​रांची में चल रहे लोकमंथन:2018 के तीसरे दिन केंद्रीय मंत्री ने व्ववस्थावलोकन विषय पर दिया व्याख्यान 

👉रांची के खेल गांव में भारत के जन-गण-मन पर केंद्रित चल रहे लोकमंथन :2018 के तीसरे दिन व्ववस्थावलोकन विषय पर दो सत्रों में  गहन विचार-विमर्श हुआ। इस महत्वपूर्ण विषय के प्रथम सत्र की अध्यक्षता प्रसिद्ध सामाजिक कार्यकर्ता व विकास भारती बिशुनपुर के सचिव अशोक भगत ने किया । वही परिचर्चा में केंद्रीय राज्य मंत्री जयंत सिन्हा व प्रसिद्ध समाज शास्त्री डाक्टर माधवराव चितले ने अपना विचार रखा।👈
✍रांची के खेलगांव से नवीन सिंह परमार की रिपोर्ट 


💢रांची  ( 29 सितंबर ) रांची के खेलगांव में लोकमंथन 2018 के तृतीय दिवस  में व्यवस्थावलोकन विषय पर दो सत्रों में परिचर्चा आयोजित किया गया । प्रथम सत्र की अध्यक्षता प्रसिद्ध सामाजिक कार्यकर्ता व विकास भारती के संस्थापक सचिव पद्म श्री अशोक भगत ने किया । वही परिचर्चा को संबोधित करते हुए भारत के नागरिक उड्डयन राज्य मंत्री श्री जयंत सिन्हा ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि मुझे हैरानी होती है, आश्चर्य होता है कि हमारे प्रशासनिक पदाधिकारियों को समझ नहीं है, क्षमता नहीं है कि हर सेकंड, हर मिनट, हर घंटा, हर दिन किसी उद्योगपति के लिए बहुत मूल्यवान होता है। आप निर्णय लेने में जितना विलंब करिएगा उतना घाटा उद्योगपति को और निजी क्षेत्र को होगा।


उन्होंने कहा कि देश का हर उद्योगपति पैसे के आधार पर चलता है ब्याज की एक दर है। अगर आपने जाकर बहुत बड़ा उद्योग खड़ा किया है, उद्योग में हजार करोड़ आपने कर्ज लिया है तो हर दिन वो जो कर्ज है, बढ़ता चला जाता है। जब निर्णय नहीं लिया जाता है तो  उद्योगपतियों का व्यापार दिन प्रतिदिन घाटे में चलता चला जाता है। समय की कीमत है। इतना तो समझ लीजिए। अगर आप किसी को उसका जो वेतन है, भुगतान है समय पर नहीं देंगे तो उसका व्यापार कैसे चलेगा? फिर आप दिवालियापन में आ जाइएगा और ऐसा होने पर लोगों का रोजगार चला जाएगा। अगर हमारी व्यवस्था में जवाबदेही नहीं है तो उपलब्धि नहीं मिल पाएगी। 

श्री  सिंहा ने बताया कि रामगढ़ और हजारीबाग में स्कोर कार्ड की परंपरा शुरू की गई है जो जिला सर से लेकर प्रखंड स्तर तक लागू है। इसके माध्यम से प्रशासनिक कार्यों का  मूल्यांकन और उसके उपरांत सुधार की संभावनाओं को तलाशने का प्रयास किया जाता है जिससे प्रशासनिक कार्यकुशलता में वृद्धि हुई है।


वही अपने  अध्यक्षीय उद्बोधन देते हुए विकास भारती के संस्थापक सचिव पद्म श्री अशोक भगत जी ने कहा कि यहां जनता के नाम पर जनता को लोग बेवकूफ बनाते fcहैं। मैं झारखंड में काम करने आया, गांवों में जाता था, लोगों को समझाता था लोग स्वागत भी करते थे। इससे पादरी डरकर घबराया और उसने लोगों को मना किया कि इनका बात मत सुनो। मैंने जाकर कारण पूछा तो उसने कहा कि आप को मैं जानता नहीं, आप बाहर के हो।एक बार 6 महीने की हड़ताल थी और 6 महीने कोई सरकारी विद्यालय कोई सरकारी दफ्तर कोई अस्पताल नहीं चला और आश्चर्य होगा आपको कि जब मैंने गांवों में हड़ताल के बारे में पूछा तो उन्होंने बताया कि वह नहीं जानते हड़ताल है या नहीं,  सरकारी कर्मचारियों से हमारा कोई मतलब नहीं है। तब मैंने नारा दिया-”कोर्ट कचहरी थाना पुलिस का बहिष्कार करो, गांव का शासन गांव में करो।” आप जानते हैं यह कहना बड़ा कठिन था। अगर मैं राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का स्वयंसेवक नहीं होता तो मुझे उग्रवादी कहकर जेल में डाल दिया गया होता।अगर हम यह सोचते हैं कि सब कुछ सरकार ने कर देगी तो यह संभव नहीं है। एक नारा है- “लोकसभा ना विधानसभा, सबसे ऊंची ग्राम सभा।” कुछ लोगों ने इसका दुरुपयोग कर के पत्थलगड़ी जैसे प्रयोग किए।


{ इनपुट – परमार डाॅट काॅम : सीवान )

Advertisements

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out /  Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  Change )

Connecting to %s