बिहार में प्रताड़ित हो रहे पत्रकार,चुप क्यों हैं नितीश सरकार

​बीडी सिंह”दैनिक खोज खबर”पटना

 बीते कुछ महीनों में देश के अलग-अलग जगहों से न केवल पत्रकारों पर जानलेवा हमले के मामले बढ़े हैं, बल्कि पत्रकारों को मिल रही धमकियों के मामले भी सामने आ रहे हैं।बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार कई राज्यों का दौरा कर बिहार में अपराध कम होने का दावा करते रहे हैं. दूसरी ओर पिछले एक साल के दौरान सूबे में कई पत्रकारों की हत्याएं उनके इस दावे पर सवालिया निशान लगाती दिख रही हैं।

डा.शशिधर मेहता

उक्त बातें नेशनल जर्नलिस्ट एसोसियन के संरक्षक सह ग्रेस इण्डिया टाइम्स के सम्पादक डा.शशिधर मेहता ने कही।उन्होंने कहा कि देश में तर्कवादियों, स्वतंत्र सोच रखने वालों और पत्रकारों की हत्या की कई घटनाओं ने ऐसा माहौल पैदा कर दिया है कि असंतोष,वैचारिक मतभेद और विचारों को लेकर असहमति आपकी जान को ख़तरे में डाल सकती है। इसे सहन नहीं किया जा सकता और इसे सहन नहीं किया जाना चाहिए। बेंगलुरु में वरिष्ठ पत्रकार गौरी लंकेश की हत्या, गाजीपुर में पत्रकार राजेश मिश्रा की गोली मारकर हत्या, बिहार के मुजफ्फरपुर के अहियापुर थाना क्षेत्र में मनोज कुमार पर अपराधियों ने हमला कर दिया,मधेपुरा के मुरलीगंज में पत्रकार रंजीत कुमार सुमन के साथ ठीकेदारों ने की मारपीट,अररिया के फारबिसगंज में पत्रकार हरेन्द्र कुमार को जान से मारने व झूठे केस में फ़साने की धमकी मिली जैसी घटना से पत्रकार भय और आतंक के दौर से गुजरने को मजबूर हो रहें है।

संजय कुमार सुमन

नेशनल जर्नलिस्ट एसोसियन के राष्ट्रीय महासचिव संजय कुमार सुमन ने कहा कि आये दिन लगातार पत्रकार पर हमले किये जा रहें है और इस तरह के मामले बिहार में कुछ ज्यादा ही हो रहे हैं।  इस कार्य में असामाजिक तत्व के अलावे कुछ अधिकारी भी शामिल नजर आ रहे हैं जो काफी चिंता जनक है। पत्रकार अपने कर्तव्य से बंधे होने के साथ सरकार व समाज के बीच केवल सेतु का ही काम नहीं करती बल्कि सरोकार के साथ सरकार के हर प्रयास में सक्रिय भागीदारी निभाती रही है। लेकिन सरकार हमारी पीड़ाओं को लगातार अनदेखी करती रही है । लिहाजा आज पत्रकारिता का क्षेत्र काफी जटिल व संकट से घिर गया है। उन्होंने कहा कि यह हमारे लोकतंत्र के लिए अत्यंत दुखद क्षण हैं और यह घटना सचेत करती है कि असहिष्णुता और कट्टरता हमारे समाज में अपना सिर उठा रही है। पत्रकारों को अपमानित, प्रताड़ित, पिटाई व जानलेवा हमले में असामाजिक तत्व के अलावा अधिकारी भी हमलावर रहें है। कई अन्य पत्रकारों और उनके परिजनों पर जानलेवा हमले भी हुए हैं। उन्हें डराया धमकाया व झूठे केस में फंसाया गया है। हमारा शिकायत है कि राज्य में सुशासन होने का दावा करने वाले नीतीश कुमार यह विश्वास दिला पाने में नाकाम रहे हैं कि गलत कार्यो के खिलाफ आवाज उठाने के बाद पत्रकार सुरक्षित हैं। उक्त तमाम मुद्दों पर बड़ी लड़ाई लड़ने की जरूरत महशुस की जा रही है और इस लड़ाई को अंजाम तक पहुंचने के लिए देश के सभी पत्रकार को एक होना होगा ।

वरिष्ठ पत्रकार रमेश ठाकुर

वरिष्ठ पत्रकार रमेश ठाकुर  नेशनल जर्नलिस्ट एसोसियन के संरक्षक सह वरिष्ठ पत्रकार रमेश ठाकुर ने कहा कि दुनियाभर में सत्तावर्ग को सबसे ज्यादा सरदर्द प्रेस की आजादी की वजह से है।प्रेस को साधे बगैर सत्ता के लिए मनमानी करना असंभव है और इस लिए सधे हुए पत्रकारों की तुलना में बागी जनपक्षधर पत्रकारो पर हमले हर देश में हर काल में होते रहते हैं। कुछ पत्रकारों पर हमले हों तो बाकी पत्रकारों को फर्क नहीं पड़ता, इस आत्मघाती प्रवृत्ति से पत्रकारिता का जोखिम भारत में भी बढ़ता जा रहा है।पत्रकारिता इसीलिए लहूलुहान है।किसी को किसी के जाने मरने की कोई परवाह नहीं है।बाहरी हमले जितने हो रहे हैं,उससे कहीं ज्यादा पत्रकारिता के तंत्र में सफाया अभियान है। बिहार में पिछले एक साल के दौरान पत्रकारों की हत्या,उत्पीडन के दर्जनों मामले सामने आ चुके हैं। इस दौरान कई अन्य पत्रकारों और उनके परिजनों पर जानलेवा हमले भी हुए हैं। उन्हें डराया धमकाया गया है। कई वर्ग की शिकायत है कि राज्य में सुशासन होने का दावा करने वाले नीतीश कुमार यह विश्वास दिला पाने में नाकाम रहे हैं कि गलत कामों के खिलाफ आवाज उठाने के बाद भी पत्रकार सुरक्षित हैं।

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