बेतिया:– बाढ़ आने के पूर्व इसके क्षति से बचने के लिये तैयारी जायजा की समीक्षातमक बैठक का आयोजन

बेतिया:– बाढ़ आने के पूर्व इसके क्षति से बचने के लिये तैयारी जायजा की समीक्षातमक बैठक का आयोजन

न्यूज इनपुट विजय कुमार शर्मा प.च बिहार:–

बाढ़ आने के पहले जिलों के बाढ़ ग्रस्त क्षेत्रों में बाढ़ से बचाव करने के लिए तथा महामारी रोग से फैलाने से बचने के लिए तथा कटाव के माध्यम से होने वाले नुकसान का जायजा लेने के लिए एक तैयारी समिति की समीक्षात्मक बैठक की गई है जिसमें सिविल सर्जन तथा इनके कर्मियों ने महामारी से बचने के लिए एवं रोगियों पर नियंत्रण करने के लिए कई प्रकार की दवाइयों का इस्तेमाल करना पड़ता है जिसकी आवश्यकता बाढ़ आने के पूर्व एवं इसके बाद की होने वाले नुकसानों पर और बस्तियों में फैलने वाली बीमारियों की रोकथाम करने के लिए पूर्व से ही दवा का स्टॉक करना नितांत आवश्यक हो जाता है बाढ़ से तबाही होने के बाद बाढ़ के पानी निकल जाने के बाद कई प्रकार के रोग जनित बीमारियां फैल जाती हैं जिस को नियंत्रण करना बड़ी मुश्किल हो जाती है। तैयारी बैठक की समीक्षात्मक जायजा लेते हुए सिविल सर्जन ने कहा कि दवाइयों की कमी होने के कारण इस की आपूर्ति करने हेतु इसकी सूची बनाकर स्वास्थ्य समिति एवं जिला पदाधिकारी को उपलब्ध कराने का आदेश दिया है। सिविल सर्जन ने आगे बताया कि इस आपदा की घड़ी में ममता आशा कार्यकर्ताओं की जिम्मेदारी बढ़ जाती है और इन्हीं के जिम्मे दवा वितरण महिलाओं की देख रेख तथा बच्चों की समय पर टीका लगाना है सुई देने का काम इन्हीं के जिम्मे कर दिया जाता है इनके साथ स्वास्थ्य कर्मियों को भी लगाया जाता है। उन्होंने आगे बताया कि सभी स्वास्थ्य केंद्रों प्रखंड पंचायत स्तर के कर्मियों को इस विपदा की घड़ी में काम करने की प्रशिक्षण भी दिया जाता है ताकि समय पड़ने पर सुचारू रूप से काम कर सके। इस समीक्षात्मक बैठक में ड आई ओ, डॉक्टर किरण शंकर झा एसीएमओ अरुण कुमार सिन्हा, जिला स्वास्थ्य समिति के बीपीएम सलीम जावेद आशा डीपीएम राजेश कुमार डॉ आर एस मुन्ना राजेंद्र कुमार रामाशीष बैठा राजकुमार इत्यादि पदाधिकारी एवं स्वास्थ्य कर्मी तथा आशा कार्यकर्ता में ममता कार्यकर्ता भी उपस्थित थे। जिला में कई बाढ ग्रस्त क्षेत्र हैं जहां बाढ़ का पानी प्रतिवर्ष आ जाता है जिसके कारण भीषण क्षति होती है और कई जाने और जानवर डूब कर मर जाते हैं तथा सामानों की बर्बाद भी चरम सीमा पर रहती है ऐसी स्थिति में बाढ़ पूर्व इसकी जानकारी देना तथा लोगों को जागृत करने का एक प्रशिक्षण प्रोग्राम भी चलाया जाना चाहिए ताग के विपदा की घड़ी में आमजन अपनी बचाव कर सकें।

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