​बगहा:– मनुष्य जीवन में “संतोष” के महत्व पर विशेष-

बगहा:– मनुष्य जीवन में “संतोष” के महत्व पर विशेष-

सुप्रभात-सम्पादकीय

दैनिक खोज खबर बगहा पश्चिमी चंपारण संवाददाता विजय कुमार शर्मा की कलम से

साथियों,

     मनुष्य जीवन संतोष का बड़ा महत्व होता है। संतोष मनुष्य को ईश्वर के निकट पहुंचाकर मोक्ष का मार्ग प्रस्तत कर देता है।लेकिन यह बाजार में नहीं बिकता है बल्कि यह आत्मा से मिलता है। संतोष और आत्मसंतोष दोनों अलग होते हैं और दोनों में जमी आसमा का अंतर होता है।आत्मसंतोष ही आत्मतुष्ष्टि होता है और संतोष सहनशीलता इंसानियत ईश्वरवादी होने का परिचायक होता है। मनुष्य को जीवन में जल्दी संतोष नहीं मिलता है और उसकी मृगतृष्णा का कभी अंत नही होता है।जिस मनुष्य की मृगतृष्णा तृप्त नही होती है उसका अंत हो जाता है।

संतोष वह अमूल्य निधि है  जिसके आगे संसार की सारी निधियां बेकार हो जाती हैं। संतोष आने के बाद सारे धन दौलत मिट्टी के समान हो जाते हैं।कहा भी गया है कि -” गोधन गजधन बाजधन और रत्न धन खान, जब आवै संतोष धन, तब सब धन धूरि समान”। आजकल मनुष्य के पास सब कुछ हैं फिर भी उसे संतोष नही मिल रहा है।मनुष्य निन्नाबें को सौ करने में लगा है और वह पूरे नहीं हो पा रहे हैं।फलस्वरूप उसे संतोष नही मिल पा रहा है।लोग फुटपाथ से महलों में पहुंच गये हैं और टके टके के मोहताज करोड़पति अरबपति दुनिया के अमीरों की लाइन में नम्बर वन हो गये हैं फिर भी अभी उन्हें संतोष नही मिल पा रहा है।संतोष पाने के लिए लोगों को रात में नींद की गोलियां खानी पड़ रही हैं। दूसरी तरफ कहा गया है कि -“सांईं इतना दीजिए जामे कुटुंब समाय हम भी भूखें न रहे साधु न भूखा जाय”। संतोष न मिलना ही मनुष्य को अपराधिक गैर समाजिक और पथ भ्रष्ट बनाकर नरकगामी बना देता है।संतोष पाने के चक्कर में मनुष्य भागता जा रहा हैं थकान के बावजूद थकान महसूस नहीं कर रहा है।घर परिवार जिला देश छोड़कर संतोष के लिये चला जाता है लेकिन अंत में निराशा ही उसके लगती है।

मनुष्य को जीवन में संतोष तब मिलता है जब पराई सम्पत्ति मिट्टी से भी गयी गुजरी दिखाई देने लगती है और जो ईश्वर देता है उसमें संतोष कर लेता है।मनुष्य को असली संतोष तब मिलता जबकि आत्मा का परमात्मा से मिलन हो जाता है।कुछ लोग अपराधिककृत्य करके , दूसरों  और बेगुनाहों का शोषण करके संतोष पाने का अहसास कर लेते हैं तो कुछ लोग रात दिन कमाई करके क्षणिक संतोष की अनुभूति कर लेते हैं।

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