​”राष्ट्र प्रथम” की अवधारणा से जुड़े बुद्धिजीवियों का महाकुंभ है लोक मंथन : 2018

 🔴राष्ट्रीय विचार प्रक्रिया को पुनर्स्थापित करने के लिए  गुरुवार से रांची के  खेलगांव में चार दिनों तक मंथन होगा। भारतीय मानस को समझने के लिए देश-विदेश के बुद्धिजीवी रांची आ रहे हैं। उक्त जानकारी  लोकमंथन के सह संयोजक डॉ. मयंक रंजन ने दी । वही लोकमंथन की केंद्रीय टोली के सदस्य दीपक शर्मा ने बताया कि रांची के खेलगांव में होनेवाले चार दिवसीय बौद्धिक मेले, लोकमंथन – 2018 के आयोजन में गुरुवार शाम चार बजे उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू इस कार्यक्रम का उद्घाटन करेंगे, जबकि लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन 30 सितंबर को होनेवाले समापन समारोह की मुख्य अतिथि होंगी। कार्यक्रम के बारे में बताते हुए लोकमंथन  के आयोजकों ने  सूचना भवन में आयोजित प्रेस वार्ता में कहा कि राष्ट्र प्रथम की अवधारणा से जुड़े बुद्धिजीवी इस कार्यक्रम में शामिल होंगे। उन्होंने बताया कि लोकमंथन- 2018 की केंद्रीय विषय वस्तु ‘भारत बोध : जन-गण-मन’ है। भारत का विचार क्या है? राष्ट्र और समाज की हमारी अवधारणा क्या है? भारत का मानस क्या था, क्या है, क्या होना है और किस दिशा में इसे जाना चाहिए, इन सब विषयों पर चर्चा होगी। इसके साथ ही राजनीतिक, आर्थिक, स्थानीय प्रशासनिक मॉडल, जिन पर हम अभी चल रहे हैं या जिन पर हमें चलना चाहिए, इस पर भी चर्चा होगी।

उन्होंने कहा कि इस बौद्धिक महायज्ञ में समाजावलोकन, विश्वावलोकन, व्यवस्था अवलोकन, अर्थावलोकन और आत्मावलोकन पर चर्चा होगी। गौरतलब है कि भोपाल में प्रथम लोकमंथन का आयोजन हुआ था। रांची में यह दूसरा आयोजन है। 

 ====================================👉लोक मंथन -2018 का दैनंदिनी 👈

💢पहला दिन : 27 सितंबर उद्घाटन समारोह : उद्घाटन भाषण – उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू, अध्यक्षीय उद्बोधन – मुख्यमंत्री रघुवर दास, पुस्तक लोकार्पण – राज्यपाल – द्रौपदी मुर्मू, प्रस्तावना – प्रज्ञा प्रवाह के अखिल भारतीय संयोजक जे. नंदकुमार, स्वागत भाषण – कुलपति केंद्रीय विवि नंदकुमार यादव इंदू और आभार व्यक्त – कला संस्कृति मंत्री अमर कुमार बाउरी।
 💢सायंकालीन कार्यक्रम – लोकमंथन बीज प्रस्ताव : वक्ता – हृदय नारायण दीक्षित, धर्मपाल, रामेश्वर मिश्र पंकज, रवींद्र गुरु, आशीष कुमार गुप्ता, अमृतलाल वेगड़ और प्रशांत पोल।

💢 सांस्कृतिक कार्यक्रम – डॉ. संजय द्विवेदी के निर्देशन में संगीत संस्कृति
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 🔴दूसरा दिन : 28 सितंबर :

💢 प्रथम सत्र : समाजावलोकन : अध्यक्षता – स्वामी नरसिम्हानंद, मुख्य वक्ता – डाॅ. वंदना शिवा। संवाद – अर्जुन मुंडा, राकेश मिश्र, डॉ. कौशल पंवार और गिरीश प्रभुणे। सत्र संचालन – उमेश उपाध्याय। 
💢 द्वितीय सत्र : विश्वावलोकन : विश्व की दृष्टि में भारत : अध्यक्षता – प्रो. मीनाक्षी जैन, मुख्य वक्ता – आचार्य डेविड फ्रॉले, 
👉भारत की दृष्टि में विश्व : अध्यक्षता – सोनल मानसिंह, मुख्य वक्ता – डॉ. अनिर्बान गांगुली, 
💢 सायंकालीन सांस्कृतिक प्रस्तुति – नृत्य नाटिका और वंदे मातरम् 

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🔴तीसरा दिन : 29 सितंबर :

💢 प्रथम सत्र : व्यवस्थावलोकन : अध्यक्षता – अशोक भगत, वक्ता – जयंत सिन्हा और माधव राव चिंतले। संवाद – डॉ. विनय सहस्रबुद्धे, मनोज श्रीवास्तव, संपतिया उड़के और जेपी नारायण, सत्र संचालन – प्रफुल्ल केतकर। 
💢द्वितीय सत्र : अर्थावलोकन : अध्यक्षता : तुलसी तावरी, वक्ता प्रो. कनगसभापथी।

संवाद – डॉ. बजरंग लाल गुप्ता और डॉ. विनायक गोविलकर, सत्र संचालन – आलोक पुराणिक,
💢 सायंकालीन सांस्कृतिक प्रस्तुति-गौरी प्रिया और हर्षित जैन के निर्देशन में क्रमश: नाद लोक नृत्य, कुंभ मेला फिल्म।

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 🔴चौथा दिन : 30 सितंबर : 

💢प्रथम सत्र : आत्मावलोकन : अध्यक्षता – डॉ. कपिल तिवारी और वक्ता रंगा हरि 
 💢समापन समारोह : मुख्य अतिथि – लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन, अध्यक्षता – मुख्यमंत्री रघुवर दास, अतिथि – कला- संस्कृति मंत्री अमर कुमार बाउरी, स्वागत भाषण – मेयर आशा लकड़ा, वृत निवेदन – राजीव  कमल बिट्टू और आभार – कला- संस्कृति सचिव मनीष रंजन।

[ ✍इनपुट : परमार डाॅट काॅम – सीवान ]

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