​जयपुर मे पत्रकारों से डाक बंगले मे ठहरने के वसुले जाते है पैसे,सरकार कहती है नि:शुल्क व्यवस्था

जयपुर मे पत्रकारों से डाक बंगले मे ठहरने के वसुले जाते है पैसे,सरकार कहती है नि:शुल्क व्यवस्था 

आपबीती कहानी वरिष्ठ पत्रकार 
देवकिशन राजपुरोहित 

राजस्थान सरकार ने राज्य के राजधानी,जिला व तहसील तक सरकारी अधिकारियों ,कर्मचारियों व पत्रकारों के यात्राओं की अवधि में आवासीय सुविधा उपलब्ध कराने के लिए सार्वजनिक निर्माण विभाग के अधीन डाक बंगलो का निर्माण कराया गया।
ये डाक बंगले रेलवे स्टेशन बस स्टैंड आदि के निकट बनवाए गए ताकि अधिकारियों कर्मचारियों पत्रकारों को आसानी से मिल जाए। इन डाक बंगलो का किराया केवल बिजली पानी के खर्चे जितना ही रखा गया था।

इन डाक बैगलो में राजपत्रित अधिकारी।अन्य कर्मचारी तथा पत्रकार रुक सकते हैं।आजकल कूलर गीजर आदि भी डाक बंगलो में रुकने वाले की सुविधा के लिए लगवाए गए है।

इन डाक बदलो की दरे भी रुकने वालो की आय के अनुसार रखी जाती है। वर्तमान में लगभग एक लाख रुपए मासिक वेतन पाले वालो के लिए 170/ प्रतिदिन रखा गया है। यह उतने बड़े अधिकारी के लिए मामूली राशि है। वे यह भुगतान आसानी से दे सकते हैं।

सरकार ने यही दरें सरकार द्वारा अधिस्वीकृत पत्रकारों के लिए भी स्वीकार की है जिनकी मासिक आय केवल सुखी रोटी खा कर जीवन यापन जैसे तैसे करने की है।

जयपुर में डाक बंगले में किसी पत्रकार से 170/ वसूले जाते हैं। इस किराए में तो स्टेशन रोड के किसी होटल के साधारण कमरे में भी रुका जा सकता है। ऊपर से तुर्रा यह की सरकार पत्रकारों को निशुल्क डाक बंगला सुविधा उपलब्ध कराती है।

लगता है कि प्रेस को सरकार विरोधी करने की कुछ अधिकारियों की साज़िश है और उच्चस्तरीय अधिकारियों को धोखे में रख कर आदेश जारी कर दिए होंगे। सरकार को तुरंत इस विषय पर जांच कराकर पत्रकारों की यह सुविधा निशुल्क की जावे या फिर मामूली टोकन शुल्क लगाया जावे।

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