जेईई-मेन : प्रगति क्लासेज के छात्रों ने लहराया परचम 17 ने मारी बाजी

अधिकांश छात्र ग्रामीण क्षेत्रों से, बताया सफलता का मुल मंत्र

कोटा,दिल्ली,पटना जैसे पढ़ाई दे प्रगति क्लासेज ने दिखाया दमखम

सहरसा से ब्रजेश भारती की एक्सक्लूसिव रिपोर्ट :-

मेडिकल और इंजीनियरिंग में सफलता के लिए देश के बड़े शहरों की ओर रूख करने की अब जरूरत नहीं है। कम खर्च और सिमीत संसाधन में भी इन शहरों जैसी पढ़ाई कर मेडिकल और इंजीनियरिंग परीक्षा में सफलता प्राप्त कर सकते हैं।

इस बात को आज साबित कर दिया है सहरसा जिले के रिफ्यूजी कालोनी स्थित प्रगति क्लासेज ने, 42 छात्रों में से 17 छात्रों ने JEE Main 2018 में सफलता प्राप्त किया है।

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान-संयुक्त प्रवेश परीक्षा (मेन) यानी JEE Main 2018 के नतीजों की घोषणा के साथ जब यहां के छात्रों ने रिजल्ट देखा तो खुशी के मारे फुले नहीं समां रहे हैं। क्यों कि सफलता प्राप्त अधिकांश छात्र वैसे ग्रामीण क्षेत्रों से है जो आज के समय बड़े शहरों की मंहगी शिक्षा वहां जाकर नहीं ले सकता था।

सफल छात्रों से जब सफलता का मुल मंत्र जानना चाहा तो सभी ने तपाक से बताया हम चाह कर भी बड़े शहर नहीं जा सकते थे ऐसे में हमने प्रगति क्लासेज ज्वाइन किया। पुरी प्रगति टीम के द्वारा दिया गया सही मार्गदर्शन के कारण ही आज हम लोगों को सफलता मिली।

छात्र कौशल ने बताया बायोलॉजी मेन पेपर होते हुए भी जेईई मेन्स में सफलता प्राप्त की। वह बोला हमको तथा पुरी टीम को उम्मीद है कि मेडिकल के रिजल्ट में भी सफलता मिलेगी।

एक अन्य सफल छात्रा कुमारी सिमरन बोलती है प्रगति क्लासेज के सभी शिक्षक तन मन से हम लोगों को पढ़ाते थे, और जो डाउट क्लास की सुविधा एवं निरंतर टेस्ट होते रहने से सफलता मिली।सफलता का श्रेय प्रगति के सभी गुरुजनों के साथ अपने माता पिता को भी दिया, साथ ही प्रगति क्लास के संस्थापक नंदन कुमार का भी अभार व्यक्त की,कि प्रगति क्लासेज जैसे संस्थान सहरसा को दिया।

किसान पुत्र विमलेश कुमार दसवीं की परीक्षा के बाद आगे की पढ़ाई के लिए चिंतित व परेशान था चुंकि पिता सुरेन्द्र यादव का स्वास्थ्य हमेशा खराब चल रहा था ऐसे में बड़े शहरों जा पढ़ाई संभव नहीं था वह प्रगति क्लासेज को चुन सफल बन गया।

प्रगति क्लासेज के संस्थापक नंदन कुमार ने इस सफलता का श्रेय अपनी सभी शिक्षकगण के साथ बच्चों के द्वारा किया गया कठीन परिश्रम को दिया। उन्होंने कहा कि कोशी क्षेेत्र के बच्चों को कोटा एवं पटना की कमी महसुस नहीं होने नहीं देंगे, आगे और भी बेहतर करने का प्रयास कर रहें हैं, इसका जिता जागता सबुत है कि प्रत्येक वर्ष सफलता का क्रम बढ़ता जा रहा है।

वही साथ संस्थान के निदेशक डाॅ. चंदन कुमार ने कहा की संस्था के बेहतर रिजल्ट से अब कोशी क्षेत्र के बच्चो के बीच एक उम्मीद कि किरण जगी है। और हमे विश्वास है की हमे अपने टीम के कठिन परिश्रम के बदौलत आने वाले समय में और बेहतर रिजल्ट दे सकेंगे और यहां के बच्चों का पलायन को रोक कर आर्थिक और मानसिक परेशानीयों से बचा सकेंगे।

बच्चों के सफलता से संस्थान के शिक्षक डाॅ. विरेन्द्र कुमार, ई. विजय भूषण, ई. आशिष सुरा, ई. आनंद कुमार, ई. रणवीर यादव, ई. प्रत्येन्द्रशाक्या, ई. रुपेश रंजन, ई. सुरज सिंह, ई. रविशंकर उपाध्याय, ई. उपेन्द्र यादव ने हर्ष व्यक्त करते हुए आगे और मेहनत करके बेहतर रिजल्ट देने का संकल्प लिया।

उपरोक्त परीक्षा का आयोजन देश के 112 शहरों में 1621 परीक्षा केंद्रों पर की गई थी। इस परीक्षा में 646814 पुरुष, 266745 महिला और 3 ट्रांसजेंडर उम्मीदवारों ने भाग लिया था।

यहां बताते चलें कि रिजल्ट जारी होने के बाद अगले महीने से एडवांस के लिए रजिस्ट्रेशन भी शुरू हो जाएंगे। गौरतलब है कि जेईई मेन परीक्षा का आयोजन सीबीएसई की ओर से किया जाता है, जबकि जेईई एडवांस परीक्षा का आयोजन आईआईटी की ओर से किया जाता है और इसके रिजल्ट के आधार पर उम्मीदवारों को कॉलेज में एडमिशन मिलता है।

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