बेतिया : हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश ने किया नवनिर्मित ए.डी.आर.भवन का उद्घाटन

दुर्गा दत्त पाठक की रिपोर्ट:-

पश्चिम चंपारण जिला मुख्यालय बेतिया व्यावहार न्यायालय परिसर में आयोजित एक सादे समारोह में नवनिर्मित ए.डी.आर. भवन का फीता काटकर उद्घाटन पटना उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश एम. आर. शाह ने किया। यह भवन विधिक सेवा सदन के नाम से भी जाना जायेगा। इस अवसर पर उनके साथ पटना उच्च न्यायालय के वरीय न्यायाधीश-सह-कार्यकारी अध्यक्ष डॉ..रविरंजन, न्यायाधीश दिनेश सिंह, न्यायाधीश अश्विनी कुमार सिंह, न्यायाधीश एहसानुद्दीन अमानुल्लाह, न्यायाधीश-सह-निरीक्षी जज, पश्चिम चम्पारण चक्रधारी शरण सिंह, रजिस्ट्रार जनरल, जिला एवं सत्र न्यायाधीश अभिमन्यु लाल श्रीवास्तव, जिला पदाधिकारी डॉ.निलेश रामचंद्र देवरे, पुलिस अधीक्षक, बेतिया जयंत कांत, व्यवहार न्यायालय, बेतिया के सभी न्यायिक दंडाधिकारी, विधिक संघ के अध्यक्ष, अधिवक्ता, अधिकारी एवं अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। व्यवहार न्यायालय परिसर में आयोजित सभा की अध्यक्षता करते हुए मुख्य न्यायाधीश ने अधिवक्ताओं का आह्वान किया कि वे लोग ए.डी.आर. प्रणाली को सफल बनाने में अपना महत्वूपर्ण योगदान दें। उन्होंने कहा कि वैकल्पिक विवाद निवारण (ए.डी.आर.) प्रणाली से दो पक्षों के विवादों को बिना किसी बड़े खर्च एवं कम से कम समय में निपटारा किया जा सकता है। इस प्रणाली से विवादों का स्थायी समाधान होता है और इसमें किसी को हारने अथवा जीतने का घुटन अथवा अहम नहीं होता है। यह तकनीक विशिष्ट रूप से आपसी समझौते पर निर्भर करेगी। इसमें दोनों पक्ष खुशी-खुशी निर्णय को स्वीकार कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि इसके लिए सभी अधिवक्ताओं को महत्वपूर्ण योगदान देना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि देश व राज्य के सभी न्यायालयों में हजारों मुकदमों की लंबी फेहरिस्त है। इसके चलते कार्ट केसों का निपटारा (डिस्पोजल) होने में काफी समय लग जाता है। मुख्य न्यायाधीश ने स्वीकार किया कि लंबित मुकदमों की बढ़ती संख्या के चलते लोगों को सहज एवं त्वरित न्याय नहीं मिल पा रहा है। ऐसे में ए.डी.आर. तकनीक एक वरदान के रूप में साबित होगा। उन्होंने कहा कि महात्मा गाँधी की कर्मभूमि चंपारण से ही इसकी शुरूआत करने का हमें सौभाग्य प्राप्त हो रहा है। मुख्य न्याधीश जो स्वयं गुजरात के रहने वाले हैं ने कहा कि वे चंपारण की इस धरती पर आकर अपने को सौभाग्यशाली महसूस कर रहे हैं, जिस धरती पर 101 वर्ष पूर्व महात्मा गाँधी ने सत्याग्रह आंदोलन प्रारंभ किया था। मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि ए.डी.आर. प्रणाली गुजराज राज्य में काफी सफल है। उन्होंने कहा कि जिस भी किसी वाद में सुलह की थोड़ी भी संभावना हो उन वादों को ए.डी.आर. में रेफर करें। अधिवक्तागण का सामाजिक दायित्व है कि वे इस सरल न्यायिक प्रक्रिया के माध्यम के प्रति लोगों को प्रेरित करें। उन्होंने कहा कि नासमझी अथवा बहकावे में आकर लोग लंबी कानूनी पचड़े में पड़ जाते हैं और अपने जीवन का बहुमूल्य समय कोर्ट के चक्कर लगाने में व्यतीत कर देते हैं। इस समय को वे कोई सामाजिक सरोकार व सकारात्मक कार्य में लगा सकते थे जो कि नाहक ही व्यर्थ हो जाता हे। उन्होंने घोषणा किया कि बेतिया में शीघ्र ही पीओसीएसओ (पाॅक्सोे) कोर्ट की स्थापना की जायेगी। इस अवसर पर उपस्थित अन्य सभी न्यायाधीश अपने-अपने विचार रखें। डॉ. रंजन ने कहा कि ए.डी.आर. अद्भूत न्यायिक प्रणाली है और अगर यह सफल होता है तो यह एक क्रांति से कम नहीं होगा। डॉ. रविरंजन ने चंपारण की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि का हवाला देते हुए कहा कि चंपारण की धरती पर सही प्रेरणा पाकर एक रत्नाकार डाकू, महान ब्रम्हषि वाल्मीकि बन जाते हैं और इसी धरती पर महाकाव्य रामायण की रचना करते हैं। इसी चम्पारण के जंगलों में ही माता जानकी निर्वासी जीवन जीती है और इसी धरती में अंततः समा जाती है। माननीय न्यायाधीश, डॉ.रंजन ने कहा कि ए.डी.आर. भवन का ज्यादा से ज्यादा उपयोग करें। यह अत्यंत सस्ती एवं सरल न्याय प्रक्रिया है। इस प्रणाली को ज्यादा से ज्यादा प्रचारित-प्रसारित करने की जरूरत पर भी बल दिया गया। न्यायाधीश दिनेश सिंह ने कहा कि सभी न्यायालयों में लंबित मुकदमों की संख्या में उतरोत्तर वृद्धि हो रही है जिसमें से 80 प्रतिशत मुकदमे अपराधिक है और 20 प्रतिशत मुकदमें दीवानी है। उन्होंने कहा कि इसमें से 40 प्रतिशत मुकदमें घरेलू विवादों से संबंधित होते है जिसको अगर ए.डी.आर. में लाया जाय तो इसका समाधान हो सकता है। ए.डी.आर. में कम समय में मुकदमों का स्थायी निवारण होता है। न्यायाधीश अश्विनी सिंह ने भी कहा कि ए.डी.आर. तकनीक से मुकदमों का निवारण आसान होगा। दोनों पक्ष खुशी-खुशी अपने-अपने घर जायेंगे और समाज में कटुता में कमी आयेगी। न्यायाधीश, अमानुल्लाह ने कहा कि कुछ समय पहले उन्होंने ही ए.डी.आर. भवन की नींव रखी थी और आज इसके उद्घाटन समारोह में भाग लेकर बड़ा अच्छा महसूस हो रहा है। उन्होंने कहा कि ए.डी.आर. न्यायिक प्रक्रिया में दोनों पक्ष जीतते है। इस कारण समाज में तनाव एवं कटुता में कमी आयेगी और आमलोग सकारात्मक कार्यों में अपनी उर्जा को लगायेंगे। न्यायाधीश चक्रधारी शरण सिंह जो पश्चिम चम्पारण के निरीक्षी न्यायाधीश भी है ने कहा कि ए.डी.आर. प्रणाली एक अत्यंत क्रांतिकारी पहल है। ए.डी.आर. तकनीक में मेडिएशन, काॅनसिलिएशन एवं आरबिट्रेशन जैसे सभी आयामों को अपनाया जाता है। उन्होंने कहा कि बेतिया का निरीक्षी जज होने के नाते वे यहां पाॅक्सो कोर्ट का शीघ्र स्थापना करने का प्रयास करेंगे। जिला एवं सत्र न्यायाधीश अभिमन्यु लाल श्रीवास्तव ने सभी अतिथियों का स्वागत किया गया। संत तरेसा बालिका स्कूल की छात्राओं ने स्वागत गान एवं राष्ट्रीय गान प्रस्तुत किया गया। जिला पदाधिकारी डॉ.निलेश रामचंद्र देवरे ने सभी आगत अतिथियों का बेतिया कार्यक्रम में भाग लेने के लिए धन्यवाद ज्ञापन किया । जबकि आयोजित सभा का संचालन अधिवक्ता, रमेश चन्द्र पाठक ने किया।

Advertisements

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out /  Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  Change )

Connecting to %s