराइटी के नाया नाया बीया

अँखुवाइल खेते में धरती के धीया

आँखी में चमकत बा सोना के सपना

प्रकृति साथ ना दी त व्यर्थ कुलकमाई, पंचन के बीच।

कवन गीत गाईं…
पंथ ह सनातन, पुरातन से जोरल

घीव में चभोरल आ मिसिरी के घोरल

होई विकास लागी सरगे से सीढ़ी

बालू में नाव चली, सागर में धाई, पंचन बीच।

कवन गीत गाईं…
4- अगोरिया
नीमन दिन के अगेरिया में

सगरे दिन बाउर हो गइले सँ

जिनिगी हेवान हो गइल
रासि के रासि

जब पइया निकालि गइल

त लेडुली ओसवला से

का होई
जीयत बटले बाड़

त छपटात काहे बाड़

अगोरत बटले बाड़

त रोवत काहें बाड़
नइख सुनले मिल्टन के

जे चुपचाप अगोरिया में रहेला

उहो भगवान के

सच्चा भक्त ह।
5- केतना दुखाव
केतनो दुखाव दुखात नइखे

चढ़ि जब आवता त जात नइखे

कहवाँ ले जाई ई बुझात नइखे

जाने पर जाई त जनात नइखे
नंगा बाटे एतना लुकात नइखे

हीत ह कि मुदई चिन्हात नइखे

एइसन अझुराइल सझुरात नइखे

सोझ टेढ़ कुछू फरियात नइखे
जो ई उपराई त तराई नाहीं

कबो जो तराई उपराई नाहीं

कवनो तरे राखीं एके रही नाहीं

पूछबो जो करी कुछू कही नाहीं।
6- दुख – सुख
दुख जो ढील दे दी

लगाम घींचले ना रही

त सुख

आदिमी के गड़हा में ढकेलि दी
तनी समुझा द उनके

जे जवानी के बाढ़ पर बा

कहिद अपना के रोकें

ना त

पता ना लागी

पताले चलि जइहें

उनही के जवानी उनके ताना मारी

केतनो जोर लगइहें

गड़हा में से निकलि ना पइहें

जहें के तहें सरि जइहें
दुख के संघति जो कइले रहितें

त उनके ई गति ना होइत
जवानी उतराए खातिर ना

बढ़िआए खातिर ना

गढुआए खातिर ह!

जो ढेर उड़िहें त

उनके सक्तिए

उनके ले बीती।
7- ओके केहु का खोजी
हमार एगो बहुत बाउर लति ई ह

कि हम केहू के रचना में अपनाके

खोजे लागीलें
जे हमके हमरा से भेट करा दे

उहे नू हमार हीत ह

एइसन हीत काँहाँ मिली

इहे हमार समस्या ह

हम ओही के खोज तानी

जे भेटात नइखे

ओके खोजत-खोजत

हम खुदे बिला गइल बानी
इ कविता ना ह

ई हमार गति ह

जुग जमाना अपने रंग में बाटे

आ हम अपने रंग में
जे खुदे बिला गइल बा

ओके केहू का बिलवाई।
8-हमरे मन में
हमरे मन में दुका भइल बाटे

चोर कवनो लुका गइल बाटे
कुछ चोरइबो करी त का पाई

दर्द से दिल भरल पुरल बाटे
आँखि के लोरि गिर रहल ढर ढर

फूल कवनो कहीं झरल बाटे
सुधा ढरकि गइल त का बिगड़ल

हमके पीए के जब गरल बाटे
दर्द दिल के मिटे के जब नइखे

चोर झुठहू लगल – बझल बाटे
9-आस के एक दिया
आस के एक दिया जवने तरे जरत बाटे

दिल के हसरत सजी ओही तरे मरत बाटे
एगो खाहिस रहे त दिल में हम रोलीं गालीं

मजार पर मजार परत दर परत बाटे
अपने हाथे से दिया आके जो बुता देते

एगो हसरत इहे दिल में मरत जियत बाटे
दिल के मालूम बा ई साँप ह रसरी ना ह

जानतो बा तबो ओही के उ धरत बाटे
हमरे जियला में भा मुअला में जब फरक नइखे

मूँगि छाती पर का रहि रहि के ऊ दरत बाटे
10- जेतना सतावल चाहे
जेतना सतावल चाहे ओतना सताले

चाहे मुआदे हमके चाहे जिया दे
मारे के बटले बा त जवनेंगा मार

अन्हे हटा के चाहे लगे बोला के
मुवही के बाटे हमके तोहरे गली में

चाहे हँसा के मार चाहे रोआ के
परदा में छिप के चाहे सूरति देखा के

मार पियासन चाहे पानी पिया के
आपन घर बाटे लूटे के अपने

लूट जरा के दीया चाहे बुता के
11- मृग-तृष्णा 
नाचत बाटे घाम रे हिरन बा पियासा

जेठ के दुपहरी में रेत के बा आसा

रेतिया बतावे, दूर-नाहीं बाटे धारा

तनी अउरी दउर हिरना, पा जइब किनारा
पछुवा लुवाठी ले के चारों ओर धावे

रेतिया के भउरा बनल देहिया तपावे,

भीतर बा पियासि, ऊपर बरिसेला अंगारा। तनी….
फेड़ नाहीं, रुख नाहीं, नाहीं कहूँ छाया

कइसन पियासि विधिना काया में लगाया

रोंआ-रोंआ फूटे मुँह से फेंकेल गजारा। तनी….
खर्ह पतवार ले के मड़ईं छवावें

दुनिया के लोग दुपहरिया मनावें

मारल-मारल फीरे एगो जिउआ बेचारा। तनो….
तोहरो दरद दुनिया तनिको ना बूझे

कहेले गँवार तोहके झुठहूँ के जूझे

जवने में न बस कवनो ओ में कवन चारा। तनी….
दुनिया में केहू के ना मेहनति बेकार बा

जेही धाई, ऊहे पाई, एही के बाजार बा

छोड़ सबके कहल-सुनल आपन ल सहारा। तनी….
एक बेर फेरु से बेर बेर प्रनाम ।

👉साभार: आखर डाॅट काॅम 

✍DKK MEDIA द्वारा प्रसारित

​🔴भोजपुरिया संस्कृति , पांवरिया नाच आ धार्मिक सदभाव 

✍अतुल कुमार राय 

♨चित्र मे पाँवरिया प्रस्तुत करत सिसवां बाजार कुशीनगर के शबीर, शमसुद्दीन आ मुमताज

🚫अब एह  हालत में हमनी के बानी जा जहाँ समाज में धर्म,मजहब ,पंथ ,वाद के नाम पर मार काट ,आगजनी ,बलात्कार हो रहल बा । 
आदमी एक दूसरा के खून के प्यासा हो गइल बा।

लागत बा की जस जस शिक्षा आ टेक्नोलाजी बढत बा तस तस आदमी आदमी से दूर होत गइल बा। ना त आज से सौ साल पहिले सामाजिक समरसता ,सद्भाव के रसरी के गाँठ  बड़ी मजबूती से बन्हाइल रहे।

सब आ एक दूसरा के प्रति आतना नेह स्नेह प्रेम से भरल  रहे की ओकरे के गंगा जमुनी तहजीब कहल गइल…
एह तहजीब में कहीं महेश तजिया उठावस त कहीं मोहन नातिया कलाम गावस ,त निजामुद्दीन रामलीला में विभिषण बनस…..त ओने तजिया रखे खातिर रामदरस आपन दुवार खाली क देस।

त कहीं होली में फिरोज घूम घूम फगुवा गावस
लेकिन अफ़सोस की सियासत अपना फायदा खातिर ओकरा जड़ में जहर घोल दिहलस , की आज समाज के बंटा धार हो गइल बा ।

लोग एक दूसरा के देखल नइखे चाहत…..’इंसानियत’ शब्द त आई सी यू में पड़ी गइल बा।
बाकी हमनी के भोजपुरिया लोक संस्कृति में गंगा जमुनी तहजीब के एक से बढ़ी के एक उदाहरण रहल बा…जवन समरसता बढ़ावे के कम कइले बा..ओही में एगो नाव ह “पाँवरिया नाच”

पहिले जब केहू के घरे कवनो सन्तान के जन्म होखे त पाँवरिया लोग आवे आ दशरथ कोशिल्या भा देवकी बासुदेव के सम्वाद ,सोहर खेलौना  गावे ।घर भर आ गाँव खुस होके अपना सवख आ सारधा के अनुसार नेग देव।
एह में सबसे सुखद पहलू इ रहे की इ हिन्दू के पौराणिक सम्वाद गावे वाला आपन मुसलमान भाई लो रहे लो….उ लो जब झांझ मंजीरा आ एकतारा बजा के ‘ “कहंवा में राम जी जनम लिहले कहंवा बधाव बाजे हो ” गावे लो त लोग के करेजा जुड़ा जाव।
लेकिन कातना पछतावा होला इ सोच के की एह सुंदर लोक विधा के जगही अब लौंडा के फुहर नाच आ सोहर के जगही अश्लील भोजपुरी गीत ले लेले बाटे।
हमनी के लोकगीत संगीत बचा के खाली भोजपुरी के ही भला ना करम जा बल्कि एगो समाज में सकारात्मक संदेश भी देम जा।
इ सांस्कृतिक बीपत के समय में एकरा खातिर तनी कमर कसे के पड़ी….लाख सियासत जहर घोले हमनी के हिन्दू मुसलमान से पहिले इंसान होखला के नाते एक दूसरा से प्रेम करे के पड़ी।
समझे के पड़ी की जहाँ प्रेम बा ओइजे इश्वर अल्लाह वाहे गुरु आ गाड बाड़न…..ना त हालत दिन प दिन खराब होत जाई….आ कहीं दूर कबीर रसखान आ नजीर बनारसी ,बिस्मिलाह खान के आत्मा रोई…..
आईं एही बहाने आपना सब मुस्लिम भाई लो के ईद के बधाई दिहल जाउ ….. 

👉साभार : आखर डाॅट काॅम