​लोकमंथन :2018 के अंतिम दिन  के चर्चा सत्र को संबोधित करते हुए प्रख्यात लेखक व  चिंतक रंगा हरि ने कहां कि “भारत की आत्मा हिंदुत्व है”।


✍रांची, खेलगांव से नवीन सिंह परमार की रिपोर्ट 

💢रांची  ( 01 अक्टूबर ) लोकमंथन :2018 के अंतिम दिन रविवार 30 सितंबर को  अंतिम चर्चा सत्र आत्मावलोकन विषय पर पर आधारित था । इस सत्र की अध्यक्षता लोक संस्कृति के प्रसिद्ध अध्येता व भारत में यूनेस्को के विशेषज्ञ डॉक्टर कपिल तिवारी ने किया । इस सत्र को संबोधित करते हुए  केरल निवासी रंगा हरि संघ प्रचारक, लेखक, चिंतक तथा संघ के पूर्व अखिल भारतीय बौद्धिक प्रमुख व  मलयालम, तमिल, संस्कृत, मराठी, गुजराती, असामी, हिंदी व अंगरेजी सहित 11 भाषाअों के जानकार रंगा हरि ने कहा कि  गत सप्ताह अाधार कार्ड संबंधी सुप्रीम कोर्ट का बड़ा अच्छा फैसला आया है. हम 132 करोड़ भारतीय हैं। व्यक्तित्व के अाधार पर हम एक-दूसरे से अलग हैं। एक-दूसरे का अनुकरण संभव भी नहीं है।यह अंतर जन्मजात व ईश्वर निर्मित है। इसका प्रमाण है एक-एक व्यक्ति का आधार कार्ड।शोध के आधार पर वैज्ञानिकों ने आधार में समावेश के लिए दो चीजें तय की। एक अंगुलियों के निशान तथा दूसरा आंखें।इन्हीं का छाप आधार पर लिया जाता है।इस तरह आधार का रहस्य दृष्टि व कृति है। दोनों को मिला कर देखें, तो भारत का आधार भी इसी दृष्टि या दर्शन तथा कृति या संस्कृति पर अाधारित है। यह दूसरे राष्ट्रों से अलग है. समग्र दृष्टि से, साहित्य की दृष्टि से, अपनी कला व संस्कृति से। भारत दुनिया को अपनी इन्हीं ज्ञान, परंपरा व सांस्कृतिक धरोहर से समृद्ध करता रहा है। देते जाना ही हमारी नियति है। संक्षेप में इन्हीं बातों पर चिंतन आत्मवलोकन है।

 उन्होंने कहा कि वर्ष 1985 में जब राजीव गांधी प्रधानमंत्री बने, तो दुनिया के सामने एक अच्छा उदाहरण रखा। कहा कि भारत को जानने के लिए यहां का जीवन देखें। उन्होंने न्यूयॉर्क में भारत महोत्सव का आयोजन किया।

 यूरोपियन लोगों के लिए पेरिस में तथा कम्यूनिस्टों के लिए सोवियत संघ में यह आयोजन हुआ था। सोवियत संघ में हिमालय से लाया गया देवदार का पौधा लगाया गया। पौधारोपण कर इसे सींचने के लिए राजीव गांधी के साथ अन्य लोगों ने गंगाजल का उपयोग किया। कम्यूनिस्टों ने कहा कि यह सौभाग्य की बात है।

 उस आयोजन में सोवियत संघ के तत्कालीन राष्ट्रपति ने मंच पर पॉकेट से कागज निकाल कर रूसी लोगों ने अपने खास उच्चारण के साथ संस्कृत का एक श्लोक पढ़ा था।फिर कहा कि इसे भूल गये, तो दुनिया का नाश हो जायेगा।यह लोक मंथन भी राजीव गांधी के उसी आयोजन की तरह है।

 श्री रंगाहरि ने कहा कि सवाल यह है कि भारत की आत्मा क्या है? यह आत्मा सनातन धर्म है। वेदों के आधार पर यह राष्ट्र उभरा. कला, संस्कृति, राज्य व प्रशासन जैसे बहुआयामी जीवन का विकास हुआ। हम अपनी आत्मा में धर्म की अभिव्यक्ति देखते हैं।श्री अरविंद, विवेकानंद, गुरु गोलवरकर ने इसी आत्मा की पुन: खोज   की। तो भारत की असली आत्मा हिंदुत्व है।कुछ लोग इससे चिढ़ जाते हैं. कहते हैं कि बार-बार आप हिंदुत्व क्यों कहते हैं।

 उनके कहने में दोष नहीं है। पर कहने के भाव में दोष है। किसी राष्ट्र की संस्कृति अंततोगत्वा वहां के मानव व समाज की देन है। भूगोल भारत है। वहीं इसकी संस्कृति हिंदू के कारण है। तो हिंदुत्व की विशेषता इसकी दृष्टि व कृति क्या है, जिससे दुनिया के आधार कार्ड से अलग इसका अाधार हो जाये।

{ इनपुट – परमार डाॅट काॅम : सीवान, बिहार }

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