बेतिया – बगहा:– मुकामी पुलिस इस हत्याकाण्ड का पर्दाफाश करेगी अथवा कुख्यात असलहा तस्कर ग्रुप के इशारे पर मिट्टी डाल देगी

बेतिया – बगहा:– मुकामी पुलिस इस हत्याकाण्ड का पर्दाफाश करेगी अथवा कुख्यात असलहा तस्कर ग्रुप के इशारे पर मिट्टी डाल देगी
न्यूज़ इनपुट विजय कुमार शर्मा बगहा पश्चिमी चंपारण बिहार :– ​भारत-नेपाल की अन्तराष्ट्रीय सीमा पर बिहार राज्य में स्थित गण्डक बराज पर मंगलवार की रात हुई हत्या का मामला एक पहेली बना हुआ है। इस मामले में कई कयास लगाये जा रहे है। मगर प्रथम दृष्टया पूरा प्रकरण चाइनीज पिस्टल तस्करी गु्रप से जुड़ा लग रहा है। गौरतलब है कि मृतक बीरबल थापा उम्र 35 वर्ष पुत्र सुईले बहादूर थापा, ग्राम थाढ़ी, कैलाशपुर, हवाई अड्डा, थाना वाल्मीकिनगर, जिला पश्चिमी चम्पारण, बिहार का मूल निवासी बताया जाता है। जो मूलरूप से नेपाली है। वह पेशे से दिहाड़ी मजदूरी का काम करता था। जो घटना के समय नेपाल से शराब पीकर वापस लौट रहा था। अब सवाल उठता है कि मुकामी पुलिस इस हत्याकाण्ड का पर्दाफाश करेगी अथवा कुख्यात असलहा तस्कर ग्रुप के इशारे पर मिट्टी डाल देगी। यह आने वाला समय ही बतायेग
घटना बीते 21 नवम्बर 2017 दिन मंगलवार की रात करीब आठ बजे की है। इस बाबत पूछने पर मृतक के परिजनों ने बताया कि उसका किसी से भी कोई अदावत वगैरह नही था और ना किसी से उधार-बाड़ी की ही तकरात थी। एैसी स्थित में उसकी हत्या हो जाना हैरानी का सबब बना हुआ है। वह भी उस जगह जहाॅ दो देशों की सेना चैबीसों घण्टे मुश्तैद रहती हो।
बताते चले कि भारत-नेपाल की अन्तराष्ट्रीय सीमा पर गण्डक नदी के उपर नौ सौ मीटर का एक पुल का निर्माण हुआ है। जो गण्डक बराज के नाम से प्रसिद्ध है। इसमें कुल छत्तीस फाटक लगे हुये है। इसके अठ्ठारह फाटक नेपाल सीमा में पड़ते है और अठ्ठारह फाटक भारत सीमा क्षेत्र में पड़ते है। इन छत्तीसों फाटको की क्रम संख्या भारत क्षेत्र से शुरू होकर नेपाल क्षेत्र में समाप्त होती है। इस तरह से देखा जाये तो एक से लगायत अठ्ठारह नम्बर तक का फाटक भारतीय सीमा क्षेत्र में पड़ते है।
गण्डक पुल के एक नम्बर फाटक पर भारतीय क्षेत्र में एसएसबी रहती है और नेपाली क्षेत्र में पड़ने वाले छत्तीस नम्बर फाटक पर नेपाल की एपीएफ तथा नेपाली प्रहरी के जवान चैबीसों घण्टे मुश्तैद रहते है। उक्त बराज पुल पर आवागमन सुबह छः बजे से लेकर रात आठ बजे तक खुला रहता है।
घटना रात के आठ बजे के आसपास बतायी जाती है वह भी भारतीय क्षेत्र में पड़ने वाले फाटक नम्बर सोलह के पुल के उपर। सनद रहे कि भारतीय सीमा क्षेत्र में तैनात एसएसबी के चेकपोस्ट पर हर दो पहिया और चार पहिया वाहन चालकांे का नाम व नम्बर दर्ज किया जाता है। जबकि पैदल और साइकिल सवारों को वैसे ही चेक करके जाने दिया जाता है।
इसके इतर नेपाल सीमा क्षेत्र में पड़ने वाले चेकपोस्ट पर दोनों देशों के स्थानीय नागरिकों को थोड़ी सहूलियत दी जाती है। उन्हे बता कर आने-जाने की छूट दी जाती है। लेकिन दूर-दराज के लोगों को वह चाहे भारतीय हो अथवा पहाड़ी-नेपाली उनको नाम-पता बकायदा दर्ज करके ही आने-जाने दिया जाता है। अब सवाल यह उठता है कि इतनी कड़ी चैकस जगह के बीच यदि कोई किसी की हत्या कर फरार हो सकता है तो जाहिर है कि वह कोई शातिर अपराधी ही होगा।

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